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Exclusive: अब मोबाइल पर मिलेगा राप्ती और रोहिन नदी के जलस्तर का अपडेट, रेलवे लगाएगा मॉनिटरिंग सिस्टम
Sun, 01 Aug 2021 02:47 PM IST
vivek shukla
राजन राय, गोरखपुर।
राजन राय, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Sun, 01 Aug 2021 02:47 PM IST
सार
दोनों नदियों पर अगले माह तक रेलवे लगाएगा वाटर लेवल मॉनिटरिंग सिस्टम।
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वाटर लेवल मॉनिटरिंग सिस्टम
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
राप्ती और रोहिन नदियों के जलस्तर का अपडेट अब सीधे मोबाइल पर मिल सकेगा। इसके लिए किसी मेनपावर की जरूरत नहीं पड़ेगी। यह संभव होगा पूर्वोत्तर रेलवे के वाटर लेवल मॉनिटरिंग सिस्टम से। गोरखपुर की राप्ती और रोहिन नदियों पर बने रेलवे के पुलों पर यह सिस्टम अगले महीने तक काम करने लगेगा। इसके बाद इन नदियों के जलस्तर की रिपोर्ट संबंधित अधिकारियों के पास उनके मोबाइल पर आने लगेगी।
एनईआर के सीपीआरओ पंकज कुमार सिंह ने बताया कि पूर्वोत्तर रेलवे के दायरे में आने वाली महत्वपूर्ण नदियों पर बने पुलों पर इस सिस्टम को लगा दिया गया है। बताया कि पारंपरिक गेज पद्धति से नदियों का जलस्तर पता करने में तात्कालिक सूचनाएं नहीं मिल पाती थीं। इससे रेलवे ट्रैक और पुल पर खतरे को भांप पाना मुश्किल होता था।
इससे कभी-कभी बाढ़ का पानी ट्रैक पर भी आ जाता था। लेकिन, आधुनिक वाटर लेवल मॉनिटरिंग सिस्टम के इस्तेमाल से जलस्तर की सूचना मिलनी आसान हो जाएगी और खतरे का आकलन कर उसी हिसाब से पहले ही व्यवस्था की जाएगी। पूर्वोत्तर रेलवे के दायरे में आने वाले 15 पुलों पर इस सिस्टम को लगाया जा चुका है। महाप्रबंधक ने अब गोरखपुर-नौतनवां के बीच महेसरा पुल और गोरखपुर में राप्ती नदी के पुल पर वाटर लेवल मॉनीटरिंग सिस्टम लगाने का निर्देश दिए है। जिसके बाद प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
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एनईआर के सीपीआरओ पंकज कुमार सिंह ने बताया कि पूर्वोत्तर रेलवे के दायरे में आने वाली महत्वपूर्ण नदियों पर बने पुलों पर इस सिस्टम को लगा दिया गया है। बताया कि पारंपरिक गेज पद्धति से नदियों का जलस्तर पता करने में तात्कालिक सूचनाएं नहीं मिल पाती थीं। इससे रेलवे ट्रैक और पुल पर खतरे को भांप पाना मुश्किल होता था।
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इससे कभी-कभी बाढ़ का पानी ट्रैक पर भी आ जाता था। लेकिन, आधुनिक वाटर लेवल मॉनिटरिंग सिस्टम के इस्तेमाल से जलस्तर की सूचना मिलनी आसान हो जाएगी और खतरे का आकलन कर उसी हिसाब से पहले ही व्यवस्था की जाएगी। पूर्वोत्तर रेलवे के दायरे में आने वाले 15 पुलों पर इस सिस्टम को लगाया जा चुका है। महाप्रबंधक ने अब गोरखपुर-नौतनवां के बीच महेसरा पुल और गोरखपुर में राप्ती नदी के पुल पर वाटर लेवल मॉनीटरिंग सिस्टम लगाने का निर्देश दिए है। जिसके बाद प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
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एक वर्ष पूर्व विकसित हुआ था सिस्टम
वाटर लेवल मॉनिटरिंग सिस्टम को एक वर्ष पूर्व विकसित किया गया था। पिछले वर्ष दारागंज-झूंसी के बीच स्थित आइजट ब्रिज, मांझी-बकुलहा के बीच स्थित पुल संख्या 16 एवं पनियहवा-वाल्मिकी नगर के बीच स्थित पुल संख्या 50, शारदा नदी पर पुल संख्या 97 पर इस सिस्टम को लगाया गया।
ऐसे काम करेगा सिस्टम
सोलर पैनल से जुड़ा एक सेंसर नदी में स्थित रेल पुल पर लगाया जाता है, इसमें एक चिप भी होती है। यह सेंसर ट्रैक मैनेजमेंट सिस्टम से जुड़ा होता है। इसमें रेल पुलों से संबद्ध सहायक मंडल इंजीनियर, कार्य निरीक्षक एवं रेल पथ निरीक्षक आदि के मोबाइल नंबर फीड किए गए हैं। प्रतिदिन नियमित अंतराल पर नदियों के जलस्तर के घटने एवं बढ़ने की जानकारी एसएमएस के माध्यम से यह प्रणाली संबंधित अधिकारियों को स्वत: एसएमएस के जरिये देगी।
पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी पंकज कुमार सिंह ने बताया कि बारिश के मौसम में पुलों के पास नदियों का जलस्तर मापने के लिए वाटर लेवल सिस्टम विकसित किया गया है। पूर्वोत्तर रेलवे के कुल 15 पुलों पर इसे लगाया गया है। राप्ती और रोहिन नदी पर इसे लगाने की प्रक्रिया चल रही है। इस सिस्टम के लगने के बाद पुल पर वाचमैन नहीं लगाना पड़ेगा। संबंधित अधिकारियों के पास जलस्तर एसएमएस के माध्यम से चला जाएगा।
ऐसे काम करेगा सिस्टम
सोलर पैनल से जुड़ा एक सेंसर नदी में स्थित रेल पुल पर लगाया जाता है, इसमें एक चिप भी होती है। यह सेंसर ट्रैक मैनेजमेंट सिस्टम से जुड़ा होता है। इसमें रेल पुलों से संबद्ध सहायक मंडल इंजीनियर, कार्य निरीक्षक एवं रेल पथ निरीक्षक आदि के मोबाइल नंबर फीड किए गए हैं। प्रतिदिन नियमित अंतराल पर नदियों के जलस्तर के घटने एवं बढ़ने की जानकारी एसएमएस के माध्यम से यह प्रणाली संबंधित अधिकारियों को स्वत: एसएमएस के जरिये देगी।
पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी पंकज कुमार सिंह ने बताया कि बारिश के मौसम में पुलों के पास नदियों का जलस्तर मापने के लिए वाटर लेवल सिस्टम विकसित किया गया है। पूर्वोत्तर रेलवे के कुल 15 पुलों पर इसे लगाया गया है। राप्ती और रोहिन नदी पर इसे लगाने की प्रक्रिया चल रही है। इस सिस्टम के लगने के बाद पुल पर वाचमैन नहीं लगाना पड़ेगा। संबंधित अधिकारियों के पास जलस्तर एसएमएस के माध्यम से चला जाएगा।