फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   Radheshyam Khemka editor of Kalyan Patrika received Padma Vibhushan posthumously

गोरखपुर: गीता प्रेस से प्रकाशित होने वाली कल्याण पत्रिका के संपादक रहे राधेश्याम खेमका को मिला मरणोपरांत पद्म विभूषण सम्मान

Tue, 25 Jan 2022 11:21 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर Published by: शाहरुख खान Updated Tue, 25 Jan 2022 11:21 PM IST
सार

सन 1935 में मूलरूप से बिहार के मुंगेर में जन्मे राधेश्याम खेमका प्राथमिक शिक्षा ग्रहण करने के बाद सपरिवार वाराणसी में आकर बस गए। यहां काशी हिंदू विश्वविद्यालय से उन्होंने एमए किया। लेकिन, उन्होंने अपनी कर्मभूमि गोरखपुर के गीताप्रेस को बनाई। 
 

विज्ञापन
Radheshyam Khemka editor of Kalyan Patrika received Padma Vibhushan posthumously
राधेश्याम खेमका (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

गीता प्रेस से प्रकाशित विश्व प्रसिद्ध पत्रिका कल्याण के संपादक रहे राधेश्याम खेमका को मरणोपरांत देश के दूसरे सबसे बड़े सम्मान पद्म विभूषण देने की घोषण की गई। इस घोषणा के साथ ही गीता प्रेस से जुड़े लोगों के खुशी व्यक्त की।
विज्ञापन


सन 1935 में मूलरूप से बिहार के मुंगेर में जन्मे राधेश्याम खेमका प्राथमिक शिक्षा ग्रहण करने के बाद सपरिवार वाराणसी में आकर बस गए। यहां काशी हिंदू विश्वविद्यालय से उन्होंने एमए किया। लेकिन, उन्होंने अपनी कर्मभूमि गोरखपुर के गीताप्रेस को बनाई। 
विज्ञापन


राधेश्याम खेमका ने सबसे पहले वर्ष 1982 में गीता प्रेस से प्रकाशित होने वाली पत्रिका कल्याण के विशेषांक का संपादन किया था। उसके बाद वर्ष मार्च 1983 से वह लगातार कल्याण के संपादन का कार्य संभालते रहे। 86 वर्ष की उम्र में तबियत खराब होने के बावजूद उन्होंने अप्रैल 2021 तक के कल्याण के अंकों का पूरे उत्साह के साथ संपादन किया। उनके संपादन में कल्याण के 40 वार्षिक विशेषांक, 460 संपादित अंक प्रकाशित हुए। 
विज्ञापन
विज्ञापन


इस दौरान कल्याण की नौ करोड़ 54 लाख 46 हजार प्रतियां प्रकाशित हुईं। कल्याण में पुराणों एवं लुप्त हो रहे संस्कारों व कर्मकांड की पुस्तकों का प्रामाणिक संस्करण भी उनके राधेश्याम खेमका के संपादन में ही प्रकाशित हुआ। वह 2014 से गीता प्रेस ट्रस्ट बोर्ड के अध्यक्ष भी रहे। ट्रस्ट का अध्यक्ष रहते हुए पिछले वर्ष तीन अप्रैल को 86 वर्ष की उम्र में उनका निधन वाराणसी में हो गया।

विभिन्न समाजसेवी संस्थाओं से जुड़े थे राधेश्याम खेमका

राधेश्याम खेमका ने 40 वर्षों से गीता प्रेस में अपनी भूमिका का निर्वाहन करते हुए अनेक धार्मिक पत्रिकाओं का संपादन किया। उनमें कल्याण प्रमुख है। साथ ही वह वाराणसी की प्रसिद्ध संस्थाओं मारवाड़ी सेवा संघ, मुमुक्षु भवन, श्रीराम लक्ष्मी मारवाड़ी अस्पताल गोदौलिया, बिड़ला अस्पताल मछोदरी, काशी गोशाला ट्रस्ट सहित विभिन्न समाजसेवी संस्थाओं से जुड़े रहे।

साधु-संतों का रहा सानिध्य
धर्म सम्राट स्वामी करपात्रीजी, शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती, पुरी के शंकराचार्य स्वामी निरंजन देव तीर्थ और वर्तमान पीठाधीश्वर स्वामी निश्चलानंद, कथा व्यास रामचंद्र डोंगरे जैसे संतों से विशेष सानिध्य स्व. राधेश्याम खेमका पर रहा।

इन विशेषांक का किया संपादन
श्रीवामन पुराण अंक, चरितनिर्माण अंक, श्रीमत्स्य पुराण अंक (पूर्वार्ध), श्रीमत्स्य पुराण अंक (उत्रार्ध), संकीर्तन अंक, शक्ति उपासना अंक, शिक्षा अंक, पुराणकथा अंक, देवता अंक, योगतत्वांक, संक्षिप्त भविष्य पुराण अंक, श्रीराम भक्ति अंक, गो सेवा अंक, धर्मशास्त्र अंक, कूर्मपुराण अंक, भगलल्लीला अंक, वेद कथा अंक, संक्षिप्त गरुड़ पुराण अंक, आरोग्य अंक, नितिसार अंक, भगवत प्रेम अंक, व्रतपर्वोत्सव अंक, देवीपुराण (शक्तिपीठांक), अवतार कथा अंक, संस्कार अंक, श्रीमद्देवी भागवत अंक (पूर्वार्ध), श्रीमद्देवी भागवत अंक (उत्रार्ध), जीवनचर्या अंक, दानमहिमा अंक, श्रीलिंग महापुराण अंक, भक्तमाल अंक, ज्योतितत्वांक, सेवा अंक, गङ्गा अंक, शिव महापुराण अंक (पूर्वार्ध), शिव महापुराण (उत्रार्ध), श्रीराधा माधव अंक, बोधकथा अंक, श्री गणेश पुराण अंक।

पूरे जीवन किया गंगाजल का सेवन
गीता प्रेस के प्रबंधक लालमणि तिवारी ने बताया कि अपने पूरे जीवन में राधेश्याम खेमका ने सिर्फ गंगा जल का ही पान किया। अन्न केवल दो बार ग्रहण करते थे। सादा जीवन उच्च विचार उनके आचरण में था। 60 से अधिक वर्षों तक उन्होंने इलाहाबाद के माघ मेला में एक महीने का कल्पवास किया था। उनका जीवन बहुत ही संयमित जीवन था। साधु संतों और गरीबों की सेवा करना उनके स्वभाव में था। अपने कार्यों के दम पर वह पद्म विभूषण के अधिकारी थे। भारत सरकार ने भी एक ऐसे व्यक्ति को पद्म विभूषण सम्मान से नवाजा है, जिनके लिए कभी न प्रयास किया गया और न ही इनके मन में कभी इच्छा रही।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed