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इस शख्स ने मुश्किल समय में 360 बेरोजगारों को दिखाई राह, सफलता मिली तो बढ़ गया उत्साह

Wed, 23 Sep 2020 03:18 PM IST
vivek shukla राजीव रंजन, गोरखपुर।
राजीव रंजन, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Wed, 23 Sep 2020 03:18 PM IST
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special story of VS energy director Vivek trained 360 people for self employment jobs
विवेक ने लॉकडाउन में बेरोजगार हुए 360 लोगों को दिया एलईडी बल्ब बनाने का प्रशिक्षण। - फोटो : अमर उजाला।

कोरोना संकट के बीच विवेक सिंह ने 360 लोगों को स्वरोजगार की राह दिखाई है। विवेक ने पहले सबको निशुल्क प्रशिक्षण दिया, फिर रोजगार के काबिल बनाया। प्रशिक्षण पाने वाले अब 15 हजार रुपये माह तक कमा रहे हैं। कुछ ने स्वरोजगार भी किया है। वे फैक्ट्री और दुकानें खोलकर अपनी आजीविका चला रहे हैं।

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कोरोना महामारी की वजह से जब लोगों का रोजगार छिनने लगा तो इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल करने वाले विवेक सिंह ने स्वरोजगार की राह दिखानी शुरू कर दी। गाजियाबाद से बीटेक की डिग्री हासिल करने के बाद विवेक सिंह ने बहुराष्ट्रीय कंपनी में नौकरी की फिर स्वरोजगार का फैसला किया।
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विवेक ने वीएस एनर्जी नाम से अपनी कंपनी बनाई और एलईडी बल्ब, लाइट, ट्यूबलाइट आदि बनाने लगे। इसमें सफलता मिली तो विवेक का उत्साह बढ़ा। इसी का नतीजा था कि विवेक ने 360 लोगों को चिह्नित किया, फिर गीडा में एलईडी लाइट, बल्ब, ट्यूबलाइट बनाने का प्रशिक्षण देना शुरू कर दिया। यह मुहिम अब रंग ला रही है। जो बेरोजगार थे, वे अब स्वरोजगार कर रहे हैं।
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विवेक बहुत ही सरल तरीके से एलईडी बल्ब, एलईडी लड़ियां, एलईडी ट्यूबलाइट, एलईडी डिजाइनर लाइटें आदि बनाना सिखाते हैं। पांच दिन के प्रशिक्षण के दौरान ही पांच अलग-अलग तरह की लाइटें बनाने का प्रशिक्षण देते हैं। प्रशिक्षुओं को कच्चा माल भी वे ही उपलब्ध कराते हैं। इसे बाजार में बेचकर वे अच्छा मुनाफा कमा लेते हैं।

150 लोगों ने शुरू किया खुद का रोजगार

एलईडी के विभिन्न उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण पाकर इनमें से 150 लोगों ने खुद ही अपना काम करना शुरू कर दिया। इन लोगों ने अपनी दुकान खोल ली और फिर रॉ मैटेरियल लाकर विभिन्न उत्पाद तैयार करते हैं और उन्हें अपनी दुकान पर बेचते हैं। 50 लोगों ने तो खुद अपने नाम से उत्पाद बनाना शुरू कर दिया है।

वीएस एनर्जी के एमडी विवेक सिंह ने बताया कि पांच दिन के प्रशिक्षण में एलईडी के विभिन्न उत्पाद बनाने में दक्षता हासिल हो जाती है। अनलॉक-1 शुरू होने के बाद गोरखपुर में एलईडी बनाने का प्रशिक्षण शिविर शुरू किया था। अब तक 360 लोगों को प्रशिक्षित कर चुका हूं। इनमें से कई ने तो अपनी दुकान खोल ली और घर में उत्पाद तैयार कर बिक्री भी करते हैं। कई प्रशिक्षित रॉ मैटेरियल लेकर उत्पाद तैयार करते हैं, फिर मुझे वापस कर देते हैं। इन लोगों की औसतन रोजाना 400 से 500 रुपये की कमाई हो जाती है।

देवरिया के गढ़रामपुर गांव के जितेंद्र सिंह ने बताया कि एलईडी के उत्पाद बनाने के प्रशिक्षण के संबंध में अमर उजाला से जानकारी मिली थी। प्रशिक्षण के बाद पहले अपनी दुकान खोल ली। रॉ मैटेरियल लाकर घर पर ही विभिन्न उत्पाद तैयार कर लेते हैं। कोरोना संकट के दौरान यह प्रशिक्षण बहुत ही फायदेमंद साबित हुआ है।

बस्ती के फलाने गांव के बाल गोविंद सिंह ने बताया कि हम चार दोस्त हैं, जो बीएड के साथ टीईटी क्वालीफाइड हैं। लॉकडाउन से पहले बच्चों को ट्यूूशन पढ़ाते थे। लॉकडाउन में सब बंद हो गया और आमदनी का स्रोत पूरी तरह से बंद था। ऐसे में एलईडी उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण लिया। अब रॉ मैटेरियल लाकर माल तैयार करते हैं और बाजार में बेच देते हैं। जीवन यापन लायक कमाई हो जाती है।

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