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यहां यात्रियों को तांगा से घर तक पहुंचाती थी रेलवे, नैनीताल से काठगोदाम तक थी यह खास सुविधा
Thu, 11 Jun 2020 03:46 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Thu, 11 Jun 2020 03:46 PM IST
सार
- बीच रास्ते मे आराम की थी सुविधा और ट्रेन के किराए में ही लिया जाता था शुल्क
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यात्रियों को तांगा गाड़ी से पहुंचाया जाता था घर।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
सवा सौ साल पहले पहाड़ों की ओर ट्रेन से जाने पर यात्रियों को स्टेशन से घर तक तांगा गाड़ी से पहुंचाने की व्यवस्था थी। पूर्वोत्तर रेलवे के काठगोदाम से नैनीताल तक जाने के लिए तांगा चलता था। इसका किराया यात्रियों से टिकट में जोड़ लिया जाता था।
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खास बात यह थी कि रास्ते में आराम गृह होते थे जहां यात्री और घोड़े आराम करते थे। घोड़ों के लिए चना और चारा उपलब्ध होता था। रेलवे के दस्तवेजों में इसका जिक्र है।
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यह इंतजाम पूर्वोत्तर रेलवे के गठन के पहले रोहिलखण्ड कुमायूं रेलवे कंपनी ने किया था, तब इसी कंपनी के पास ट्रेन संचालन का अधिकार था। जब इससे घाटा होने लगा तो 1985 में पूर्वोत्तर रेलवे प्रशासन ने ढाई रुपये से साढ़े तीन रुपये तक भाड़ा बढ़ा दिया।
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आकंड़ों के मुताबिक 1985 में जुलाई से लेकर जून 1986 तक रेलवे को घाटा हुआ लेकिन जुलाई 86 के बाद आय और खर्च बराबर हो गया।