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Gorakhpur News: गोरखपुर एम्स में मरीज माफिया प्रकरण की जांच रिपोर्ट तैयार, जाएगी सीएम कार्यालय

Mon, 09 Oct 2023 01:03 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Mon, 09 Oct 2023 01:03 PM IST
सार

एम्स के मीडिया प्रभारी पंकज श्रीवास्तव ने बताया कि परिसर में जन औषधि की दो दुकानें खोलनी है। अभी एक ही दुकान संचालित हो रही है, जिससे सभी मरीजों को दवा व अन्य उपकरण मिलने में असुविधा होती है। जल्दी ही दूसरी दुकान भी खोल दी जाएगी।

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Investigation report of patient mafia case in Gorakhpur AIIMS ready
गोरखपुर एम्स। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

मरीज माफिया पर सख्ती के लिए अब एम्स प्रशासन ने भी तैयारी शुरू कर दी है। परिसर के अंदर सुरक्षा व्यवस्था में लगे गार्ड आने-जाने वालों पर नजर रखेंगे, वहीं बाहर की निगरानी के लिए पुलिस की मदद ली जाएगी। एम्स प्रशासन इसके लिए वरिष्ठ अफसरों को पत्र भेजेगा। इसके अलावा 27 सितंबर की रात बिना ऑपरेशन के रेफर किए गए मरीज के परिजनों से भी संपर्क कर मामले की जानकारी ली गई है। इसके बाद पूरे मामले की रिपोर्ट मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजी जाएगी।

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एम्स के हड्डी रोग विभाग में भर्ती सिकरीगंज इलाके के शुक्लपुर निवासी दिव्यांग अशोक शुक्ला के कूल्हे का ऑपरेशन होना था। पीड़ित के भाई संतोष शुक्ला ने बताया कि उनके भाई को ऑपरेशन के लिए ओपीडी में ले जाया गया। सारे उपकरण भी खरीदवा कर मंगा लिए गए।
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बाद में ऑपरेशन के लिए और रुपयों की मांग की गई, जिसे देने से इंकार करने के बाद डॉक्टर ने बिना ऑपरेशन किए ही भाई को ओटी से बाहर कर दिया था। बाद में उसे बीआरडी मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। परिजनों ने उसे नर्सिंग होम में भर्ती कराया, जहां ऑपरेशन किया गया।
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संतोष शुक्ला ने इस मामले की शिकायत मुख्यमंत्री से की थी। इसके अलावा जन सुनवाई पोर्टल पर भी अपनी शिकायत दर्ज कराई थी। मुख्यमंत्री कार्यालय ने इस मामले में जवाब तलब किया तो जांच शुरू हो गई है। एम्स प्रशासन अपने रिकार्ड खंगाल रहा है।

भर्ती मरीज का क्यों ऑपरेशन नहीं हुआ और क्यों रेफर किया गया, इससे संबंधित जानकारी हड्डी रोग विभाग से ली गई है। इसके अलावा दलालों पर सख्ती के लिए पुलिस की भी मदद ली जाएगी। आगे ऐसी घटनाएं न हों, इस पर रोक लगाने के लिए पुलिस कर्मियों की सक्रियता बढ़ाई जाएगी। हालांकि, एम्स के जिम्मेदार इस पर सीधे कुछ कहने से परहेज कर रहे हैं।

 

जांच शुरू हुई तो मची खलबली

एम्स गेट के इर्द-गिर्द अपना जाल फैला रखे दलालों को सीएम कार्यालय से जांच की भनक लग गई है। उन्हें अब ऐसे मामलों में कार्रवाई का डर सता रहा है। कुछ दिन पहले ही मेडिकल कॉलेज के पास से अपना नेटवर्क चलाने वालों पर भी पुलिस ने शिकंजा कसा था। एसएसपी के निर्देश पर पुलिस लगातार वहां से मरीज एंबुलेंस माफिया और खून माफिया के नेटवर्क को तोड़ने के लिए काम कर रही है।

कई एंबुलेंस को सीज किया गया। केस दर्ज कर कई लोगों को जेल भी भेजा गया है। जिला अस्पताल प्रशासन ने भी सख्ती शुरू कर दी है। वहां अंदर व बाहर निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं। अब एम्स के पास अड्डा जमाए दलालों पर सीएम की तिरछी नजर पड़ी है।

 

परिसर में खुलेगी एक और जन औषधि की दुकान
एम्स में हर दिन करीब ढाई हजार मरीज ओपीडी में आ रहे हैं। इन सबको सस्ती दवा उपलब्ध कराने के लिए परिसर में केवल एक ही जन औषधि की दुकान है। एम्स के मीडिया प्रभारी पंकज श्रीवास्तव ने बताया कि परिसर में जन औषधि की दो दुकानें खोलनी है। अभी एक ही दुकान संचालित हो रही है, जिससे सभी मरीजों को दवा व अन्य उपकरण मिलने में असुविधा होती है। जल्दी ही दूसरी दुकान भी खोल दी जाएगी।



 

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