Gorakhpur News: टोरेंट कंपनी ने काटा भूमिगत केबल, औद्योगिक क्षेत्र में आपूर्ति ठप
बिजली कटौती से सबसे अधिक दिक्कत प्लास्टिक उद्योग के उद्यमियों को हुई। बिजली कटौती के दौरान प्लास्टिक का माल जम जाता है। जिसे वापस गर्म करने में एक घंटे का समय लगता है। इसके अलावा जमने के दौरान प्लास्टिक को निकालना पड़ता है।
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औद्योगिक क्षेत्र( गीडा) के पास भूमिगत केबल कटने से बुधवार को लगभग 3 घंटे तक बिजली आपूर्ति प्रभावित रही। दूसरे फीडर के केबल से जोड़कर आपूर्ति शुरू किया गया। भूमिगत केबल के फाल्ट को खोजने में काफी मशक्कत करनी प़ड़ी। इस दौरान आपूर्ति बंद रही। ढूंढने के बाद कटे केबल को फिर से जोड़ा गया। देर शाम आठ बजे तक काम चलता रहा।
सुबह लगभग 10 बजे करीब गीडा सेक्टर 15 क्षेत्र में बिजली आपूर्ति ठप हो गई। सूचना पर फाल्ट खोजा जाना शुरू हुआ तो पता पता लगा कि भूमिगत केबल में कुछ गड़बड़ी होने से आपूर्ति की दिक्कत हुई है। सूचना मिली कि टोरेंट कंपनी के गैस पाइप लाइन का काम किया जा रहा। जाकर देखा तो गीडा सेक्टर 15 के आगे भूमिगत केबल कटा हुआ था। फाल्ट खोजने में दोपहर 12:30 बज गया।
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सूचना पर मुख्य अभियंता आशू कालिया ने खंड के एसडीओ और अधीक्षण अभियंता को मौके पर भेजा। अभियंताओं ने दूसरे केबल से फीडर की आपूर्ति शुरू की। मुख्य अभियंता आशू कालिया ने बताया कि टोरेंट कंपनी की तरफ से लगातार भूमिगत केबल में दिक्कत की जा रही। पिछले दिनों भी भूमिगत केबल फाल्ट आ गया था। बिना सूचना के बिजली निगम के भूमिगत केबल के पास ही पाइप बिछा रहे हैं। केबल में दिक्कत आएगी तो गैस पाइस फटेगा ही। निगम से बिना भूमिगत केबल का नक्सा लिए ही काम किया जा रहा, तो केबल कटेगा ही।
गीडा उद्यामियों को भी हुई दिक्कत
औद्योगिक क्षेत्र गीडा के उद्यमियों को भी काफी पेरशानी उठानी पड़ी। गीडा इलेक्ट्रिसिटी डिपार्टमेंट व्हाट्सएप ग्रुप में बिजली निगम के अभियंता और उद्यमी जुड़े हैं। एक सदस्य गौरव सिंह ने लिखा कि गीडा में कहीं ट्रक पोल तोड़ देता है तो कहीं गैस वाले केबल काट देते हैं। बहुत परेशानी का सामना करना पड़ता है। गैस पाइप लाइन डालने वालों के लापरवाही से उद्योगपतियों, निगम के कर्मचारियों को परेशानी उठानी पड़ती है। ग्रैंड स्टील एंड इंजीनियरिंग ने गैस पाइप लाइन और बिजली निगम पर भी सवाल खड़े किए।
प्लास्टिक इंडस्ट्री को सबसे अधिक दिक्कत
बिजली कटौती से सबसे अधिक दिक्कत प्लास्टिक उद्योग के उद्यमियों को हुई। बिजली कटौती के दौरान प्लास्टिक का माल जम जाता है। जिसे वापस गर्म करने में एक घंटे का समय लगता है। इसके अलावा जमने के दौरान प्लास्टिक को निकालना पड़ता है। इससे लाखों रुपये का नुकसान उद्योमियों को सहना पड़ रहा। इसके अलावा 300 से 400 यूनिट प्रतिदिन कटौती से भी उद्यमी परेशान हो रहे हैं। ये बातें चेंबर ऑफ इंडस्ट्री के उपाध्यक्ष आरएन सिंह ने बताई। उन्होंने बताया कि कटौती की जानकारी मुख्य अभियंता को दी गई है। मांग की गई है कि कटौती न हो, जिससे उद्यमियों को नुकसान न उठाना पड़े।