Gorakhpur News: सूदखोरी के चक्रव्यूह में फंस किसी ने खत्म की जिंदगी तो कोई गया जेल
सूदखोरों ने मनीष का ऐसा मानसिक उत्पीड़न किया कि वह घरवालों से झूठ बोलकर कहीं चला गया। अपहरण की कहानी रची और रुपये की अदायगी के लिए घरवालों से फिरौती मांग ली। चूंकि यह कानून की नजर में अपराध है, इस वजह से मनीष जेल चला गया, लेकिन सूदखोरों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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गोरखपुर जिले में सूदखोरों की प्रताड़ना का आतंक ऐसा है कि कोई हत्यारा बनकर खुद की जिंदगी खत्म कर ले रहा है, तो कोई परिवार वालों की नजरों में गिरकर जेल जा रहा है। वहीं, इस हालात के पीछे के असल जिम्मेदार सूदखोर पुलिस के शिकंजे से दूर हैं। हाल के दिनों में गोला और झंगहा में सूदखोरों की प्रताड़ना की दो घटनाएं सामने आई हैं। पुलिस एक भी मामले में कार्रवाई नहीं कर पाई है।
ऐसा नहीं है कि सूदखोरों का आतंक कोई नया है। यह सब लंबे समय से रहा है, लेकिन पुलिस कुछ कर नहीं पाती है। घटना होने के बाद चंद दिन इस पर बहस होती है तो पुलिस कार्रवाई की दलील देकर पीछा छुड़ा लेती है। असल में सूदखोरी पर अंकुश कब लगेगा, यह बताने वाला कोई नहीं है।
बृहस्पतिवार को जेल गए मनीष ने बताया कि उसने इलाके के दो लोगों से एक लाख 40 हजार रुपये सूद पर लिया था। 15 प्रतिशत मासिक ब्याज की वजह से सूद की रकम बढ़कर तीन लाख हो गई है। पूर्व में दी गई किस्त भी इसमें समा गई है।
सूदखोरों ने मनीष का ऐसा मानसिक उत्पीड़न किया कि वह घरवालों से झूठ बोलकर कहीं चला गया। अपहरण की कहानी रची और रुपये की अदायगी के लिए घरवालों से फिरौती मांग ली। चूंकि यह कानून की नजर में अपराध है, इस वजह से मनीष जेल चला गया, लेकिन सूदखोरों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
केस एक
देवकली गांव में बीते शनिवार को इंद्र बहादुर मौर्या ने अपने दो बच्चों और पत्नी की सोते समय गला रेतकर हत्या कर दी। इसके बाद खुद को आग लगाकर आत्महत्या कर ली। पुलिस ने केस दर्ज कर इंद्र बहादुर को कानून के रिकॉर्ड में हत्या का आरोपी बना दिया। अब भतीजे ने सूदखोरों पर सवाल उठाया है। पुलिस को तहरीर भी दी है। कुछ नाम भी बताए हैं, मगर पुलिस ने अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की है।
केस दो
झंगहा के मनीष मद्देशिया को बृहस्पतिवार को पुलिस ने फिरौती मांगने का आरोपी बनाकर जेल भिजवा दिया। मनीष की गलती थी, जेल चला गया। मगर, जिन सूदखोरों ने उसे इस परिस्थिति के लिए मजबूर किया, वह बेदाग होकर घूम रहे हैं। उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है। जबकि, असल जिम्मेदार तो वही हैं। जिनकी मानसिक प्रताड़ना की वजह से मनीष को घर छोड़ना पड़ा और जेल जाना पड़ा है।