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Gorakhpur News: चार राजयोग...खरीदारी का शुभ संयोग

Fri, 06 Nov 2026 02:47 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 06 Nov 2026 02:47 AM IST
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Trayodashi will begin today at 1:07 PM and will continue until 10:43 AM tomorrow.

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-आज दोपहर 1:07 बजे से शुरू होगी त्रयोदशी, कल सुबह 10:43 बजे तक रहेगी तिथि
-सात नवंबर को छोटी व आठ को बड़ी दिवाली
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। चार विशेष राजयोगों के संयोग में इस बार धनतेरस पर खरीदारी का शुभ अवसर मिल रहा है। शुक्रवार, हस्त नक्षत्र और शुक्र के अपनी राशि तुला में होने से मालव्य, बुधादित्य, शुक्रादित्य और लक्ष्मी नारायण योग बन रहे हैं। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इन शुभ संयोगों में सोना, चांदी, आभूषण, बर्तन और वाहन खरीदना विशेष फलदायी माना गया है। धनतेरस की त्रयोदशी तिथि शुक्रवार को दोपहर 1:07 बजे शुरू होकर शनिवार सुबह 10:43 बजे तक रहेगी।
बेतियाहाता हनुमान मंदिर के महंत आचार्य राम नारायण त्रिपाठी ने बताया कि शुक्रवार मां लक्ष्मी का दिन माना जाता है। वहीं, हस्त नक्षत्र को धन-धान्य की वृद्धि का प्रतीक माना गया है। शुक्र के तुला राशि में होने से मालव्य राजयोग बन रहा है। तुला राशि में बुध और सूर्य की स्थिति से बुधादित्य और शुक्रादित्य योग बनेंगे। वहीं, बुध और शुक्र की युति से लक्ष्मी नारायण योग का निर्माण हो रहा है। पूरे दिन खरीदारी और पूजन के लिए शुभ समय रहेगा। सात नवंबर को छोटी दिवाली और आठ नवंबर को बड़ी दिवाली मनाई जाएगी।
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गोरखनाथ मंदिर संस्कृत विद्यापीठ के ज्योतिष विभागाध्यक्ष डॉ. दिग्विजय शुक्ल ने बताया कि धनतेरस भगवान धन्वंतरि की जयंती के रूप में भी मनाई जाती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी को भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। उन्हें भगवान विष्णु का अवतार और आरोग्यता का देवता माना जाता है। उन्होंने आयुर्वेद का उपदेश देकर चिकित्सा विज्ञान को समृद्ध किया। धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि की पूजा कर आरोग्य और निरोगी जीवन की कामना की जाती है।
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लक्ष्मी-कुबेर पूजन के साथ यमदीप का भी महत्व
धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि के साथ मां लक्ष्मी और कुबेर की पूजा का विधान है। मान्यता है कि इस दिन खरीदारी करने से घर में सुख-समृद्धि आती है। सोना, चांदी, पीतल के बर्तन, वाहन और अन्य उपयोगी वस्तुएं खरीदना शुभ माना जाता है। नए बर्तनों में अन्न, मिष्ठान या धन रखकर घर लाने की परंपरा है। धनतेरस की शाम यमराज के निमित्त दीपदान भी किया जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार, यमराज ने अपने दूतों को बताया था कि धनतेरस पर उनके निमित्त दीपदान करने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है। तभी से इस दिन यमदीप जलाने की परंपरा चली आ रही है।
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