गोरखपुर में बोले सचिव आरके चतुर्वेदी: खाद कारखाना जरूरी उत्पाद स्थानीय औद्योगिक इकाइयों से खरीदेगा
सचिव ने कमिश्नर, डीएम के साथ बरगदवां में बोरा बनाने वाली दो इकाइयों का निरीक्षण किया। सचिव आरके चतुर्वेदी ने कहा- केंद्र सरकार के वोकल फॉर लोकल का सपना भी होगा साकार।
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भारत सरकार के रसायन एवं पेट्रो रसायन विभाग के सचिव आरके चतुर्वेदी ने कहा कि हिंदुस्तान उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड (एचयूआरएल) का गोरखपुर खाद कारखाना जरूरी उत्पाद स्थानीय औद्योगिक इकाइयों से खरीदेगा। इसके लिए निविदा की शर्तों में बदलाव किया जाएगा। इस संबंध में निर्देश जारी किए गए हैं। इससे सरकार के वोकल फॉर लोकल के सोच को बल मिलेगा।
दो दिवसीय दौरे पर गोरखपुर आए सचिव आरके चतुर्वेदी शुक्रवार को मोहद्दीपुर स्थित एक होटल में पत्रकारों से बात कर रहे थे। सचिव की घोषणा के बाद गोरखपुर की औद्योगिक इकाइयों को आर्डर मिलने की राह खुल गई है। दरअसल, खाद कारखाना स्थापित होने से स्थानीय इकाइयों के उत्पादों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताई जा रही थी, लेकिन स्थानीय औद्योगिक इकाइयों को पहला झटका तब लगा, जब बोरा आपूर्ति के लिए निकाली गई निविदा में शर्तें अनुकूल न होने के कारण तीन इकाइयां प्रतिस्पर्धा में भाग नहीं ले सकीं।
एक इकाई प्रतिभाग कर पाई तो आर्डर पाने में नाकामयाब रही। खाद कारखाना में उत्पादन का निरीक्षण करने आए सचिव ने कमिश्नर रवि कुमार एनजी, डीएम विजय किरन आनंद के साथ बरगदवां में बोरा बनाने वाली दो औद्योगिक इकाइयों का बृहस्पतिवार को निरीक्षण किया था। इस दौरान चेंबर ऑफ इंडस्ट्रीज ने उनसे स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता देने की मांग की थी। सचिव ने कहा कि नट, बोल्ट, वॉशर जैसी अन्य वस्तुओं की खरीद भी स्थानीय इकाइयों से की जाएगी। इससे नई इकाइयां स्थापित हो सकेंगी।
एचयूआरएल के प्रबंधन को जिला प्रशासन एवं उपायुक्त उद्योग के साथ संपर्क कर कार्ययोजना बनाने के लिए कहा गया है। सचिव ने बताया कि वाहन, सफाई एवं अन्य कार्यों के लिए भी स्थानीय लोगों को रोजगार देने के निर्देश हैं। इस दौरान जीडीए उपाध्यक्ष प्रेमरंजन सिंह व गीडा सीईओ पवन अग्रवाल भी मौजूद रहे।
जून तक पूरी क्षमता से होने लगेगा उत्पादन
सचिव आरके चतुर्वेदी ने बताया कि खाद कारखाने से जून तक पूरी क्षमता के साथ उत्पादन होने लगेगा। कारखाना में उत्पादन को लेकर बीच में कुछ समस्याएं आईं थीं, जिन्हें दूर कर लिया गया है। इस समय 60 प्रतिशत क्षमता के साथ उत्पादन हो रहा है। अक्षय तृतीया के अवसर पर तीन मई से वाणिज्यिक उत्पादन (कामर्शियल प्रोडक्शन) शुरू कर दिया गया है। प्लांट से एक साल में 12.7 लाख मीट्रिक टन यूरिया का उत्पादन होगा। जरूरत पड़ने पर क्षमता का 115 प्रतिशत उत्पादन भी हो सकता है।
पहले पूर्वांचल के किसानों की मांग पूरी होगी, फिर बाहर जाएगी खाद
सचिव ने कहा कि खाद कारखाने में होने वाले उत्पादन से पहले पूर्वांचल के जिलों की मांग पूरी की जाएगी। इसके बाद यूरिया बाहर के जिलों को भेजी जाएगी। पूर्वांचल के डीलरों के माध्यम से आपूर्ति की जाएगी।
प्रति बोरी दो हजार रुपये की सब्सिडी
सचिव ने बताया कि यूरिया खाद की 45 किलो की बोरी की कीमत करीब 266 रुपये है, जबकि इसे बनाने पर 2200 रुपये की लागत आ रही है। करीब दो हजार रुपये की सब्सिडी दी जा रही है। खाद कारखाना मेें प्रतिदिन 12 करोड़ रुपये के गैस की खपत हो रही है।
विश्व की सबसे बड़ी कंपनी होगी एचयूआरएल
सचिव ने बताया कि झारखंड के सिंदरी एवं बिहार के बरौनी जिले में जल्द खाद कारखाना शुरू हो जाने से खाद उत्पादन में एचयूआरएल विश्व की सबसे बड़ी कंपनी हो जाएगी। इसके तहत एक ही प्रबंधन द्वारा संचालित तीन प्लांट में करीब 38.1 लाख मीट्रिक टन यूरिया का उत्पादन हर साल होगा। एचयूआरएल के तहत गोरखपुर में खाद कारखाना संचालित हो रहा है।
किसी को दिखाने के लिए न करें पढ़ाई : सचिव
केंद्र सरकार के रसायन एवं पेट्रोकेमिकल विभाग के सचिव और गोरखपुर विश्वविद्यालय के पुरातन छात्र (1983 बैच, भूगोल परास्नातक) आरके चतुर्वेदी शुक्रवार को भूगोल विभाग में पहुंचे और छात्र जीवन की सुनहरी यादों को संजोया। अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. अजय सिंह की अगुवाई में सचिव का भव्य स्वागत किया गया। एक मई को पुरातन छात्र सम्मेलन में अपरिहार्य कारणों से वह शामिल नहीं हो सके थे।
विभागीय भ्रमण के दौरान सचिव आरके चतुर्वेदी ने स्नातक और परास्नातक की पढ़ाई के दौरान जिन कक्षाओं में अध्ययन किया, उन कक्षाओं व लाइब्रेरी को देखा। छात्र जीवन के संस्मरणों को ताजा किया। आरके चतुर्वेदी ने कहा कि पढ़ाई किसी को दिखाने के लिए नहीं, बल्कि उसे आत्मसात करने के लिए करें। अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो अजय सिंह ने कहा कि आरके चतुर्वेदी अपनी संस्था के प्रति ज्यादा लगाव रखते हैं। विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग से स्नातक और परास्नातक की उपाधि हासिल की है। 1983-86 तक जेएनयू से रिसर्च किया, फिर आईएएस में चयन हुआ और एमपी कैडर मिला।
अब मिला स्वर्ण पदक, सम्मानित पुरातन छात्र का पुरस्कार
आरके चतुर्वेदी टॉपर होने के बावजूद अपना स्वर्ण पदक गोरखपुर विश्वविद्यालय से नहीं ले सके थे। अब जब वे शुक्रवार को गोरखपुर विश्वविद्यालय पहुंचे तो विवि प्रशासन ने उन्हें स्वर्ण पदक प्रदान किया। साथ ही सम्मानित पुरातन छात्र का पुरस्कार देकर सम्मानित किया।