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Gorakhpur News: दाउदपुर काली मंदिर में भक्तों की अटूट आस्था
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शारदीय नवरात्रि के पहले दिन माया बाजार स्थित हड्डी माता मंदिर में पूजा अर्चना करते श्रद्धालु। फ
गोरखपुर। शहर के दाउदपुर स्थित काली मंदिर में मां महाकाली के प्रति श्रद्धालुओं की अटूट आस्था है। शारदीय नवरात्र में यहां दर्शन-पूजन के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ती है। श्रद्धालु मां के दरबार में मत्था टेककर सुख-शांति और समृद्धि की कामना करते हैं। नवरात्र के दौरान मंदिर में विशेष पूजन-अर्चन किया जाता है।
मंदिर के पुजारी विजय शंकर पांडेय के अनुसार, मुगलकाल से जुड़ी मान्यताओं के बीच यह मंदिर वर्ष 1870 के आसपास अधिक प्रसिद्ध हुआ। स्थानीय लोगों ने मंदिर की स्थापना की थी। यहां मां महाकाली की प्रतिमा शेर पर सवार शांत मुद्रा में विराजमान है, जो श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। मंदिर परिसर में मां महाकाली के साथ राधा-कृष्ण, सीता-राम, हनुमान, शिव परिवार, भगवान गणेश और काल भैरव की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं। श्रद्धालु मां महाकाली के दर्शन के साथ अन्य देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना भी करते हैं।
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नौ दिनों तक होता है दुर्गा सप्तशती का पाठ
नवरात्र में मंदिर में विधि-विधान से कलश स्थापना की जाती है। प्रतिदिन सुबह-शाम मां की आरती होती है। इस दौरान मंदिर परिसर भक्तिमय हो जाता है। नौ दिनों तक दुर्गा सप्तशती का पाठ किया जाता है और मां महाकाली को पंचमेवा का भोग लगाया जाता है। इन धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचते हैं।
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मंदिर के पुजारी विजय शंकर पांडेय के अनुसार, मुगलकाल से जुड़ी मान्यताओं के बीच यह मंदिर वर्ष 1870 के आसपास अधिक प्रसिद्ध हुआ। स्थानीय लोगों ने मंदिर की स्थापना की थी। यहां मां महाकाली की प्रतिमा शेर पर सवार शांत मुद्रा में विराजमान है, जो श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। मंदिर परिसर में मां महाकाली के साथ राधा-कृष्ण, सीता-राम, हनुमान, शिव परिवार, भगवान गणेश और काल भैरव की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं। श्रद्धालु मां महाकाली के दर्शन के साथ अन्य देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना भी करते हैं।
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नौ दिनों तक होता है दुर्गा सप्तशती का पाठ
नवरात्र में मंदिर में विधि-विधान से कलश स्थापना की जाती है। प्रतिदिन सुबह-शाम मां की आरती होती है। इस दौरान मंदिर परिसर भक्तिमय हो जाता है। नौ दिनों तक दुर्गा सप्तशती का पाठ किया जाता है और मां महाकाली को पंचमेवा का भोग लगाया जाता है। इन धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचते हैं।
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