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Gorakhpur News: एम्स गोरखपुर में बनेगा आयुष विंग, मरीजों को मिलेगा समग्र उपचार
Thu, 23 Jul 2026 02:31 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Thu, 23 Jul 2026 02:31 AM IST
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गोरखपुर। एम्स में जल्द ही आयुष विंग की स्थापना होने जा रही है। इसके शुरू होने के बाद मरीजों को एलोपैथी के साथ आयुर्वेद, होम्योपैथी, योग और नेचुरोपैथी पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों का लाभ एक ही परिसर में मिलेगा। इससे मरीजों के समग्र उपचार का दायरा बढ़ेगा और उन्हें विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों के बीच बेहतर विकल्प उपलब्ध होंगे।
आयुष विंग की स्थापना के लिए तीन चिकित्सकों की नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही है। इन पदों के लिए करीब 200 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया है। चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद चिकित्सकों की नियुक्ति की जाएगी और इसके बाद विंग को चरणबद्ध तरीके से शुरू किया जाएगा। कार्यकारी निदेशक डॉ. विभा दत्ता ने बताया कि आयुष विंग में आयुर्वेद, होम्योपैथी, योग और प्राकृतिक चिकित्सा की ओपीडी सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके माध्यम से जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों, जोड़ों के दर्द, तनाव, मोटापा, मधुमेह, उच्च रक्तचाप और अन्य दीर्घकालिक रोगों के उपचार और प्रबंधन में मरीजों को अतिरिक्त सहायता मिलेगी। योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा के जरिए रोगों की रोकथाम और स्वस्थ जीवनशैली को भी बढ़ावा दिया जाएगा। एम्स गोरखपुर में आयुष सेवाओं के शुरू होने से पूर्वांचल के मरीजों को एक ही संस्थान में आधुनिक और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों का लाभ मिल सकेगा।
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आयुष विंग की स्थापना के लिए तीन चिकित्सकों की नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही है। इन पदों के लिए करीब 200 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया है। चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद चिकित्सकों की नियुक्ति की जाएगी और इसके बाद विंग को चरणबद्ध तरीके से शुरू किया जाएगा। कार्यकारी निदेशक डॉ. विभा दत्ता ने बताया कि आयुष विंग में आयुर्वेद, होम्योपैथी, योग और प्राकृतिक चिकित्सा की ओपीडी सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके माध्यम से जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों, जोड़ों के दर्द, तनाव, मोटापा, मधुमेह, उच्च रक्तचाप और अन्य दीर्घकालिक रोगों के उपचार और प्रबंधन में मरीजों को अतिरिक्त सहायता मिलेगी। योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा के जरिए रोगों की रोकथाम और स्वस्थ जीवनशैली को भी बढ़ावा दिया जाएगा। एम्स गोरखपुर में आयुष सेवाओं के शुरू होने से पूर्वांचल के मरीजों को एक ही संस्थान में आधुनिक और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों का लाभ मिल सकेगा।
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