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Gorakhpur News: सिंचाई विभाग के अवर अभियंता को मिली सजा, भ्रष्टाचार का लगा था आरोप
Fri, 17 Mar 2023 11:56 AM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Fri, 17 Mar 2023 11:56 AM IST
सार
अभियुक्त हीरालाल उपाध्याय अवर अभियंता ने चार अक्तूबर 1979 से आठ अक्तूबर 1985 के मध्य अपने द्वारा संपादित कराए गए लोकहित के निर्माण कार्यों में तीन लाख 33 हजार 474 रुपये 85 पैसों का ब्योरा अपने सक्षम अधिकारी को नहीं प्रस्तुत किया था।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
भ्रष्टाचार का जुर्म सिद्ध पाए जाने पर विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम तनु भटनागर ने शारदा खण्ड 51 सिंचाई विभाग, प्रतापगढ़ में कार्यरत तत्कालीन अवर अभियंता हीरालाल उपाध्याय को तीन साल के कठोर कारावास एवं 50 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया है। अर्थदंड न देने पर अभियुक्त को छह माह का कारावास अलग से भुगतना होगा।
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अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक परमानंद राम त्रिपाठी का कहना था कि 26 सितंबर 1989 को एक समाचार पत्र में एक खबर लाखों के घोटाले को दबाने की कोशिश, जिसमे शारदा खण्ड 51 सिंचाई विभाग प्रतापगढ़ के अवर अभियंता आदि के विरुद्ध भ्रष्टाचार के आरोपों का प्रकाशन हुआ था।
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इसके अतिरिक्त केपी महरोत्रा अनुसचिव सतर्कता अनुभाग एक उत्तर प्रदेश शासन द्वारा एक पत्र जो पुलिस महानिरीक्षक भ्रष्टाचार निवारण संगठन को संबोधित था। जिसकी जांच भ्रष्टाचार निवारण संगठन अपराध अनुसंधान विभाग फैजाबाद द्वारा की गई।
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जांच में पाया गया कि अभियुक्त हीरालाल उपाध्याय अवर अभियंता ने चार अक्तूबर 1979 से आठ अक्तूबर 1985 के मध्य अपने द्वारा संपादित कराए गए लोकहित के निर्माण कार्यों में तीन लाख 33 हजार 474 रुपये 85 पैसों का ब्योरा अपने सक्षम अधिकारी को नहीं प्रस्तुत किया था।
यह धनराशि अभियुक्त के विरुद्ध अग्रिम प्रकीर्ण में डाली गई थी। जिसका समायोजन कराने हेतु वर्ष 1994 तक अनेकों बार अभियुक्त को पत्र लिखा गया, लेकिन अभियुक्त समायोजन के लिए कोई आंकड़ा प्रस्तुत नहीं किया।