फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   Safety of 23 crore people is our priority, decision in interest of the public : Yogi Adityanath

23 करोड़ जनता की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता, जनता के हित में होगा निर्णय : योगी आदित्यनाथ 

Mon, 09 Mar 2020 09:45 PM IST
Mohit Mudgal अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर Published by: Mohit Mudgal Updated Mon, 09 Mar 2020 09:45 PM IST
विज्ञापन
Safety of 23 crore people is our priority, decision in interest of the public : Yogi Adityanath
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ - फोटो : amar ujala
सीएए विरोधी हिंसा के आरोपियों  के पोस्टर हटाने के हाईकोर्ट के आदेश पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि  हाईकोर्ट के आदेश का अध्ययन कराया जा रहा है। सरकार की पहली प्राथमिकता यूपी की 23 करोड़ जनता की सुरक्षा है। जो जनता के हित में होगा, उसी हिसाब से निर्णय लिया जाएगा। 
विज्ञापन


ये है पूरा मामला :
 
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लखनऊ में सीएए के विरोध के दौरान हुई हिंसा के आरोपियों के पोस्टर बैनर अविलंब हटा लेने का लखनऊ प्रशासन को निर्देश दिया है। कोर्ट ने लखनऊ के डीएम और पुलिस कमिश्नर से कहा है कि इन पोस्टरों को तत्काल हटा कर आदेश के अनुपालन की रिपोर्ट 16 मार्च तक हाईकोर्ट के महा निबंधक के समक्ष दाखिल कर दी जाए। 
विज्ञापन


सार्वजनिक संपत्ति में तोड़फोड़ करने के आरोपियों से नुकसान की वसूली के लिए लखनऊ प्रशासन ने कार्रवाई शुरू की है, इसके तहत लगभग 50 आरोपियों के पोस्टर सड़कों पर लगा दिए गए हैं। जिन पर यह संदेश लिखा है कि यह सभी लोग नुकसान की भरपाई के लिए जुर्माना जमा करें।
विज्ञापन
विज्ञापन


इस संबंध में मीडिया में प्रकाशित रिपोर्टों पर हाईकोर्ट के मुख्य न्यायमूर्ति गोविंद माथुर ने स्वत: संज्ञान लेते हुए स्पेशल बेंच गठित की थी तथा राज्य सरकार से जवाब तलब किया था। रविवार को न्यायमूर्ति गोविंद माथुर और न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा की स्पेशल बेंच ने इस मामले पर सुनवाई की। 

कोर्ट ने क्या कहा ?

महाधिवक्ता राघवेंद्र प्रताप सिंह ने सरकार द्वारा उठाए गए कदम को जायज बताते हुए कहा था कि सरकार ने गैरकानूनी काम करने वालों को हतोत्साहित करने के इरादे से उनके पोस्टर लगाए हैं। सुनवाई के बाद कोर्ट ने अपना निर्णय सुरक्षित कर लिया था। सोमवार को दिन में दो बजे अदालत ने इस मामले पर फैसला सुनाते हुए पोस्टर बैनर हटाने का आदेश दिया। 

अदालत ने प्रदेश सरकार की कार्रवाई को संविधान के अनुच्छेद -21 में दिए गए मौलिक अधिकार ‘निजता के अधिकार’ के विपरीत माना है। कोर्ट का कहना था कि मौलिक अधिकारों को छीना नहीं जा सकता है । कोई भी ऐसा कानून नहीं है, जो किसी व्यक्ति की निजी सूचनाओं को पोस्टर बैनर लगाकर के सार्वजनिक करने की अनुमति देता हो। 

कोर्ट ने के एस पुत्तूस्वामी मामले में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि लोकतांत्रिक देश में वैधानिक उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए कार्यवाही किया जाना आवश्यक है। मगर महाधिवक्ता यह बताने में नाकाम रहे कि आरोपियों का पोस्टर लगाना क्यों जरूरी था। वैधानिक लक्ष्य की प्राप्ति के लिए किसी व्यक्ति का पोस्टर लगाने का कोई कानून नहीं है । 

कोर्ट ने कहा कि आरोपी वह व्यक्ति हैं जिनसे कुछ जुर्माना वसूला जाना है जबकि उत्तर प्रदेश में लाखों ऐसे आरोपी हैं, जो गंभीर अपराधों में शामिल हैं, प्रदेश सरकार ने कभी भी ऐसे आरोपियों का डाटा सार्वजनिक नहीं किया, फिर किस आधार पर तोड़फोड़ -हिंसा में शामिल आरोपियों का डाटा सार्वजनिक किया गया। 

कोर्ट ने कहा कि राज्य द्वारा की गई कार्रवाई अनावश्यक है और लोगों की निजता में अनावश्यक का हस्तक्षेप है, जो निजता के अधिकार का उल्लंघन करता है। कोर्ट ने याचिका निस्तारित करते हुए आदेश के अनुपालन की रिपोर्ट 16 माह निबंधक के समक्ष दाखिल करने का आदेश दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed