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मिसाल: सैनिटाइजर, हैंडवॉश, टॉयलेट क्लीनर ने बनाया महिलाओं को आत्मनिर्भर, जानिए कैसे
Sun, 02 Jan 2022 03:03 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Sun, 02 Jan 2022 03:03 PM IST
सार
गोरखपुर जिले के बड़हलगंज ब्लॉक की महिलाओं ने स्वयं सहायता समूह बनाकर काम शुरू किया। इनके उत्पादों की आपूर्ति सरकारी कार्यालयों में की जा रही है। अब बाजार में भी उत्पाद उतारेंगी।
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स्वयं सहायता समूह की महिलाएं।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
गोरखपुर जिले के बड़हलगंज ब्लॉक की महिलाओं ने स्वयं सहायता समूह बनाकर काम शुरू किया। इनके उत्पादों की आपूर्ति सरकारी कार्यालयों में की जा रही है। अब बाजार में भी उत्पाद उतारेंगी।
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अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
कोरोना महामारी की आपदा में जब लोगों का रोजगार खत्म हो रहा था, गोरखपुर जिले के बड़हलगंज ब्लॉक की कुछ महिलाओं ने मेहनत से इसे अवसर में तब्दील कर लिया। इन महिलाओं ने हैंड सैनिटाइजर का विपणन किया। सैनिटाइजर की मांग कम होने पर अब टॉयलेट क्लीनर और फिनायल का विपणन शुरू किया है।
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कोरोना महामारी की पहली लहर में बड़हलगंज ब्लॉक के खड़ेसरी गांव में अनेक परिवारों के मुखिया बेरोजगार हो गए थे। ऐसे में राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार मिशन की ओर से महिलाओं को स्वयं सहायता समूह बनाकर आय बढ़ाने की प्रेरणा दी गई। ब्लॉक प्रबंधक राजाराम की प्रेरणा से जून-जुलाई 2020 में गांव की दस महिलाओं को जोड़कर गंगा प्रेरणा स्वयं सहायता समूह की स्थापना की गई। समूह की अध्यक्ष सरोज देवी को बनाया गया।
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मांग को देखते हुए समूह ने सैनिटाइजर के विपणन का काम शुरू किया। प्रेरणा ब्रांड नाम से इसकी आपूर्ति सरकारी, अर्ध सरकारी कार्यालयों में की गई। इससे समूह की महिलाओं की प्रतिमाह छह से आठ हजार रुपये तक आय होने लगी।
सरोज देवी बताती हैं कि हैंड सैनिटाइजर की मांग घटने पर दिसंबर 2021 में टॉयलेट क्लीनर और फिनायल के विपणन की योजना बनाई गई। एनआरएलएम की जिला इकाई की मदद से समूह ने प्रेरणा फिनायल और प्रेरणा टॉयलेट क्लीनर का विपणन शुरू किया है। फिलहाल इनकी आपूर्ति सामुदायिक-सार्वजनिक शौचालयों के साथ सरकारी कार्यालयों में की जा रही है।
एनआरएलएम की ओर से लगाए जाने वाले मेलों में भी इनकी बिक्री की जा रही है। जल्द ही खुले बाजार में भी इन्हें उतारा जाएगा। राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार मिशन के जिला प्रबंधक सचिन जायसवाल ने बताया कि समूह से जुड़ी महिलाएं प्रति माह छह से आठ हजार रुपये कमाई कर रही हैं।