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DDU दीक्षांत समारोह: 50 मेधावियों को मिले गोल्ड मेडल, 70 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि

Thu, 29 Jun 2023 03:12 PM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी गोरखपुर।
संवाद न्यूज एजेंसी गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Thu, 29 Jun 2023 03:12 PM IST
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Toppers honored at 41st convocation of Deen dayal Upadhyay Gorakhpur University
दीक्षांत समारोह में गोल्ड मेडल पाएं विद्यार्थी खुशी का इजहार करते हुए। - फोटो : अमर उजाला।

 दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय का 41 वां दीक्षांत समारोह बुधवार को दीक्षा भवन में आयोजित किया गया। इस दौरान विभिन्न कक्षाओं में सर्वोच्च अंक पाने वाले 50 (2022 के 46 और 2021 के चार) मेधावियों को गोल्ड मेडल दिया गया। साथ ही 70 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई।

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वहीं, मेधावियों को 83 स्मृति गोल्ड मेडल भी दिए गए। एमएससी, गणित की रचना गुप्ता को सबसे अधिक नौ गोल्ड मेडल मिले। कुलपति प्रो. राजेश सिंह के हाथों सोने का तमगा पाकर विद्यार्थियों के चेहरे खिल उठे।
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दीक्षांत समारोह की शुरुआत सुबह नौ बजे विद्वत पदयात्रा के साथ हुई। इसमें विश्वविद्यालय के सभी आचार्य, विद्या परिषद एवं कार्य परिषद के सदस्य एवं कुलसचिव शामिल हुए। समारोह में विशिष्ट अतिथि के तौर पर ऑनलाइन जुड़ीं प्रदेश सरकार की उच्च शिक्षा राज्यमंत्री रजनी तिवारी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि सफलता की पहली सीढ़ी सकारात्मक सोच है। घर, परिवार, समाज एवं देश के प्रति भी आपकी जिम्मेदारियां हैं। सकारात्मक सोच के साथ अपने लक्ष्य को प्राप्त करें।
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उन्होंने कहा कि एक विद्यार्थी को जानने, सीखने की लालसा सदैव जीवित रखनी चाहिए। जीवन में न तो ज्ञान की कोई सीमा है, और न ही सीखने की कोई उम्र। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत, सर्वाधिक संभावना वाला देश बना है। इसके पूर्व कुलपति प्रो. राजेश सिंह ने गोल्ड मेडलिस्टों एवं उपाधि धारकों को सत्य बोलने, दायित्व का निर्वहन करने, राष्ट्रहित सर्वोपरि मानने और अनुशासित जीवन जीने के लिए प्रतिज्ञा दिलाई। कार्यक्रम का संचालन प्रो. अनुभूति दुबे ने किया।

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उन्होंने कहा कि एक विद्यार्थी को जानने, सीखने की लालसा सदैव जीवित रखनी चाहिए। जीवन में न तो ज्ञान की कोई सीमा है, और न ही सीखने की कोई उम्र। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत, सर्वाधिक संभावना वाला देश बना है। केवल अमेरिका ही नहीं, बल्कि सारे देशों ने यह माना है कि आज हम विश्व की पांचवीं अर्थव्यवस्था बन गए हैं। आगे ऐसे ही कार्य करते रहे तो जल्द ही विश्व की दूसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएंगे।

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