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UP Nikay Chunav 2023: परंपरागत वोटरों के गणित पर बिछ रही बिसात, इस बिरादरी पर नहीं लगा है दांव

Thu, 13 Apr 2023 03:00 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Thu, 13 Apr 2023 03:00 PM IST
सार

गोरखपुर विश्वविद्यालय में राजनीतिक विश्लेषक एवं सहायक आचार्य डॉ. महेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि गोरखपुर की जनता बहुत जागरूक है और मिजाज भी दूसरे जगहों से अलग है। सभी राजनीतिक दलों को नकार कर यहां की जनता ने किन्नर अमरनाथ यादव को चुना था। निकाय चुनाव के बाद लोकसभा चुनाव है। ऐसे में राजनीतिक दल जातिगत आधार पर मजबूत प्रत्याशी उतारने के साथ ही अन्य जातियों में अपने परंपरागत वोटों को भी साधने की कोशिश करेंगे।

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Till now no one has firmly placed bets on Kayastha community in Gorakhpur nikay chunav
गोरखपुर नगर निगम। - फोटो : amar ujala

विस्तार

गोरखपुर निकाय चुनाव की घोषणा होते ही अब सबकी निगाहें राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों पर टिक गईं हैं। चुनावी बिसात बिछ चुकी है, अब प्रत्याशी के चेहरे के तौर पर मोहरे उतरने बाकी हैं। दंगल में कौन सा दल, किस पर दांव लगाता है, इसकी चर्चाएं भी शहर में खूब हो रही हैं। सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के नीति-नियंताओं में टिकट बंटवारे को लेकर रस्साकसी भी चल रही है। जातीय संतुलन बनाने के साथ ही परंपरागत वोटों को साधने की भी चुनौती दलों के सामने है।

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मेयर से लेकर पार्षद प्रत्याशियों का चयन अब अंतिम प्रक्रिया में है। समाजवादी पार्टी ने बुधवार शाम को अपने मेयर पद के प्रत्याशी की घोषणा कर दी। बसपा और कांग्रेस ने भी मेयर पद पर स्थानीय दावेदारों की स्क्रीनिंग करके पैनल शीर्ष नेतृत्व को भेज दिया है, लेकिन भाजपा में अभी प्रत्याशियों को लेकर दांवपेच जारी है।
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मेयर चुनाव में अगर मतदाताओं की बात करें तो कुल करीब 10.50 लाख वोटर हैं, जिनमें जातिगत आधार पर सबसे ज्यादा वैश्य और कायस्थ बिरादरी से हैं। पिछले चुनावों के आंकड़ों पर नजर दौड़ाएं तो दो बार वैश्य समाज से मेयर चुने जा चुके हैं। पहले मेयर बने पवन बथवाल वैश्य समाज से आते हैं। उन्होंने कांग्रेस के बैनर तले चुनाव जीता था। इस समाज से वर्ष 2017 में भाजपा से सीताराम जायसवाल मेयर चुने गए। दूसरे नंबर पर सपा के राहुल गुप्ता थे, जो वैश्य समाज से ही आते हैं। इसी तरह ब्राह्मण समाज से डॉ. सत्या पांडेय भी भाजपा से चुनाव लड़कर जीती थीं।
 

जातिगत समीकरण को आधार बनाकर कायस्थ समाज इस बार बहुत उत्साहित है। इस बिरादरी के लोगों का कहना है कि विधायक व मेयर के चुनाव में समाज के लोगों को प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाया है। इस बार सीट सामान्य है और जातीय समीकरण को देखें तो हम करीब 20 फीसदी हैं। उधर, निषाद समाज का भी जातीय आधार पर दावा है। जो दस नए वार्ड बने हैं उनमें पांच वार्ड में तो निषाद समाज की बहुलता है।

गोरखपुर विश्वविद्यालय में राजनीतिक विश्लेषक एवं सहायक आचार्य डॉ. महेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि गोरखपुर की जनता बहुत जागरूक है और मिजाज भी दूसरे जगहों से अलग है। सभी राजनीतिक दलों को नकार कर यहां की जनता ने किन्नर अमरनाथ यादव को चुना था। निकाय चुनाव के बाद लोकसभा चुनाव है। ऐसे में राजनीतिक दल जातिगत आधार पर मजबूत प्रत्याशी उतारने के साथ ही अन्य जातियों में अपने परंपरागत वोटों को भी साधने की कोशिश करेंगे। सिर्फ जातीय समीकरण के आधार पर चुनाव नहीं जीता जा सकता है, इसके साथ विचारधारा भी मिलना जरूरी है।

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मतदाताओं की संख्या
वैश्य : 20-22 फीसदी
कायस्थ : 18 से 20 फीसदी
अल्पसंख्यक : 25 से 27 फीसदी
ब्राह्मण : 10 से 14 फीसदी
निषाद : 10 फीसदी
अनुसूचित जाति : 5 से 7 फीसदी
यादव : 5 से 7 फीसदी
पासवान : 5 फीसदी
क्षत्रिय : 5 फीसदी
नोट : ये आंकड़ें राजनीतिक दलों के हैं।

नेताओं ने क्या कहा

भाजपा क्षेत्रीय अध्यक्ष सहजानंद राय ने कहा कि मेयर और वार्ड के प्रत्याशियों के चयन में कई बिंदुओं का ख्याल रखा जाएगा। पहला तो वह पार्टी का कार्यकर्ता हो और सामाजिक स्तर पर उसकी पहचान होनी चाहिए। मेयर के लिए सामान्य सीट होने के चलते जातीय समीकरण भी एक अहम पहलू है। लोकसभा चुनाव भी आने वाला है, उसे भी ध्यान में रखना है कि संतुलन बना रहे। स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक में सभी पैमानों पर प्रत्याशियों को परखा जाएगा। उसके बाद सूचिबद्ध करके उसे प्रदेश कार्यालय भेज दिया जाएगा।
 
सपा जिलाध्यक्ष ब्रजेश गौतम ने कहा कि हमारी पार्टी की मेयर पद की प्रत्याशी काजल निषाद होंगी। वहीं, वार्ड प्रत्याशियों के चयन में सामाजिक, जातीय पहलू को भी देखा गया। जिले स्तर पर स्क्रीनिंग कर नाम शीर्ष नेतृत्व को भेज दिए गए हैं। अंतिम निर्णय राष्ट्रीय अध्यक्ष के स्तर से होना है। स्क्रीनिंग के बाद मेयर के लिए पांच नाम भेजे गए थे। वहीं पार्षद पद के लिए दो-दो नाम भेजे गए हैं। इसी तरह नगर पंचायत अध्यक्ष के लिए भी दो-दो नाम भेजे गए हैं। टिकट के लिए चयन का आधार राष्ट्रीय अध्यक्ष का ही होगा।



बसपा जिलाध्यक्ष जीतेंद्र कुमार नीरज ने कहा कि प्रत्याशियों के चयन में मजबूत और जिताऊ के साथ जातिगत समीकरण का पूरा ख्याल रखा गया है। शहर में जिस बिरादरी की संख्या ज्यादा होती है उसका दबाव ज्यादा होता है। लेकिन, परंपरागत वोटरों को ध्यान में रखकर ही चयन किया जाता है। मेयर पद के लिए अभी चार नाम सामने आए हैं, जो पार्टी मुख्यालय भेज दिए गए हैं। ब्राह्मण समाज, निषाद बिरादरी और मुस्लिम समाज के एक-एक बड़े नेताओं का नाम पार्टी के आला कमान को भेजा गया है।

कांग्रेस की जिलाध्यक्ष निर्मला पासवान ने कहा कि मेयर के प्रत्याशी के चयन में कई तरह के समीकरण देखे जा रहे हैं। उम्मीदवार का दमखम, जाति की बहुलता और उसकी लोकप्रियता पर खास फोकस किया गया है। इन्हीं सब पहलुओं को ध्यान में रखकर पांच संभावित प्रत्याशियों का चयन कर शीर्ष नेतृत्व को भेजा गया है। इसी तरह वार्ड के प्रत्याशियों का भी चयन उनके वार्ड की परिस्थितियों को देखकर ही किया जाएगा। शहर के मेयर पद पर कांग्रेस का भी कब्जा रहा है। पवन बथवाल शहर के पहले मेयर बने थे। हमारी कोशिश है कि मजबूत प्रत्याशी उतारें ताकि फिर से कब्जा हो सके।

 
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