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यूपी पंचायत चुनाव: आरक्षण बदलने से हाथ लगी निराशा, इन खास लोगों के मंसूबों पर भी फिरा पानी
Wed, 03 Mar 2021 09:23 AM IST
vivek shukla
टीपी शाही, गोरखपुर।
टीपी शाही, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Wed, 03 Mar 2021 09:23 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला।
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उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में पिछले जिला पंचायत सदन में जिन सदस्यों की आवाज हमेशा गूंजती रही, आरक्षण बदलने से अबकी बार उनमें से कई लोग चुनाव नही लड़ पाएंगे। कई ऐसे नेता हैं जो जिला पंचायत सदस्य बनने की तैयारी लंबे समय से कर रहे थे। इनको भी आरक्षण ने मायूस किया है।
निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष गीतांजली यादव के कार्यकाल में कुछ सदस्य थे, जो हर मुद्दे पर बेबाक टिप्पणी करते थे। इनमें से एक नाम निवर्तमान सदस्य व भाजपा नेता मायाशंकर शुक्ला का है। मायाशंकर इस बार चुनाव नही लड़ पाएंगे। यह सीट ओबीसी के लिए आरक्षित हो गई है।
गगहा ब्लॉक से निवर्तमान जिला पंचायत सदस्य पंकज शाही सपा में हैं। क्षेत्र के विकास या जनहित का मुद्दा हो, सदन में उनकी आवाज हमेशा गूंजती रही है। इस बार पंकज शाही की सीट अनुसूचित वर्ग के लिए आरक्षित हो गई है। लिहाजा, बिना चुनाव लड़े ही पंकज मैदान से बाहर हो गए हैं।
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पिपराइच ब्लॉक के जिला पंचायत सदस्य जितेंद्र सिंह सदन में हर मुद्दे पर चर्चा में शामिल रहते हैं। इस बार पिपराइच ब्लॉक का यह वार्ड अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हो गया। ये कुछ उदाहरण भर है। ज्यादातर सदस्यों के वार्ड का आरक्षण बदला है। इस नाते वे भी बिना चुनाव लड़े मैदान से बाहर हो गए हैं।
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निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष गीतांजली यादव के कार्यकाल में कुछ सदस्य थे, जो हर मुद्दे पर बेबाक टिप्पणी करते थे। इनमें से एक नाम निवर्तमान सदस्य व भाजपा नेता मायाशंकर शुक्ला का है। मायाशंकर इस बार चुनाव नही लड़ पाएंगे। यह सीट ओबीसी के लिए आरक्षित हो गई है।
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गगहा ब्लॉक से निवर्तमान जिला पंचायत सदस्य पंकज शाही सपा में हैं। क्षेत्र के विकास या जनहित का मुद्दा हो, सदन में उनकी आवाज हमेशा गूंजती रही है। इस बार पंकज शाही की सीट अनुसूचित वर्ग के लिए आरक्षित हो गई है। लिहाजा, बिना चुनाव लड़े ही पंकज मैदान से बाहर हो गए हैं।
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पिपराइच ब्लॉक के जिला पंचायत सदस्य जितेंद्र सिंह सदन में हर मुद्दे पर चर्चा में शामिल रहते हैं। इस बार पिपराइच ब्लॉक का यह वार्ड अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हो गया। ये कुछ उदाहरण भर है। ज्यादातर सदस्यों के वार्ड का आरक्षण बदला है। इस नाते वे भी बिना चुनाव लड़े मैदान से बाहर हो गए हैं।
कुछ और के मंसूबों पर भी फिरा पानी
आरक्षण की अनंतिम सूची ने कुछ और लोगों के मंसूबों पर पानी फेरा है। जिला सहकारी बैंक के पूर्व अध्यक्ष रामदरश विद्यार्थी विगत पांच साल से जिला पंचायत के जिस वार्ड से चुनाव की तैयारी कर रहे थे, अनारक्षित हो गया है। इससे रामदरश निराश हैं। वार्ड के अनारक्षित होने से दावेदार अधिक होंगे। इससे लड़ाई और कठिन हो जाएगी। यह महज उदाहरण है। आधे से अधिक सदस्य वार्डों के परिसीमन में बिना लड़े मैदान से बाहर हो गए।
खुशी का ठिकाना नहीं
पाली ब्लॉक से दो बार जिले की सबसे बड़ी पंचायत में पहुंचने वाले एसपी सिंह का वार्ड अनारक्षित हो गया। एसपी सिंह पिछड़ी जाति के हैं, फिर भी चुनावी तैयारी में हैं। उनका दावा है कि इस बार हैट्रिक मारेंगे। आरक्षण बदलने से कोई गड़बड़ी नहीं होगी। सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष रजनीश यादव पिछले सदन के सदस्य रह चुके हैं। इस बार वार्ड अनारक्षित हो गया है। इससे खुश हैं।
खुशी का ठिकाना नहीं
पाली ब्लॉक से दो बार जिले की सबसे बड़ी पंचायत में पहुंचने वाले एसपी सिंह का वार्ड अनारक्षित हो गया। एसपी सिंह पिछड़ी जाति के हैं, फिर भी चुनावी तैयारी में हैं। उनका दावा है कि इस बार हैट्रिक मारेंगे। आरक्षण बदलने से कोई गड़बड़ी नहीं होगी। सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष रजनीश यादव पिछले सदन के सदस्य रह चुके हैं। इस बार वार्ड अनारक्षित हो गया है। इससे खुश हैं।