फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   She helps from the street to the house, did not establish a household for social service.

मदर्स डे विशेष : जिनका कोई नहीं उनकी मां बनीं पुष्पलता

Sun, 10 May 2026 02:30 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर Updated Sun, 10 May 2026 02:30 AM IST
विज्ञापन
She helps from the street to the house, did not establish a household for social service.
गोरखपुर। ज्ञान बांटने और समाजसेवा को जिंदगी समर्पित कर चुकीं पुष्पलता बेघरों और बेसहारों की देखभाल मां की तरह करती हैं। प्राइमरी स्कूल में छात्रों को पढ़ाने के बाद सारा समय समाज के असहाय लोगों की मदद में बिताती हैं। कूड़ा बीन रहे बच्चों की पढ़ाई और दवा से लेकर सड़क पर अनाथ भटक रहे सैकड़ों लोगों की मदद कर चुकी हैं।
विज्ञापन

51 वर्षीय पुष्पलता सिंह गोरखनाथ में अपने माता पिता के साथ रहती हैं। चार भाई बहनों में सबसे बड़ी पुष्पलता ने कभी शादी नहीं करने का प्रण शुरुआती दौर में ही ले लिया था। स्कूल जाने के दौरान एक महिला को कम कपड़ों में ठंड में कूड़ा बीनता देखकर मन विचलित हो गया। उसे वहां से निकालकर घर ले गईं। पुलिस की सहायता से उसके घर कानपुर भिजवाया।
विज्ञापन

कूड़े और गंदगी से लोगों को निकालने के दौरान एक बार पुष्पलता स्वयं भी बीमार होकर अस्पताल में भर्ती हो चुकी हैं। एक विक्षिप्त बुजुर्ग को अस्पताल ले जाते समय पुष्पलता का हाथ भी टूट गया लेकिन इससे उनके हौसले में कोई कमी नहीं आई। जिन्हें वृद्धाश्रम या किसी अन्य संस्था में पालन-पोषण के लिए पहुंचा चुकी हैं, उनकी देखभाल के लिए भी समय-समय पर जाती रहती हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


संगीता ने बच्चों की पढ़ाई के लिए शुरू किया गोबर के उपले बनाने का काम
गोरखपुर। आत्मनिर्भरता की मिसाल बनीं संगीता आज कई महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गई हैं। बच्चों की पढ़ाई और परिवार की जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए उन्होंने गोबर के उपले बनाने का काम शुरू किया। शुरुआत छोटे स्तर से हुई लेकिन मेहनत और लगन ने उनके काम को पहचान दिलाई। संगीता ने घर-घर जाकर उपले तैयार किए और स्थानीय बाजारों में बिक्री शुरू की। धीरे-धीरे मांग बढ़ी तो उन्होंने अपने साथ गांव की अन्य महिलाओं और जरूरतमंद लोगों को भी जोड़ना शुरू किया। आज उनके इस प्रयास से करीब 50 लोगों को रोजगार मिल रहा है। संगीता का कहना है कि मां अपने बच्चों के भविष्य के लिए हर कठिनाई का सामना कर सकती है। उनका सपना है कि उनके बच्चे अच्छी शिक्षा प्राप्त कर आत्मनिर्भर बनें। साथ ही उन्होंने बताया कि उनका बेटा सेना में जाए और देश के लिए कुछ करे। आज उनके बेटे ने मां के सपनों को उड़ान दी और सेना में कार्यरत हैं।


500 से ज्यादा बच्चों की मदद कर चुकी हैं उषा दास
गोरखपुर। समाजसेवा को जिंदगी समर्पित कर चुकीं उषा दास बेघर और बेसहारा बच्चों की देखभाल मां की तरह करती हैं। उषा दास मां तो बन ही रही हैं, साथ ही बेघर बेसहारा बच्चों को शिक्षित भी कर रही हैं। अभी तक इन्होंने 500 से ज्यादा बच्चों की मदद कर चुकी हैं। इसमें कई बच्चे सफल भी हो चुके हैं। 51 वर्षीय जेल बाईपास निवासी उषा दास 26 साल से जरुरतमंद बच्चों की मदद कर रही हैं। बताया कि उनके पास इस समय 45 बच्चे हैं। अभी तक 500 से ज्यादा बच्चों की मदद कर चुकी हैं। कूड़ा बीनने वाले से लेकर सड़क पर अनाथ भटकने वाले बच्चों की मदद करती हैं। बताया कि कई ऐसे बच्चे भी मिलते हैं जिनके माता-पिता जन्म लेते ही जंगल में छोड़ देते हैं। उन बच्चों को मां की कमी न महसूस हो इसलिए उनकी हर इच्छा का ध्यान रखती हैं। बताया कि जब बच्चों को खुश देखती हैं तो उन्हें बहुत खुशी मिलती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed