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गोरखपुर: जालसाज के आगरा दफ्तर व लैपटॉप को खंगालेगी पुलिस, सामने आएंगे कई और राज

Tue, 12 Sep 2023 01:20 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Tue, 12 Sep 2023 01:20 PM IST
सार

पंकज ने संस्था का एनसीटी दिल्ली से पंजीकरण कराया था। एनजीओ के तौर पर पंजीकृत संस्था के जरिए बड़ी सावधानी से जालसाजी कर रहे थे। मार्कशीट तक पर लिख दिए थे कि कोर्ट से मिलने वाली डिग्री का नौकरी में इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं।

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Police will search Agra office and laptop of fraudster in Gorakhpur
जालसाज पंकज। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

फर्जी संस्था खोलकर जालसाजी करने वाले आगरा के पंकज पोरवाल की गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस आगरा में उसके दफ्तर और लैपटॉप की जांच की तैयारी में है। बताया जा रहा है कि इसके बाद ठगी के शिकार छात्रों की संख्या बढ़ सकती है। पुलिस को जांच में यह भी पता चला है कि ठगी के शिकार कई छात्रों ने सरकारी नौकरी तक हासिल कर ली थी, लेकिन सर्टिफिकेट सत्यापन के दौरान उन्हें मार्कशीट फर्जी होने की जानकारी मिली। उन्होंने कहीं शिकायत नहीं दर्ज कराई। इसकी वजह से पंकज पोरवाल ने फ्रेंचाइजी देकर 14 जिलों में अपना धंधा फैला लिया।

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जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी पंकज ने अपने संस्था के महत्वपूर्ण पदों पर किसी भी बाहरी को नहीं रखा था। पत्नी, चाचा, भाई के अलावा करीबी दोस्तों को ही पदाधिकारी बनाया था, ताकि इसका भंडाफोड़ न हो सके। पुलिस की जांच में सामने आया है कि दो सौ छात्र अब भी संस्था के विभिन्न शाखाओं में शिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।
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पुलिस ने पूरे मामले को पकड़ने के बाद लोकल स्तर पर सीएमओ दफ्तर के जिम्मेदार अफसरों को भी बुलाकर सहयोग लिया। इनकी जांच के बाद यह पूरी तरह से साफ हो गया कि यह सभी फर्जी संस्था खोलकर जालसाजी कर रहे हैं।
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पंकज ने संस्था का एनसीटी दिल्ली से पंजीकरण कराया था। एनजीओ के तौर पर पंजीकृत संस्था के जरिए बड़ी सावधानी से जालसाजी कर रहे थे। मार्कशीट तक पर लिख दिए थे कि कोर्ट से मिलने वाली डिग्री का नौकरी में इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं।
 

गुलरिहा थाने की पुलिस ने की विवचेना

केस को पहले कोर्ट के आदेश पर चौरीचौरा थाने में दर्ज किया गया था। बाद में एएसपी मानुष पारिक ने इस पूरे प्रकरण की जांच गुलरिहा पुलिस को सुपुर्द कर दिया। गुलरिहा थाने के एसएसआई शेष कुमार शर्मा ने विवेचना की। एसएसपी खुद इस केस की मानीटरिंग कर रहे थे।

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शातिर है पंकज, फ्रेंचाइजी लेकर भी कई फंसे
पुलिस की जांच में पता चला है कि पंकज बेहद शातिर है और वह लोगों को बातों में उलझाना जानता है। फ्रेंचाइजी लेने वालों से भी उसने ठगी की है। कई लोगों ने बिना जानकारी के ही फ्रेंचाइजी ले ली। फ्रेंचाइजी देने के दौरान तीन से चार लाख रुपये लेता था और फिर छात्र के दाखिला के समय ली जाने वाली फीस का 30 प्रतिशत भी ले लेता था। इसके अलावा विभिन्न मदों में आने वाले रुपयों में भी इसका शेयर था। परीक्षा भी खुद कराता था और मार्कशीट भी खुद ही जारी करता था।
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