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कहीं आपके साथ धोखा न हो जाए: गोरखपुर में रजिस्ट्री विभाग का खेल!, इन 3 वर्षों के बैनामों में हो सकता है 'खेल'

Thu, 14 Aug 2025 11:22 AM IST
रोहित सिंह राजन राय, गोरखपुर
राजन राय, गोरखपुर Published by: रोहित सिंह Updated Thu, 14 Aug 2025 11:22 AM IST
सार

डिजिटाइजेशन के दूसरे चरण में वर्ष 90 से 2001 के बीच दस्तावेजों को स्कैन किया जाएगा। इस दौरान ज्यादा गड़बड़ी मिलने की आशंका है। जानकारों की मानें तो सदर क्षेत्र के दस्तावेज कम खराब मिलेंगे लेकिन तहसीलों पर दस्तावेजों को बांधकर रिकाॅर्ड रूम में रख दिया जाता है। लंबे समय बाद जब दस्तावेज निकाले जाएंगे तो सही और स्पष्ट मिलने की संभावना कम है।

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Termites ate away more than 400 registry and inheritance documents in Gorakhpur registry department
पुराने कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित रजिस्ट्री ऑफिस - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

अगर आपकी जमीन का बैनामा वर्ष 2002 से 2005 के बीच का है तो सतर्क हो जाएं। इस अवधि में हुई करीब 400 से ज्यादा रजिस्ट्री के दस्तावेज दीमक चट कर गई हैं। इसका खुलासा दस्तावेजों के डिजिटाइजेशन के लिए स्कैन करते समय हुआ है। ऐसे में फर्जी दस्तावेज तैयार कर जमीन की दोबारा रजिस्ट्री भी कराई जा सकती है। फिलहाल, निबंधन विभाग के अधिकारियों ने नष्ट हुए दस्तावेजों की रिपोर्ट प्रदेश मुख्यालय को भेज दी है।

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जमीनों का सारा रिकॉर्ड ऑनलाइन उपलब्ध कराने के लिए पूरे प्रदेश में डिजिटाइजेशन का काम चल रहा है। पहले चरण में वर्ष 2002 से 2015 के बीच 15 साल में रजिस्ट्री, वरासत, गिफ्ट, पॉवर ऑफ अटार्नी और बंटवारा डीड को स्कैन किया गया। इस दौरान पता चला कि वर्ष 2002 से 2005 के बीच 400 से ज्यादा दस्तावेज दीमक खा गईं। फाइलें तो हैं पर दस्तावेज सड़े-गले हाल में हैं।

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इन दस्तावेजों में सबसे ज्यादा सदर क्षेत्र में करीब 150 हैं, जबकि सभी तहसीलों में 40 से 50 दस्तावेज नष्ट मिले हैं।बताया जा रहा है कि रखरखाव न होने के चलते ऐसा हुआ है। सीलन होने के चलते फाइलों में दीमक लग गई। विभागीय लोगों का कहना है कि पुराने दस्तावेजों की कभी जरूरत पड़ी नहीं इसलिए इन फाइलाें को किसी ने देखा ही नहीं।

दस्तावेज इतना अस्पष्ट हैं कि उसे स्कैन नहीं किया जा सकता है। बहरहाल, ऐसे दस्तावेजों को अब छांटकर अलग रख दिया गया है।
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वर्ष 90 से 2001 के रिकॉर्ड में और गड़बड़ी की आशंका
डिजिटाइजेशन के दूसरे चरण में वर्ष 90 से 2001 के बीच दस्तावेजों को स्कैन किया जाएगा। इस दौरान ज्यादा गड़बड़ी मिलने की आशंका है। जानकारों की मानें तो सदर क्षेत्र के दस्तावेज कम खराब मिलेंगे लेकिन तहसीलों पर दस्तावेजों को बांधकर रिकाॅर्ड रूम में रख दिया जाता है। लंबे समय बाद जब दस्तावेज निकाले जाएंगे तो सही और स्पष्ट मिलने की संभावना कम है।
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जमीन के दस्तावेजों का सारा रिकॉर्ड ऑनलाइन करने के लिए डिजिटाइजेशन का काम चल रहा है। कुछ दस्तावेज अस्पष्ट और नष्ट हो गए हैं। इसकी जानकारी प्रदेश को मुख्यालय को दे दी गई है:संजय कुमार दुबे, एआईजी स्टांप

दस्तावेजों को स्कैन कराकर चल रही ऑनलाइन करने की प्रक्रिया
रजिस्ट्री विभाग में पंजीकृत सभी प्रकार के दस्तावेजों को डिजिटाइजेशन किए जाने के बाद जमीन के दस्तावेजों का सारा रिकॉर्ड ऑनलाइन देखा जा सकेगा। रजिस्ट्री, वरासत, गिफ्ट, पॉवर ऑफ अटार्नी, बंटवारा डीड सब कुछ ऑनलाइन मौजूद रहेगा और दस्तावेजों को nic.gov.in पर देखा जा सकेगा।

इसी मकसद से दस्तावेजों को स्कैन कराकर ऑनलाइन करने की प्रक्रिया चल रही है। इससे लोगों को अनावश्यक रूप से भागदौड़ नहीं करनी पड़ेगी।
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