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Gorakhpur News: तीन माह में कमलेश को भूमाफिया भी नहीं घोषित कर पाए, छात्रों के लाखों फंसेंगे

Mon, 09 Oct 2023 01:21 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Mon, 09 Oct 2023 01:21 PM IST
सार

सीलिंग की जमीन का बैनामा तो फिर भी संभव है, लेकिन उसका खारिज-दाखिल हो जाना बिना कर्मचारियों के संभव नहीं है। तहसील के कर्मचारी और अफसर से गहरी सांठगांठ की वजह से कमलेश करोड़पति बन गया लेकिन आम लोग ठगे गए हैं।

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Police could not even declare Kamlesh a land mafia in three months
सीलिंग की जमीन पर बना है कमलेश का आईटीआई कॉलेज। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

सीलिंग की जमीन बेचने वाला जालसाज कमलेश यादव और दीनानाथ पर कुल 31 केस दर्ज हो गए हैं, लेकिन लिखा-पढ़ी में दोनों अभी भूमाफिया नहीं घोषित हो सके है। जबकि, तीन महीने पहले पुलिस ने अपनी रिपोर्ट प्रशासन को सौंप दी थी। अब दीनानाथ को कोर्ट से जमानत भी मिल गई है।

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जिन जमीनों को उसने बेचा है, उसे न तो जब्त किया गया है और न ही यह बताया गया है कि कौन सी जमीन सीलिंग की है। आईटीआई कॉलेज और दीनानाथ का गेस्ट हाउस अब भी उसी तरह से चल रहा है। अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो कॉलेज में दाखिला लेने वाले छात्रों के लाखों रुपये डूब सकते हैं।
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जानकारी के मुताबिक, पुलिस की जांच में सामने आया है कि कुसम्ही, रुद्रापुर में सीलिंग की आठ एकड़ जमीन है। प्रशासन के रिकॉर्ड में यह दर्ज है, लेकिन यह सार्वजनिक अब किया गया। सबसे बड़ी बात यह है कि सीलिंग की जमीन पर रजिस्ट्री दफ्तर से रजिस्ट्री भी हो गई।
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इसके अलावा कई जमीनों का खारिज दाखिल भी हो गया। अब यह जांच में सामने आने के बाद पुलिस ने उप निबंधक कार्यालय से संपर्क भी किया है। दो पत्र भेजे जाने के बाद उप निबंधन कार्यालय पत्रावली देने को तैयार हुआ और जब एक-एक जमीन की जांच शुरू की गई तो कई कर्मचारियों को खेल सामने आ गया है।
 

अब जांच का दायरा जितना बढ़ा रहा है, उतना बड़ा खेल भी सामने आ रहा है, लेकिन पुलिस की रिपोर्ट पर प्रशासन की ओर से हो रही देरी इसमें सबसे बड़ा रोड़ा बन गई है। इसे लेकर पुलिस अफसर अब डीएम से सीधे वार्ता करने की तैयारी में है, ताकि जांच को आगे बढ़ाकर गैंगस्टर की कार्रवाई की जाए।

आईटीआई कॉलेज के बारे में यह भी सामने आया है कि सीलिंग की जमीन पर बना है। इतना ही नहीं पुलिस की जांच में आया है कि 2016 में कमलेश पर कुशीनगर के लोगों ने गोली भी चलाई थी। उस समय उसे गोली लगी थी और वह मेडिकल कॉलेज में भर्ती हुआ था, लेकिन तहरीर कमलेश ने दिया नहीं है और फिर दबाव में उसने रुपया भी वापस किया था। अब इस बिंदु पर भी पुलिस जांच कर रही है।

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आखिर कैसे हो गई सीलिंग की जमीन का खारिज-दाखिल

सीलिंग की जमीन का बैनामा तो फिर भी संभव है, लेकिन उसका खारिज-दाखिल हो जाना बिना कर्मचारियों के संभव नहीं है। तहसील के कर्मचारी और अफसर से गहरी सांठगांठ की वजह से कमलेश करोड़पति बन गया लेकिन आम लोग ठगे गए हैं। हालात यह है कि जिन लोगों की जमीन का खारिज दाखिल हो गया है वह सीलिंग की जमीन को अपना समझकर उस पर अपनी गाढ़ी कमाई लगाकर मकान भी बनवा चुके हैं।

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अब जब उन्हें यह पता चल रहा है कि वह सीलिंग की जमीन है तो उनका सुख-चैन उड़ गया है। वह पुलिस के पास आ रहे हैं और एक के बाद एक पुलिस केस दर्ज कर ले रही है, लेकिन असल बात तो यह है कि जब तक इस पर प्रशासनिक कार्रवाई नहीं होगी। राजस्व विभाग खुद जांच नहीं करेगा, इंसाफ मिल पाना मुश्किल है।
 
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