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मुहर्रम में इस बार नहीं होंगे, देश-विदेश की ताजियों के दीदार

Tue, 11 Aug 2020 11:34 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Tue, 11 Aug 2020 11:34 AM IST
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This Muharram not see crown of India and abroad
Muharram 2020 - फोटो : अमर उजाला।

पैगंबर-ए-आजम हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम के नवासे हजरत सैयदना इमाम हुसैन रजियल्लाहु अन्हु व कर्बला के 72 शहीदों को माह-ए-मुहर्रम में शिद्दत से याद किया जाता है। इस्लामी नया साल माह-ए-मुहर्रम से शुरू होता है। 21 या 22 अगस्त से माह-ए-मुहर्रम शुरू होगा लेकिन कोरोना की वजह इस बार मुहर्रम की कोई तैयारी नहीं है।

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गोरखपुर में माह-ए-मुहर्रम में अदा की जाने वाली रस्में, जुलूस, इमामबाड़े का मेला, लाइन की ताजिया, सोने-चांदी व गेहूं की ताजिया पूरे देश में मशहूर है। इस बार कोरोना महामारी की वजह से सभी पर ब्रेक लगना तय माना जा रहा है।
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कई महीने पहले से बनने वाली पूरे देश में मशहूर लाइन की ताजिया इस बार नहीं बन रही हैं। देशी-विदेशी मस्जिदों, दरगाहों व मकबरों को यहां के हुनरमंद हाथ ताजिया की शक्ल देते हैं। इन ताजियों की कीमत पचास हजार रुपये से लेकर सवा लाख रुपये तक आती है।

इन्हें बनाने में कई माह लगते हैं। ताजिया बनाने वालों में जबरदस्त मुकाबला होता है। शहर में 300 ताजिया तैयार होती है। हजारों लोग इन ताजियों को देखने उमड़ते हैं। शानदार ताजियों को इनाम से नवाजा जाता है।

कोरोना ने लोगों को किया निराश

चक्सा हुसैन के अब्दुल हफिज ने कहा कि कोरोना का असर इस बार ताजिये के व्यापार पर पड़ा है। हर साल मुहर्रम में लाखों रुपये का कारोबार ताजिया के माध्यम से हो जाता था। लेकिन इस बार अबतक एक भी ताजिये के ऑर्डर नहीं मिले हैं। 

तुर्कमानपुर निवासी मनोव्वर अहमद ने कहा कि पिछले साल मलेशिया की हाजी सुल्तान मस्जिद, इराक का मकबरा, बरेली शरीफ की दरगाह, कोलकाता की नाखुदा मस्जिद सहित देश-विदेश की मस्जिदों व दरगाहों के मॉडल ताजिया के रुप में देखने को मिले थे। इस बार कोरोना वायरस के कारण कोई तैयारी नहीं है।

मियां बाजार के नूर मोहम्मद ने कहा कि शहर से निकलने वाली लाइन की ताजिया का जुलूस शानदार व लाजवाब रहता है। लाइन की ताजिया की शोहरत दूर तलक है। लाइन की ताजिया 9वीं व 10वीं मुहर्रम को बाद नमाज मगरिब से निकालने की परंपरा है।

रहमतनगर के अली गजनफर शाह ने कहा कि इस बार खूबसूरत ताजिया देखने को नहीं मिलेगा। पिछले साल शहर के तमाम मोहल्लों में भारत, मलेशिया, इंडोनेशिया, बहरीन, ओमान, सऊदी अरब, तुर्की आदि की मस्जिदों का मॉडल ताजिया के रुप में बनाए जाते हैं।
 
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