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कोरोना का असर: महराजगंज जेल के दो कैदियों ने पैरोल पर मिली रिहाई लेने से किया इनकार, ये है बड़ी वजह
Sun, 23 May 2021 03:37 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, महराजगंज।
अमर उजाला नेटवर्क, महराजगंज।
Published by: vivek shukla
Updated Sun, 23 May 2021 03:37 PM IST
सार
जेल की व्यवस्था देखकर दो कैदियों ने पैरोल पर जाने से किया इंकार। कैदी को बाहर जाने पर नहीं मिलेगा काम और पौष्टिक भोजन।
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महराजगंज जिला जेल में सजायाफ्ता कैदी।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
जेल न जाने की गुहार लगाते हुए कई लोग देखे जा सकते हैं, लेकिन महराजगंज जिला जेल में दो सजायाफ्ता कैदियों ने पैरोल पर मिली रिहाई को लेने से इनकार कर दिया है। पैरोल मिलने के बाद दोनों कैदियों ने जेलर को पत्र लिखकर आर्थिक तंगी और बढ़ते कोरोना संक्रमण का हवाला देकर जेल में ही रहने देने की गुहार लगाई है। दोनों पिछले वर्ष भी पैरोल पर रिहा हुए थे। बताया जा रहा है कि उस वक्त कोई काम न मिलने के कारण उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ा। फिलहाल जेलर ने दोनों की रिहाई रोक दी गई है।
शासन द्वारा जेलों में कोविड संक्रमण फैलने की आशंका को देखते हुए जेल से बंदियों को अंतरिम जमानत और सजायाफ्ता कैदियों को 60 दिनों की पैरोल पर छोड़ा जा रहा है। जिसको देखते हुए महराजगंज जिला जेल से 76 बंदी अंतरिम जमानत पर रिहा किए जा चुके हैं। वहीं पैरोल के लिए सात कैदियों को चिह्नित किया गया है।
इनमें घुघली के हरपुर महंथ निवासी बृहस्पति (31) और श्यामदेउरवा के कछरहवां निवासी कमलेश (29) भी हैं। दोनों दहेज हत्या में सात-सात वर्ष के सजायाफ्ता हैं और 2017 से जेल में हैं।
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इस बार जब शासन द्वारा पैरोल पर जाने का आदेश मिला तो दोनों ने यह कहते हुए जेलर को पत्र लिख कर जेल के बाहर जाने से मना कर दिया कि लॉकडाउन के कारण उन्हें बाहर कोई काम नहीं मिलेगा और जेल के बाहर उन लोगों को कोरोना का डर भी बना रहेगा, क्योंकि कोरोना का संक्रमण दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है जिसके कारण उन्हें जेल में ही रहना पसंद है।
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शासन द्वारा जेलों में कोविड संक्रमण फैलने की आशंका को देखते हुए जेल से बंदियों को अंतरिम जमानत और सजायाफ्ता कैदियों को 60 दिनों की पैरोल पर छोड़ा जा रहा है। जिसको देखते हुए महराजगंज जिला जेल से 76 बंदी अंतरिम जमानत पर रिहा किए जा चुके हैं। वहीं पैरोल के लिए सात कैदियों को चिह्नित किया गया है।
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इनमें घुघली के हरपुर महंथ निवासी बृहस्पति (31) और श्यामदेउरवा के कछरहवां निवासी कमलेश (29) भी हैं। दोनों दहेज हत्या में सात-सात वर्ष के सजायाफ्ता हैं और 2017 से जेल में हैं।
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इस बार जब शासन द्वारा पैरोल पर जाने का आदेश मिला तो दोनों ने यह कहते हुए जेलर को पत्र लिख कर जेल के बाहर जाने से मना कर दिया कि लॉकडाउन के कारण उन्हें बाहर कोई काम नहीं मिलेगा और जेल के बाहर उन लोगों को कोरोना का डर भी बना रहेगा, क्योंकि कोरोना का संक्रमण दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है जिसके कारण उन्हें जेल में ही रहना पसंद है।
कैदी कमलेश ने बताया कि पहले मजदूरी करता था लेकिन इस लॉकडाउन में उसे जेल के बाहर मजदूरी नहीं मिलेगी, इसलिए वह जेल के बाहर नहीं जाएगा। जब सजा खत्म हो जाएगा तभी जाएगा। वहीं दूसरे कैदी बृहस्पति ने बताया कि पिछले लॉकडाउन में वह पैरोल पर जेल से बाहर गया था लेकिन उसे कोई काम नहीं मिला इसलिए इस बार वह पैरोल मिलने पर भी बाहर नही जाएगा क्योंकि जो जेल में सुविधा है वह बाहर नहीं मिलेगा।
जिला कारागार के जेलर अरविंद श्रीवास्तव ने बताया कि जेलों में कोरोना का संक्रमण न फैले इसको लेकर शासन ने पैरोल और अंतरिम जमानत देने का आदेश दिया था। महराजगंज जिला जेल के दो कैदी जिनको पैरोल मिला लेकिन उन्होंने चिट्ठी लिखकर जेल से बाहर नहीं जाने की बात कही।
उन्होंने बताया कि पिछले लॉकडाउन में भी दोनों पैरोल पर बाहर गए थे लेकिन कोई काम न मिलने से परिवार से उपेक्षित भी हुए थे जिसके कारण इस बार दोनों ने मना कर दिया। जेल में कोरोना के कारण काढ़ा समेत पौष्टिक भोजन भी दिया जा रहा है इसलिए यह भी कारण हो सकता है कि कैदी बाहर न जाना पसंद कर रहे हों।
जिला कारागार के जेलर अरविंद श्रीवास्तव ने बताया कि जेलों में कोरोना का संक्रमण न फैले इसको लेकर शासन ने पैरोल और अंतरिम जमानत देने का आदेश दिया था। महराजगंज जिला जेल के दो कैदी जिनको पैरोल मिला लेकिन उन्होंने चिट्ठी लिखकर जेल से बाहर नहीं जाने की बात कही।
उन्होंने बताया कि पिछले लॉकडाउन में भी दोनों पैरोल पर बाहर गए थे लेकिन कोई काम न मिलने से परिवार से उपेक्षित भी हुए थे जिसके कारण इस बार दोनों ने मना कर दिया। जेल में कोरोना के कारण काढ़ा समेत पौष्टिक भोजन भी दिया जा रहा है इसलिए यह भी कारण हो सकता है कि कैदी बाहर न जाना पसंद कर रहे हों।