गोरखपुर: गांवों में जांची जाएगी पानी की गुणवत्ता, बताई जा रही ये खास वजह
पहले चरण में इंसेफेलाइटिस प्रभावित 200 गांवों में होगी जांच, 2020 में इन गांवों में नहीं मिला था शुद्ध पानी।
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मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद इंसेफेलाइटिस को लेकर सतर्कता तेज हो गई है। इसी क्रम में जिले के गांवों में पानी की गुणवत्ता की जांच की जाएगी। पहले चरण में इंसेफेलाइटिस एवं कोरोना से सर्वाधिक प्रभावित रहे 200 गांवों में यह जांच होगी। रविवार को इसकी शुरूआत भी हो गई। विभिन्न ब्लाकों के 50 गांवों में जांच की गई। एक गांव में करीब 10 जल स्रोतों का परीक्षण किया जा रहा है।
कमिश्नर जयंत नार्लिकर ने 31 मई की शाम तक सभी गांवों में पेयजल की जांच कर रिपोर्ट उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। शासन की ओर से पेयजल की शुद्धता जांचने के लिए जिले को हाइड्रोजन सल्फाइड (एचटूएस) के दो हजार वायल दिए गए हैं। एक वायल से किसी एक जल स्रोत की जांच की जा सकती है। इसलिए पंचायत राज विभाग ने एक गांव में 10 वायल दिया है और 10 जल स्रोतों की जांच करने को कहा है।
शनिवार को ही सहायक विकास अधिकारी पंचायत को वायल उपलब्ध करा दिए गए थे। रविवार को इससे जांच भी शुरू हो गई। जल्द ही अन्य गांवों के लिए भी वायल आने की संभावना है। यह जांच सहायक विकास अधिकारी पंचायत की देखरेख में हो रही है। जांच में पंचायत सचिव, रोजगार सेवक व सफाई कर्मियों को लगाया गया है।
जिन ब्लाकों में पानी में आर्सेनिक होने की आशंका है, वहां भी जांच की जाएगी। जिन गांवों में पेयजल दूषित मिलेगा, वहां शुद्ध पेयजल के लिए उपाय किए जाएंगे। सबसे पहले ब्लीचिंग पाउडर व लाल दवा डाली जाएगी। यदि लगातार पीला पानी आ रहा होगा तो हैंडपंप का जीआई पाइप भी बदला जाएगा। कुछ हैंडपंपों को रीबोर भी कराया जाएगा। इसके लिए पंचायती राज के 15वें वित्त से धन खर्च होगा।
200 गांवों में पानी पीने लायक नहीं मिला था
2019 में भी एचटूएस के जरिए गांवों में पेजलय की शुद्धता की जांच हो चुकी है। करीब दो हजार राजस्व गांवों की जांच में 200 में पानी पीने लायक नहीं मिला था। उनमें से कई गांवों में हैंडपंप रीबोर कराए गए थे और ब्लीचिंग पाउडर व लाल दवा डाली गई थी।
डीपीआरओ हिमांशु शेखर ठाकुर का कहना है कि गांवों में पेयजल की शुद्धता की जांच की जानी है। प्रथम चरण में 2000 वायल मिले हैं, इससे कोरोना एवं इंसेफेलाइटिस से प्रभावित 200 गांवों में जांच की जा रही है। हर गांव में 10 वायल दिए गए हैं और वहां 10-10 जल स्रोतों की जांच होगी। 31 मई को रिपोर्ट आ जाने की संभावना है, उसके बाद पेयजल को शुद्ध बनाने के उपाय किए जाएंगे।