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Gorakhpur News: छात्र ने छह माह पहले ही तैयार की थी एपीके फाइल
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गोरखपुर। लाइफ सर्टिफिकेट बनवाने का झांसा देकर दिल्ली के सेवानिवृत्त कर्मचारी के खाते से 17 लाख रुपये की ठगी के मामले में गिरफ्तार 12वीं के छात्र करन कुमार ने करीब छह माह पहले ही कथित तौर पर एपीके फाइल तैयार की थी। उसके लैपटॉप और मोबाइल की जांच में मिले डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर दिल्ली साइबर सेल ठगी के नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।
जांच में ‘जिनोशेल डॉट कॉम’ नाम की एपीके फाइल और ‘डिजिटल लुटेरा’ सॉफ्टवेयर की भूमिका भी खंगाली जा रही है। दिल्ली साइबर सेल के एसआई गौरव कुमार के मुताबिक, पीड़ित को लाइफ सर्टिफिकेट बनवाने के नाम पर एपीके फाइल डाउनलोड कराई गई थी।
इसके बाद उनके खाते से 17 लाख रुपये निकल गए। जांच में फाइल तैयार करने का संबंध संतकबीरनगर जिले के धनघटा क्षेत्र के पतीजीव निवासी करन से सामने आया। वह गोरखपुर के रामगढ़ताल क्षेत्र स्थित साकेतनगर में अपनी मां और बहन के साथ रह रहा था। दिल्ली पुलिस ने स्थानीय पुलिस की मदद से उसे गिरफ्तार कर ट्रांजिट रिमांड पर दिल्ली ले गई थी।
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पुलिस करन के लैपटॉप में मौजूद कोड, एपीके फाइलों और मोबाइल में मिले डिजिटल संपर्कों की जांच कर रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि उसने अब तक कितनी फाइलें तैयार कीं, उन्हें किन लोगों को भेजा और ठगी की रकम किन खातों में पहुंची। साथ ही, छह माह पहले तैयार फाइल का इस्तेमाल कब और किस तरह किया गया, इसकी भी पड़ताल की जा रही है।
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जांच में ‘जिनोशेल डॉट कॉम’ नाम की एपीके फाइल और ‘डिजिटल लुटेरा’ सॉफ्टवेयर की भूमिका भी खंगाली जा रही है। दिल्ली साइबर सेल के एसआई गौरव कुमार के मुताबिक, पीड़ित को लाइफ सर्टिफिकेट बनवाने के नाम पर एपीके फाइल डाउनलोड कराई गई थी।
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इसके बाद उनके खाते से 17 लाख रुपये निकल गए। जांच में फाइल तैयार करने का संबंध संतकबीरनगर जिले के धनघटा क्षेत्र के पतीजीव निवासी करन से सामने आया। वह गोरखपुर के रामगढ़ताल क्षेत्र स्थित साकेतनगर में अपनी मां और बहन के साथ रह रहा था। दिल्ली पुलिस ने स्थानीय पुलिस की मदद से उसे गिरफ्तार कर ट्रांजिट रिमांड पर दिल्ली ले गई थी।
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पुलिस करन के लैपटॉप में मौजूद कोड, एपीके फाइलों और मोबाइल में मिले डिजिटल संपर्कों की जांच कर रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि उसने अब तक कितनी फाइलें तैयार कीं, उन्हें किन लोगों को भेजा और ठगी की रकम किन खातों में पहुंची। साथ ही, छह माह पहले तैयार फाइल का इस्तेमाल कब और किस तरह किया गया, इसकी भी पड़ताल की जा रही है।