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Gorakhpur News: गाजियाबाद पहुंची टीम, आज से होगा आरोपियों का लाई डिटेक्टर टेस्ट

Sat, 01 Aug 2026 03:00 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 01 Aug 2026 03:00 AM IST
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The team reached Ghaziabad, the accused will undergo lie detector test from today.
- चौरीचौरा डबल मर्डर : वादी खुशबू और तीन नामजद आरोपियों का होना है टेस्ट
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- पहुंचने के बाद पुलिस टीम ने जमा किए दस्तावेज

अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। चौरीचौरा थाना क्षेत्र के शिवपुर चकदहा गांव में मां-बेटी की हत्या के मामले में लाई डिटेक्टर टेस्ट (पॉलीग्राफ टेस्ट) के लिए मंगलवार को टीम गाजियाबाद पहुंच गई। वहां पर टीम ने सभी जरूरी दस्तावेज जमा किए। अब बुधवार से एक-एक कर आरोपियों और वादी खुशबू का टेस्ट होगा।
मामले में तीन आरोपियों संजय उर्फ शैलेंद्र, उसके पिता कोटेदार सूरज और भाई सुरेंद्र और वादी खुशबू का लाई डिटेक्टर टेस्ट होना है। इसके लिए मंगलवार को टीम सीओ कैंपियरगंज अनुराग सिंह के नेतृत्व में गाजियाबाद पहुंच गई। इस टेस्ट के बाद हत्याकांड की गुत्थी सुलझ सकती है। वादी खुशबू, मृतक पूनम की बड़ी बेटी है।
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29 मार्च 2025 की देर रात 1:30 बजे शिवपुर चकदहा गांव में पूनम और उसकी छोटी बेटी अनुष्का की गड़ासे से काटकर निर्मम हत्या कर दी गई थी। घटना के वक्त दोनों मां-बेटी घर के बरामदे में सो रही थीं। वहीं घर में मौजूद बड़ी बेटी खुशबू को हमलावरों ने दूसरे कमरे में बंद कर दिया था। सूचना पर पहुंची चौरीचौरा पुलिस ने मौके से साक्ष्य जुटाए थे। जांच में सामने आया कि हत्या के बाद आरोपी, पूनम का एंड्रॉयड मोबाइल फोन अपने साथ ले गए थे। खुशबू ने पुलिस को बताया था कि उसने कमरे के दरवाजे के छेद से हमलावरों को देखा था। उसकी तहरीर पर पुलिस ने गांव के ही संजय उर्फ शैलेंद्र, उसके पिता कोटेदार सूरज और भाई सुरेंद्र व दो अज्ञात आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। पुलिस ने एक नामजद आरोपी संजय को गिरफ्तार कर जेल भिजवाया था, जो अब जमानत पर है। पुलिस को आशंका है कि हत्याकांड में अन्य लोग भी शामिल थे। जांच के दौरान 100 से अधिक लोगों से पूछताछ की गई और करीब 50 संदिग्धों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) खंगाले गए। कई लोगों को हिरासत में लेकर सख्ती से पूछताछ भी की गई, लेकिन ठोस साक्ष्य के अभाव में उन्हें छोड़ना पड़ा। इसी क्रम में पुलिस को चार लोगों की भूमिका संदिग्ध लगी। उनसे पूछताछ के बावजूद जब कोई ठोस सुराग नहीं मिला तो विवेचक ने पॉलीग्राफ टेस्ट कराने का निर्णय लिया।
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