{"_id":"69c3030b75ef5a83c8042e16","slug":"they-used-to-provide-loans-to-people-through-fake-stamps-and-documents-gorakhpur-news-c-7-gkp1062-1268725-2026-03-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"Gorakhpur News: फर्जी स्टांप और दस्तावेजों के जरिये लोगों को दिलाते थे लोन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Gorakhpur News: फर्जी स्टांप और दस्तावेजों के जरिये लोगों को दिलाते थे लोन
विज्ञापन
विज्ञापन
- आरोपियों के पास से पुलिस ने बरामद किया है फर्जी मोहर
गोरखपुर। साइबर ठगी के रुपये ठिकाने लगाने वाले गिरोह के गुर्गे लोगों को लोन दिलाने का झांसा देते थे। इसके लिए वह फर्जी स्टांप और दस्तावेजों का इस्तेमाल करते थे। इसी के जरिये प्राइवेट और सरकारी बैंकों से आसानी से लोन अप्रूव करवा देते थे।
आरोपियों के पास से पुलिस को आठ फर्जी मोहर भी मिले हैं। यह राजस्व विभाग और अन्य सरकारी विभागों के हैं। इसका इस्तेमाल वह भू-नक्शा बनाने के लिए भी करते थे। पुलिस इस एंगल पर भी जांच कर रही है कि कहीं इसमें विभाग का कोई कर्मचारी तो शामिल नहीं।
दरसअल, गोरखपुर में ध्रुव साहनी ही गुर्गों को निर्देश देता था। सभी आरोपियों का काम बंटा हुआ था। कोई लोगों से दस्तावेज लेकर सिम निकालते और बाद में खाते खुलवाते। खाता खुलवाने के बाद उसका पासबुक, एटीएम कार्ड अपने पास ही रखते। इसके बाद दूसरा आरोपी उसमें ठगी की रकम ट्रांसफर करता था। तीसरे का काम होता उस रकम को निकालकर बाहर भेजना। इसके लिए सभी का कमीशन तय था। पुलिस के अनुसार, एक आरोपी को काम के हिसाब से सात से आठ प्रतिशत कमीशन मिलता था।
विज्ञापन
कई बार ये जिन लोगों के खाते इस्तेमाल करते उनको भी रकम का एक से दो प्रतिशत हिस्सा देते थे। आमतौर पर ये उन लोगाें को टारगेट करते थे जो लोन लेने की कोशिश कर रहे होते थे। ध्रुव को वाराणसी, भदोही और लखनऊ में बैठे मास्टरमाइंड से अपडेट मिलता था।
रुपये कहां भेजे, इसकी हो रही जांच
साइबर ठगी की रकम को खाते में मंगाने के बाद आरोपी उसे कैसे ठिकाने लगाते थे, पुलिस इसकी जांच कर रही है। हाल ही में खोराबार थाने में भी इससे जुड़ा एक मामला आया था, जिसमें रुपये को क्रिप्टो में बदलकर विदेशों में भेजा जाता था। आशंका है कि इस मामले में भी रुपये को बाहर भेजा जा सकता है।
गोरखपुर। साइबर ठगी के रुपये ठिकाने लगाने वाले गिरोह के गुर्गे लोगों को लोन दिलाने का झांसा देते थे। इसके लिए वह फर्जी स्टांप और दस्तावेजों का इस्तेमाल करते थे। इसी के जरिये प्राइवेट और सरकारी बैंकों से आसानी से लोन अप्रूव करवा देते थे।
आरोपियों के पास से पुलिस को आठ फर्जी मोहर भी मिले हैं। यह राजस्व विभाग और अन्य सरकारी विभागों के हैं। इसका इस्तेमाल वह भू-नक्शा बनाने के लिए भी करते थे। पुलिस इस एंगल पर भी जांच कर रही है कि कहीं इसमें विभाग का कोई कर्मचारी तो शामिल नहीं।
विज्ञापन
दरसअल, गोरखपुर में ध्रुव साहनी ही गुर्गों को निर्देश देता था। सभी आरोपियों का काम बंटा हुआ था। कोई लोगों से दस्तावेज लेकर सिम निकालते और बाद में खाते खुलवाते। खाता खुलवाने के बाद उसका पासबुक, एटीएम कार्ड अपने पास ही रखते। इसके बाद दूसरा आरोपी उसमें ठगी की रकम ट्रांसफर करता था। तीसरे का काम होता उस रकम को निकालकर बाहर भेजना। इसके लिए सभी का कमीशन तय था। पुलिस के अनुसार, एक आरोपी को काम के हिसाब से सात से आठ प्रतिशत कमीशन मिलता था।
विज्ञापन
कई बार ये जिन लोगों के खाते इस्तेमाल करते उनको भी रकम का एक से दो प्रतिशत हिस्सा देते थे। आमतौर पर ये उन लोगाें को टारगेट करते थे जो लोन लेने की कोशिश कर रहे होते थे। ध्रुव को वाराणसी, भदोही और लखनऊ में बैठे मास्टरमाइंड से अपडेट मिलता था।
रुपये कहां भेजे, इसकी हो रही जांच
साइबर ठगी की रकम को खाते में मंगाने के बाद आरोपी उसे कैसे ठिकाने लगाते थे, पुलिस इसकी जांच कर रही है। हाल ही में खोराबार थाने में भी इससे जुड़ा एक मामला आया था, जिसमें रुपये को क्रिप्टो में बदलकर विदेशों में भेजा जाता था। आशंका है कि इस मामले में भी रुपये को बाहर भेजा जा सकता है।