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गोरखपुर: किसी ने बताया हत्या तो कोई बोला बदमाशों ने घेरा

Tue, 08 Mar 2022 01:24 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Tue, 08 Mar 2022 01:24 PM IST
सार

जांच में अक्सर शराबी निकलते हैं फर्जी सूचना देने वाले, दो मामलों में पुलिस ने केस भी दर्ज किया, रोजाना आते हैं तीन से चार मामले।

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Somebody told murder some said miscreants surrounded
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : iStock

विस्तार

लोगों को कानूनी मदद देने के लिए सक्रिय पुलिस कंट्रोल रूम की सांसत शराबी बढ़ा दे रहे हैं। आए दिन डॉयल 112 पर फोन पर कोई हत्या तो कोई खुद को बदमाशों से घिरा बताता है।

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ऐसी सूचनाओं से पुलिस बेवजह ही परेशान हो जाती है। जांच के बाद मामला फर्जी पाए जाने पर राहत की सांस तो लेती है, लेकिन इस दौरान थानेदार से लेकर अफसर तक को जवाब भी देना पड़ता है। अब पुलिस ने ऐसे मामलों में केस दर्ज कर कार्रवाई करनी भी शुरू कर दी है। हाल के दिनों में कैंट और कैंपियरगंज पुलिस ने ऐसी सूचना देने वालों पर केस दर्ज किया है।
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जानकारी के मुताबिक, पुलिस के पास कोई भी सूचना आती है तो उसे गंभीरता से लेकर तत्काल मौके पर जाना ही होता है। पुलिस को फर्जी सूचना देना कोई नई बात नहीं है, लेकिन इन दिनों इस तरह की सूचनाएं तेजी से बढ़ीं हैं। मनबढ़ कभी लूट की फर्जी सूचना तो कभी हत्या तक की सूचना देकर पुलिस की नींद उड़ा देते हैं। कई ऐसे मामले होते हैं, जिसमें मौके पर तो कुछ नहीं मिलता, लेकिन सूचना देने वाला का नंबर बंद होने की वजह से सांसत बढ़ जाती है। ऐसे मामलों में काफी देर तक एहतियातन पुलिस को जांच करनी पड़ती है।
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झूठी सूचना देने पर सात साल तक की सजा का प्रावधान

पुलिस को झूठी सूचना देने के मामले में आईपीसी की धारा 182 और 211 के तहत कार्रवाई का प्रावधान है। आईपीसी की धारा 182 के तहत अपराध को समझौते योग्य नहीं माना गया है। इसके तहत छह माह का कारावास, एक हजार रुपये का जुर्माना हो सकता है। जबकि, दफा 211 के तहत किसी व्यक्ति का नुकसान करने के उद्देश्य से अपराध का झूठा आरोप लगाने के मामले में दो साल का कारावास, आर्थिक दंड या दोनों हो सकता है।

एसएसपी डॉ. विपिन ताड़ा ने कहा कि आए दिन गलत सूचनाओं की वजह से पुलिस परेशान होती है। पुलिस ऐसे मामलों में केस दर्ज कर झूठी सूचना देने वाले पर कार्रवाई कर रही है। हाल के दिनों में इस तरह के मामलों में केस दर्ज किए गए हैं।

केस एक
23 फरवरी को कैंट इलाके की गांधी गली स्थित एक नर्सिंग होम के डॉक्टर को गोली मारने की सूचना से हड़कंप मच गया था। जांच में मामला फर्जी निकला था। पुलिस ने फर्जी सूचना देने के आरोप में नर्सिंग होम के ही पूर्व कर्मचारी सतीश मिश्रा पर केस दर्ज किया था।

केस दो
छह मार्च को कैंपियरगंज इलाके के रामनगर केवटलिया में हत्या किए जाने की सूचना दी गई। रात में सुधीर नाम के एक शख्स की सूचना पर पुलिस दौड़ पड़ी थी। पुलिस के मुताबिक, सुधीर ने नशे में सूचना दी थी, कोई घटना नहीं हुई थी। केस दर्ज कर पुलिस ने शांतिभंग में चालान किया।

केस तीन
दो फरवरी 2021 को बेलीपार एरिया के नगरी कालिका मंदिर पुलिया के पास 70 हजार रुपये लूट की सूचना पुलिस को मिली। जांच में सामने आया कि हार्डवेयर सप्लायर के ड्राइवर ने रुपये हड़पने की नीयत से पुलिस को सूचना दी थी। उसके पास से रुपये बरामद हो गए। जांच में सामने आने पर सूचना देने वाला मुनीम माफी मांगने लगा था।

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