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Exclusive: पेट्रोलियम, एलपीजी और कंप्रेस्ड बायोगैस उत्पादन-वितरण का हब बनेगा गोरखपुर, पढ़िए खास रिपोर्ट

Sat, 24 Oct 2020 09:59 AM IST
vivek shukla संतोष सिंह, गोरखपुर।
संतोष सिंह, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sat, 24 Oct 2020 09:59 AM IST
सार

  • यूपी में 2500 करोड़ का निवेश कर रही पेट्रोलियम कंपनी, गोरखपुर व देवरिया में 1550 करोड़ का निवेश
  • धुरियापार कंप्रेस्ड बायोगैस और एथेनॉल प्लांट साल 2022 से पहले शुरू होगा
  • देवरिया के बैतालपुर डिपो को 300 करोड़ की लागत से बनाया जा रहा टर्मिनल
  • मिर्जापुर जिले में भी 800 करोड़ रुपये की लागत से नया टर्मिनल बनाया जाएगा
  • गोरखपुर के एलपीजी बाटलिंग प्लांट से बिहार व मध्य प्रदेश भेजी जाएगी सप्लाई

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Special conversation with IOCL Executive Director and Head of State Dr. Uttiya Bhattacharya
आईओसीएल के कार्यकारी निदेशक व राज्य प्रमुख डॉ. उत्तीय भट्टाचार्य से विशेष बातचीत। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

अब गोरखपुर पेट्रोलियम, लिक्विड पेट्रोलियम गैस (एलपीजी), कंप्रेस्ड बायो गैस व एथेनॉल उत्पादन के साथ वितरण का हब बनेगा। इसका खाका इंडियन ऑयल कारपोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) ने तैयार कर लिया है। गोरखपुर के एलपीजी बॉटलिंग प्लांट से ही बिहार और मध्य प्रदेश को सप्लाई दी जाएगी। यूपी के अलग-अलग जिलों में पेट्रोलियम कंपनी ने 2500 करोड़ रुपये निवेश करने का फैसला किया है। इसमें से 1550 करोड़ रुपये का निवेश गोरखपुर और देवरिया जिलों में किया जा रहा है। यूपी में निवेश, पेट्रोलियम व एलपीजी की वितरण की व्यवस्था को और बेहतर बनाने के संबंध में आईओसीएल के कार्यकारी निदेशक व राज्य प्रमुख डॉ. उत्तीय भट्टाचार्य ने शुक्रवार को अमर उजाला को विस्तार से जानकारी दी। वह एक कार्यक्रम के सिलसिले में गोरखपुर आए थे। पेश है बातचीत के प्रमुख अंश-

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सवाल- धुरियापार का कंप्रेस्ड बायोगैस व एथेनॉल प्लांट कब तक बन जाएगा?
जवाब- देखिए, यह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का ड्रीम प्रोजेक्ट है। एक हजार करोड़ रुपये का निवेश किया गया है। कंप्रेस्ड बायोगैस प्लांट साल 2021 तक बनकर तैयार हो जाएगा। इस प्लांट में कूड़े से बायोगैस बनाई जाएगी। इसका इस्तेमाल सीएनजी के वाहनों में आराम से किया जा सकेगा। गोरखपुर के सभी पेट्रोल पंपों पर कंप्रेस्ड बायोगैस उपलब्ध कराई जाएगी। ज्यादा से ज्यादा बायोगैस बनाने का लक्ष्य रखा गया है। एथेनॉल प्लांट भी साल 2022 से पहले शुरू हो जाएगा। यह प्लांट आधुनिक होगा। खाने में इस्तेमाल से जो तेल बचेगा, उसी से एथेनॉल व बायो डीजल बनाया जाएगा। केंद्र सरकार ने पेट्रोल में 10 फीसदी तक एथेनॉल और डीजल में पांच फीसदी तक बायो डीजल मिलाकर बेचने की अनुमति दी है। एक शोध के मुताबिक देश में प्रति वर्ष खाने में इस्तेमाल के बाद तेल बचता है।

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Special conversation with IOCL Executive Director and Head of State Dr. Uttiya Bhattacharya
डॉ. उत्तीय भट्टाचार्य। - फोटो : अमर उजाला।
सवाल- देवरिया के बैलापुर डिपो के आधुनिकीकरण की कवायद की जा रही थी, क्या हुआ?
जवाब- बैतालपुर डिपो को अब टर्मिनल बनाया जा रहा है। इस पर 300 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। बैतालपुर डिपो में अभी तक रेलवे के वैगन से पेट्रोल, डीजल पहुंचाया जाता था। आगे से ऐसा नहीं होगा। कानपुर से आने वाली पाइपलाइन से इस डिपो को जोड़ दिया जाएगा।

सवाल: सहजनवां एलपीजी बॉटलिंग प्लांट के विस्तार की कोई योजना है क्या?
जवाब: यह देश का सबसे आधुनिकतम बॉटलिंग प्लांट हैं। 48 कैरोजल के दो प्लांट काम कर रहे हैं। एक शिफ्ट में काम चल रहा है, फिर भी प्रतिमाह सात लाख एलपीजी गैस सिलिंडर भरा जाता है। तीन शिफ्ट में काम शुरू करेंगे तो प्रतिमाह 21 लाख गैस सिलिंडर तैयार होगा। अब गोरखपुर पेट्रोलियम व एलपीजी उत्पादन के साथ वितरण का हब बन रहा है। जो गैस सिलिंडर पहले कानपुर से आते थे, वह बंद हो गए हैं। अब गोरखपुर से ही आसपास के 12 जिलों में गैस सिलिंडर भेजे जा रहे हैं। सहजनवां प्लांट से ही बिहार और मध्य प्रदेश में भी गैस सिलिंडर भेजे जाएंगे। कांडला से एलपीजी लाइन गोरखपुर आकर टर्मिनेट होगी। इसी तरह बरौनी, मोतिहारी होकर गोरखपुर तक एलपीजी लाइन आ रही है।
 
सवाल: यूपी में कोई और खास परियोजना लेकर आ रहे हैं क्या?
जवाब: हां, है न। मिर्जापुर में नया टर्मिनल बना रहे हैं। इस पर 800 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसका शिलान्यास जल्द ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान कर सकते हैं।

Special conversation with IOCL Executive Director and Head of State Dr. Uttiya Bhattacharya
डॉ. उत्तीय भट्टाचार्य। - फोटो : अमर उजाला।

सवाल: रोजगार बढ़े, इसके लिए कंपनी क्या कर रही है?
जवाब: आप कल्पना करिए। 2500 करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है। प्रत्यक्ष रूप से रोजगार की संभावना तो बढ़ेगी ही। अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार में जबरदस्त इजाफा होगा। इसका फायदा स्थानीय लोगों को ही मिलता है। देवरिया के बैतालपुर डिपो में 320 कर्मचारी काम कर रहे हैं। 200 से ज्यादा स्थानीय कर्मचारी हैं, जो कि स्किल्ड हैं। यूपी में अलग-अलग कंपनियों के 8700 पेट्रोल पंप हैं। इसमें से अकेले आईओसीएल के 4200 पेट्रोल पंप हैं। सब जगह अलग-अलग शिफ्ट में काम करते हैं। 32 हजार से ज्यादा लोगों को रोजगार मिला है। एलपीजी वितरण केंद्र के माध्यम से भी रोजगार मिला है। महिलाओं को आगे बढ़ाया जाता है।

सवाल: उज्ज्वला योजना की शिकायतों के निपटारे के लिए कोई खास रणनीति बनी है क्या?
जवाब: स्पष्ट आदेश है कि यदि उज्जवला योजना में किसी तरह की गड़बड़ी मिली तो जिम्मेदार बख्शे नहीं जाएंगे। जहां भी शिकायत मिली है, प्रभावी कार्रवाई की गई है। फील्ड ऑफिसर लगातार जांच-पड़ताल करते हैं। यूपी में अलग-अलग कंपनियों के 4.15 करोड़ उपभोक्ता हैं। इसमें से 1.43 करोड़ उपभोक्ता उज्ज्वला योजना के हैं। कोरोना संकट के बीच प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत उज्ज्वला योजना के सभी उपभोक्ताओं के बैंक खाते में धनराशि भेजी गई थी। गैस सिलिंडर पहुंचाने का काम पेट्रोलियम कंपनियों ने किया है। गोरखपुर क्षेत्र के 7.75 लाख उपभोक्ताओं को गैस सिलिंडर उपलब्ध कराए गए हैं।

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सवाल: तकनीकी मदद से सेवाओं में सुधार व पारदर्शिता पर कुछ काम कर रहे हैं क्या?
जवाब: बहुत अच्छा सवाल है। कंपनी का पहला फोकस तकनीक की मदद से सेवाओं को और बढ़िया, गुणवत्तापरक बनाना है। देवरिया के बैतालपुर डिपो में जल्द ही ई-लॉकिंग की सुविधा शुरू की जाएगी। इसकी सफल शुरूआत कानपुर से हो चुकी है। ई-लॉकिंग को जियो फेनिशिंग से जोड़ा गया है। बैतालपुर डिपो से निकलने वाले हर टैंक को ई-लॉकिंग से जोड़ा जाएगा। इसका मतलब है कि टैंक निर्धारित रूट से ही जाएंगे। जब रिटेल आउटलेट पर टैंकर पहुंचेंगे, तभी ई-लॉकिंग सिस्टम काम करेगा। रिटेलर निर्धारित पासवर्ड व ओटीपी से ही लॉक खोलकर टैंकर को अनलोड करा सकेंगे। हर टैंकर में व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम लगाया जा रहा है। आईओसीएल पहली ऐसी कंपनी है, जो बीएस-4 से सीधे बीएस-6 का पेट्रोलियम उत्पाद उपलब्ध करा रही है। गुणवत्ता के लिहाज से कंपनी ने बीएस-5 को दरकिनार कर दिया। रिटेल आउटलेड को भी ऑटोमेशन से जोड़ा जा रहा है, ताकि लखनऊ, मुंबई या दूसरे शहरों में बैठकर निगरानी की जा सके।
 
सवाल: पेट्रोलियम व एलपीजी उपभोक्ताओं को कुछ सलाह देना चाहते हैं क्या?
जवाब: हां, यह सबसे महत्वपूर्ण है। हर उपभोक्ता को अपने अधिकार का इस्तेमाल करना चाहिए। आप पेट्रोल पंप से डीजल या पेट्रोल लें या नहीं, यह मायने नहीं रखता। आप किसी भी पेट्रोल पंप पर जाकर माप कर सकते हैं। इससे कोई पेट्रोल पंप संचालक इनकार नहीं कर सकता है। यदि कोई माप कराने से इनकार करे तो सीधे मुझे बता सकते हैं। चेक एंड फिल हर नागरिक के अधिकार में आता है। इसी तरह एलपीजी उपभोक्ता को प्री डिलिवरी जरूर चेक करना चाहिए। गैस सिलिंडर का वजन, वाल्ब लीकेज या ओरिंग जांचा जाना चाहिए। सिलिंडर देने वाले वितरक के पास जांच कराने के सामान अनिवार्य रूप से होने चाहिए। ऐसा नहीं है तो उपभोक्ता शिकायत कर सकते हैं। प्रभावी कार्रवाई होगी। ग्राहकों को जागरूक होना पड़ेगा। लाल सिलिंडर घर में ही इस्तेमाल हो, यह सुनिश्चित करना होगा। 19 किलोग्राम का गैस सिलिंडर का इस्तेमाल घर के बाहर (होटल, रेस्टोरेंट, शादी सहित अन्य) होना चाहिए। ऐसा हुआ तो गैस सिलिंडर की किल्लत नहीं आएगी। 

सवाल: कोरोना संकट काल में भी पेट्रोलियम, एलपीजी कंपनियों ने अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन किया, इस पर कुछ कहेंगे?
जवाब: जरूर। देश का आंकड़ा लिया जाए तो कंपनी, उसके कर्मचारी और सहयोगियों ने 1031 करोड़ रुपये पीएम केयर फंड में दान किया है। अकेले आईसीओएल से 233 करोड़ रुपये की मदद दी गई है। यूपी से प्रधानमंत्री राहत कोष और मुख्यमंत्री राहत कोष में भी 90 लाख रुपये जमा कराए गए। कोरोना संकट के बीच छह लाख फूड पैकेट बांटे गए थे। फूड एंड सिविल सप्लाई को 80 हजार मास्क और 20 हजार बॉटल सैनिटाइजर दिए गए। खास बात थी कि एलपीजी व पेट्रोलियम उत्पादों के वितरण में लगे हर कर्मचारी, वितरक का इंश्योरेंस कराया गया था। कोरोना संक्रमित होने पर परिवार सहित दो लाख रुपये इलाज पर खर्च किए गए। यदि किसी की मृत्यु हुई तो उसके परिजनों को पांच लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी गई। यूपी में कोरोना संक्रमण से दो कर्मियों की मौत हुई थी। इनके परिजनों को पांच-पांच लाख रुपये की सहायता मुहैया करा दी गई है।
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