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प्राकृतिक संपदा से भरा है वाल्मीकि नगर टाइगर रिजर्व, ऐसे करता है पर्यटकों को आकर्षित

Mon, 04 Jan 2021 05:02 PM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी, महराजगंज।
संवाद न्यूज एजेंसी, महराजगंज। Published by: vivek shukla Updated Mon, 04 Jan 2021 05:02 PM IST
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Story of Valmiki Nagar Tiger Reserve maharajganj
वाल्मीकि नगर टाइगर रिजर्व। - फोटो : अमर उजाला।

यूपी और बिहार बार्डर के सोहगीबरवा वन्य जीव प्रभाग के शिवपुर यूनिट के सीमावर्ती वाल्मीकि टाइगर रिजर्व की खूबसूरत वादियां पर्यटकों के लिए किसी जन्नत से कम नहीं हैं। कड़ाके की ठंड ने इसकी खूबसूरती में चार चांद लगा दिए हैं। ठहरने की उत्तम व्यवस्था और यहां का नजारा देख पर्यटक खुश हो रहे हैं।

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वाल्मीकि नगर रेंजर महेश प्रसाद ने बताया कि वाल्मीकि टाइगर रिजर्व बिहार का एकलौता एवं भारत के प्रसिद्ध उद्यानों में से एक है। महराजगंज से लगभग 100 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह सुंदर एवं रमणीक स्थल है। 880 वर्ग किलोमीटर जंगल का 530 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र व्याघ्र परियोजना के लिए आरक्षित है। इसकी सीमा पर ढाई सौ गांव एवं इसके मध्य 26 गांव बसे हैं।
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वाल्मीकि व्याघ्र परियोजना का हरा-भरा जंगल विभिन्न प्रजाति के पेड़-पौधे एवं वन जीवों से भरा पड़ा है। नेपाल एवं यूपी की सीमा पर अवस्थित यह टाइगर रिजर्व प्राकृतिक सौंदर्य के लिए जाना जाता है। दिन के उजाले में गंडक नदी के शांत पानी में पहाड़ का प्रतिबिंब बहुत ही मनोहारी एवं आकर्षक लगता है।
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मेहमान परिदों की क्रीडा देखते ही बनती
वाल्मीकि नगर से पूरब पर्वत श्रृंखला में जंगल एवं शांत नदी का किनारा पिकनिक स्पॉट एवं शूटिंग स्थल के लिए सर्वोत्तम है। सर्दी के मौसम में यहां से हिमालय पर्वत श्रृंखला का दीदार कश्मीर की हसीन वादियों की याद ताजा कर जाती है। गंडक नदी में विदेशी मेहमान परिदों की क्रीडा देखते ही बनती है। नेपाल की ऊंची पहाड़ी पर्यटकों का ध्यान अपनी ओर खींचने के लिए पर्याप्त है।

 

जंगल में बाघ, तेंदुआ दिखते हैं

वाल्मीकि व्याघ्र परियोजना के जंगल में बाघ, तेंदुआ, बंदर, लंगूर ,हिरण, सांभर, भालू, गौर, जंगली कुत्ता, घड़ियाल, मगरमच्छ ,नीलगाय, मोर, पहाड़ी बुलबुल ,पहाड़ी तोता सहित दर्जनों दुर्लभ प्रजाति के जीव यहां देखने को मिल जाएंगे।

पर्यटकों को हो रहा बाघों का दीदार
जंगल सफारी के क्रम में पर्यटकों को बाघों का दीदार रोमांच एवं कौतूहल पैदा करता है। हालांकि बगहा वाल्मीकि नगर मुख्य पथ पर सड़क के बीचों-बीच अक्सर बाघ दिख जाता है। गनौली, हरनाटांड, मदनपुर आदि के जंगलों में झरना नदियां दलदल आदि प्राकृतिक जैव विविधता का एहसास अपने आप में अनूठा है।

ले सकते हैं ट्री हट का मजा
ट्री हट के माध्यम से कम खर्च पर पर्यटक प्रकृति को करीब से देख व महसूस कर सकते र्है। वाल्मीकि व्याघ्र परियोजना के जंगल घूमने के लिए विभाग की ओर से वाहन एवं गाइड उपलब्ध कराए जाते हैं, जो जंगल सफारी के आनंद को दोगुना देते हैं। गंडक नदी के जलाशय में नौका विहार का अलग ही मजा है। गंडक के शांत पानी को चीरते हुए जब मोटर बोट आगे बढ़ती है तो रोमांच अपने चरम पर होता है।

गंडक नदी में मिलते हैं जीवित शालिग्राम
आचार्य दिवाकर मणि ने बताया कि गंडक नदी के तट पर बालू में शालिग्राम मिलता है। शास्त्रों के मुताबिक भारत में दो संगम हैं। इनमें पहला प्रयागराज तथा दूसरा वाल्मीकिनगर। वाल्मीकि रामायण में वर्णित सोनभद्र, ताम्र भद्र एवं नारायणी के पवित्र मिलन को त्रिवेणी संगम कहा गया है।

यहां ठहरने का इंतजाम
गंडक नदी के तट पर जंगलों के बीच बने होटल वाल्मीकि बिहार, जंगल कैंप परिसर में बने बंबू हट, फोर फ्लैट के अलावा वाल्मीकि नगर, गनोली, नौरंगिया, गोवर्धना, मदनपुर, दोन,मंगुराहा आदि जगहों पर वन विभाग के रेस्ट हाउस उपलब्ध हैं। वाल्मीकि व्याघ्र परियोजना का दीदार करने के लिए सड़क एवं रेल मार्ग दोनों से पहुंचा जा सकता है। पर्यटक चाहे तो निजी वाहन से भी आ सकते हैं।

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