मैनफ्रेंड की जल्द होगी वतन वापसी, जुर्माना जमा करने को जर्मन दूतावास ने पूछा खाता नंबर
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गोरखपुर जिला कारागार में चरस की तस्करी के आरोप में निरुद्ध जर्मन नागरिक मैनफ्रेंड को स्वदेश ले जाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। मैनफ्रेंड पर कोर्ट द्वारा लगाए गए एक लाख रुपये जुर्माना की राशि जमा करने के लिए जर्मन दूतावास ने जेल के अधिकारियों से खाता नंबर पूछा है।
बंदी को सजा महराजगंज जिले की कोर्ट से मिलने की वजह से पत्र को वहां भेजा रहा है। कोर्ट ने मैनफ्रेंड को 10 साल की कैद व एक लाख रुपये जुर्माना की सजा सुनाई है। जुर्माना राशि कोर्ट में जमा न करने पर एक साल की अतिरिक्त सजा काटनी होगी।
जानकारी के अनुसार 31 अक्तूबर 2014 को जर्मन नागरिक मैनफ्रेंड बैरेंड, भैरहवां (नेपाल) से रिक्शे पर बैठकर सोनौली बस डिपो पर आ रहा था। बार्डर पर तलाशी में एसएसबी को उसके पास चार किलोग्राम चरस मिला, जिसे बैग में छिपाकर वह गोवा ले जा रहा था।
जर्मनी सजसेन के सिरायू लेसिंग स्ट्रीट निवासी मैनफ्रेंड से पूछताछ में पता चला कि भैरहवां के एक होटल से उसने 1.20 लाख रुपये में चरस खरीदा था। एक साल तक महराजगंज जेल में रहने के बाद मैनफ्रेंड को एक अक्तूबर 2015 को गोरखपुर जेल में शिफ्ट किया गया।
पत्नी ने नहीं छोड़ा साथ
जानकारी होने पर उसकी पत्नी जूलिया कैफर गोरखपुर चली आई। उसके प्रयास से 31 मई 2017 को मैनफ्रेंड को हाईकोर्ट से जमानत मिल गई। लेकिन जमानतदार न मिलने से रिहाई रुक गई। जिसके बाद जूलिया ने जर्मनी दूतावास व गृह मंत्रालय (भारत सरकार) के अधिकारियों को पत्र लिखकर मदद मांगी थी। जिस पर विचार करते हुए गृह मंत्रालय ने मैनफ्रेंड को शेष सजा जर्मनी की जेल में काटने की अनुमति दे दी है।
इसके बाद जेल प्रशासन ने गृह मंत्रालय व दूतावास से उसे शिफ्ट करने के बारे में पिछले दिनों पत्राचार किया था। इसी क्रम में जुर्माना राशि जमा कराने के लिए जर्मन दूतावास ने पत्र भेजकर खाता नंबर मांगा है।
गोरखपुर के जेल अधिकारी पत्र को महराजगंज जेल प्रशासन को भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी। जुर्माना जमा होने के बाद उसे यहां से पुलिस फोर्स के साथ दिल्ली दूतावास भिजवाया जाएगा।