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कोरोना काल में घर की डॉक्टर बन गई हैं महिलाएं, जानिए कैसे कर रही हैं चुनौतियों का मुकाबला

Wed, 30 Sep 2020 09:24 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Wed, 30 Sep 2020 09:24 AM IST
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Story of hardworking women organized webinar under unique campaign Aparajita Amar Ujala Foundation
अमर उजाला फाउंडेशन की अनूठी मुहिम अपराजिता के तहत आयोजित वेबिनार में महिलाओं ने रखे विचार - फोटो : अमर उजाला।

कोरोना काल में देखा जाए तो महिलाएं एक तरह से घर की डॉक्टर बन गई हैं। वह सर्दी-जुकाम पर काढ़ा दे रही हैं। भाप लेने की सलाह के साथ ही पौष्टिक आहार देकर इम्युनिटी मजबूत करने का काम कर रही हैं। उनका कहना है कि कोरोना पर विजय पाने का हथियार मास्क और दो गज की दूरी ही है।

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महिलाओं का मानना है कि कोरोना की चुनौतियों को हमें सकारात्मक रूप से लेना होगा, यही हमें मजबूत बनाएगा। अमर उजाला फाउंडेशन की अनूठी मुहिम अपराजिता के तहत ‘कोरोना काल में महिलाओं के समक्ष चुनौतियां एवं समाधान’ विषय पर आयोजित वेबिनार में मंगलवार को अपने-अपने क्षेत्र की प्रतिष्ठित महिलाओं ने काफी बेबाकी से राय रखी। आप भी पढ़ें-
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राजकीय जुबिली इंटर कॉलेज की शिक्षिका नेहा श्रीवास्तव ने बताया कि कोरोना काल में महिलाओं के सामने चुनौती बहुत है। कामकाजी महिलाओं को दफ्तर व स्कूल के कामकाज के साथ ही घर का भी ख्याल रखना है। सभी लोगों के घर पर रहने से काम भी बढ़ गया है। काम करने वाली महिला (मेड) भी नहीं आ रही है। इन चुनौतियों के बीच खुद को सुरक्षित भी रखना है। सतर्कता और संयम से इस चुनौती का मुकाबला संभव है।

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अल्पाइन फाउंडेशन की निदेशक अमृता राव ने बताया कि कोरोना के चलते बहुत लोगों की नौकरी छूट गई है। ऐसे में लोग घरों में ही हैं। बच्चों की पढ़ाई से लेकर दवा व घर खर्च एक बड़ी चुनौती महिलाओं के सामने आ गई है। तमाम महिलाएं तनावग्रस्त हो रही हैं। उन्हें बहुत सोचने की जरूरत नहीं है। मानसिक स्तर पर खुद को मजबूत करना होगा। तभी खुद और परिवार के लोग खुश रह पाएंगे।
 
अन्नपूर्णा चाइल्ड एंड मेटर्निटी सेंटर की डॉ. मीनाक्षी गुप्ता ने बताया कि गर्भवती महिलाएं कोरोना को हल्के में न लें। सर्दी खांसी होने पर जांच नहीं कराना घातक हो सकता। घर में रहते हुए महिलाएं मानसिक स्तर पर कमजोर हो रही हैं। इससे गर्भ में पल रहे बच्चे की ग्रोथ पर प्रभाव पड़ेगा। ऐसी महिलाएं घर के किसी काम में मन लगाएं। किताबें पढ़ें, सजावट करें और खुद को खुश रखें।
 
गोविवि के संस्कृत विभाग की असिसटेंट प्रोफेसर डॉ. लक्ष्मी मिश्रा ने बताया कि परिवार के लोग घर पर ही हैं तो किचन का काम बढ़ गया। कोरोना के चलते सफाई ज्यादा हो रही है। गेट और फाटक को सैनिटाइज करना, बाहर से आने पर लोगों के कपड़े को अच्छी तरह धुलकर विसंक्रमित करना, फल-सब्जी को विसंक्रमित करने की जिम्मेदारी भी आ गई है। सच कहूं तो महिलाएं घर की डॉक्टर की भूमिका में हैं। ऐसे में परिवार के लोगों को भी सकारात्मक सहयोग की जरूरत है।

एडिटर इनरव्हील क्लब की नेहा अग्रवाल ने बताया कि घर के कामकाज के साथ कारोबार भी संभालना पड़ रहा है। निश्चित रूप से चुनौती बढ़ी है। घर में काम करने वाली महिलाएं हाथ बंटा देती थीं, लेकिन कोराना कॉल में उन्हें भी आने नहीं दिया जा रहा है तो सारा काम खुद करना पड़ रहा है। इन चुनौतियों का सामना महिलाएं बहुत अच्छी तरह से कर रही हैं।

सामाजिक कार्यकर्ता चेतना पांडेय ने बताया कि कोरोना काल में महिलाओं के लिए कामकाज दोगुना हो गया है। इसका असर उनके मानसिक स्तर पर पड़ा है। उनके भीतर तनाव तो नहीं है, लेकिन मानसिक स्तर पर कमजोर हुई हैं। कुछ महिलाओं की काउंसिलिंग की है। महिलाएं धर्म-कर्म और मेडिटेशन की तरफ ध्यान दें तो धैर्य बढ़ने के साथ मानसिक मजबूती आएगी।
 
बीटेक छात्रा अदिति मिश्रा ने बताया कि परिस्थितियां ही इंसान को मजबूत बनाती हैं। कोरोना के समय में महिलाएं चुनौती का सामना बखूबी कर रही हैं। इससे वे भविष्य में किसी भी समस्या का सामना करने के लिए मानसिक रूप से मजबूत रहेंगी। महिलाओं को इस चुनौती को सकारात्मक रूप में लेने की जरूरत है। मुझे लगता है कि यही हर समस्या का समाधान भी है।

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