{"_id":"5fc375508ebc3ec5ef031b7c","slug":"search-for-leprosy-and-kalazar-patients-in-gorakhpur","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"कोरोना काल में इन मरीजों को खोजेगा स्वास्थ्य विभाग, कराना होगा समय से इलाज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कोरोना काल में इन मरीजों को खोजेगा स्वास्थ्य विभाग, कराना होगा समय से इलाज
Sun, 29 Nov 2020 03:47 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Sun, 29 Nov 2020 03:47 PM IST
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गोरखपुर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. श्रीकांत तिवारी ने कहा है कि समुदाय के बीच आशा कार्यकर्ता की मदद से कुष्ठ और कालाजार के रोगियों को ढूंढ कर समय से इलाज उपलब्ध करवाया जाए। समय से बीमारी की पहचान और अति शीघ्र इलाज की मदद से इन दोनों बीमारियों का उन्मूलन किया जा सकता है।
विज्ञापन
मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने कहा कि यह बात समुदाय के बीच जानी चाहिए कि कुष्ठ और कालाजार का निःशुल्क इलाज उपलब्ध है, इसलिए लक्षण दिखने पर लोग बीमारी की जांच अवश्य करवाएं। उन्होंने बताया कि सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च (सीफॉर), पाथ, पीसीआई और जीएचएस जैसी स्वयंसेवी संस्थाएं भी इन बीमारियों की रोकथाम में मदद कर रही हैं।
विज्ञापन
संवेदनशील मंडल है गोरखपुर
मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि कालाजार के दृष्टि से गोरखपुर मंडल संवेदनशील है, हांलाकि गोरखपुर जिले में इस वर्ष सिर्फ एक केस सामने आया है। पूरे मंडल में कुल 36 केस हैं, जिनमें सबसे ज्यादा देवरिया और कुशीनगर जिले के हैं। चूंकि इन जिलों से प्रवास भी गोरखपुर में होता है, इसलिए जनपद में भी अतिरिक्त सतर्कता की आवश्यकता है।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि कालाजार बालू मक्खी से फैलने वाली बीमारी है। यह मक्खी नमी वाले स्थानों पर अंधेरे में पाई जाती है। यह तीन से छह फीट ऊंचाई तक ही उड़ पाती है। इसके काटने के बाद मरीज बीमार हो जाता है। उसे बुखार होता है और रुक-रुक कर बुखार चढ़ता-उतरता है। लक्षण दिखने पर मरीज को चिकित्सक को दिखाना चाहिए। इस बीमारी में मरीज का पेट फूल जाता है। भूख कम लगती है। शरीर पर काला चकत्ता पड़ जाता है।
कुष्ठ रोग के लक्षण
- शरीर के हिस्से में कहीं भी लाल चकत्ता
- लाल चकत्ता सुन्न होना चाहिए
- चकत्ते के पास की नस में सूजन या दर्द
- पांच से कम चकत्ता या एक नस में सूजन का केस पीबी कुष्ठ रोग है
- पांच या उससे अधिक चकत्ता या एक से अधिक नस में सूजन का केस एमबी कुष्ठ रोग है
कुष्ठ के प्रति भ्रांतियां
- यह छूने से फैलता है। जबकि सच है कि जब कटे हाथ के साथ कुष्ठ रोगी के सम्पर्क में आते हैं तो संक्रमण होता है।
- कुष्ठ का संक्रमण मरीज के थूकने से भी हो सकता है जबकि सच है कि मरीज के बेहद करीब सम्पर्क में रहने पर उसके मुंह या नाक से निकली हवा से इसका प्रसार होता है।
- कुष्ठ रोगी को घर में नहीं रखना चाहिए जबकि कानूनन कुष्ठ रोग के आधार पर तलाक लेने या देने तक की भी मनाही है।
- कुष्ठ का इलाज नहीं है जबकि सच यह है कि अगर बीमारी के शुरूआती दौर में इलाज शुरू हो जाए तो इसके बैक्टेरिया का प्रसार रुक जाता है। इसके दो लाभ होते हैं। एक तो दूसरा व्यक्ति इसके संक्रमण में नहीं आता है जबकि पीड़ित व्यक्ति दिव्यांगता से बच जाता है।