गोरखपुर: स्कूली बसों के खिलाफ अभिभावक भी दर्ज करा सकेंगे शिकायत, पुलिस अफसर सुनेंगे फरियाद
स्कूलों में जाकर पुलिस ने मांगा ब्योरा, फिटनेस के अलावा ड्राइवर के ट्रेनिंग की भी होगी जांच, पुलिस लाइंस में बैठे पुलिस अफसर सुनेंगे फरियाद, करेंगे कार्रवाई।
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स्कूली बसों, ऑटो चालकों की शिकायत अब अभिभावक सीधे पुलिस के पास दर्ज करा सकेंगे। एसएसपी डॉ. विपिन ताडा ने इस संबंध में अभियान चलाने का आदेश जारी किया है। पहले चरण में पुलिस स्कूलों से संपर्क कर बस की संख्या, नंबर, चालक का नाम और मोबाइल नंबर सहित अन्य ब्योरा जुटा रही है। फिर इसका सत्यापन किया जाएगा।
सोमवार को पुलिस स्कूलों में जाकर प्रबंधक और प्रिंसिपल से संपर्क कर ब्योरा मांगी है। एसएसपी का कहना है कि सत्यापन के बाद पुलिस लाइंस में एक निर्धारित दिन पुलिस अफसर बैठेंगे और अभिभावक अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगे।
जानकारी के मुताबिक, गाजियाबाद में स्कूली बस में एक बच्चे की हादसे में मौत के बाद एसएसपी डॉ. विपिन ताडा ने अभियान चलाने का आदेश किया है। अभियान का नोडल अफसर एसपी ट्रैफिक को बनाया गया है। पुलिस स्कूलों में जाकर एक-एक बस का सत्यापन करेगी। चालक और परिचालक का ड्राइविंग लाइसेंस, मेडिकल फिटनेस, बसों के फिटनेस, पार्किंग की व्यवस्था, ट्रैफिक रूल की ट्रेनिंग चालक ने ली है या नहीं, की जांच करेगी। अब चालक को इन नियमों का ध्यान रखना होगा। अगर ऐसा न किया गया तो चालक और स्कूल प्रबंधक के खिलाफ कार्रवाई होगी।
स्कूली बच्चों को ले जाने वाले ऑटो की भी होगी जांच
एसएसपी ने बताया कि स्कूली बसों के अलावा बच्चों को ले जाने वाले ऑटो की भी जांच होगी। यह देखा जाएगा कि वह बच्चों के हिसाब से तय मानक को पूरा करते है या नहीं।
स्कूल के शिक्षकों, स्टॉफ का चरित्र सत्यापन भी होगा
स्कूल के शिक्षक और स्टॉफ का चरित्र सत्यापन भी किया जाएगा। एसएसपी ने बताया कि कई बार स्कूल के अंदर ही अकाल्पनिक घटनाएं सामने आ जाती है। इसी वजह से स्कूलों में जाकर यह देखा जाएगा कि शिक्षक से लेकर चपरासी तक का चरित्र सत्यापन कराया गया है या नहीं।
इन दस्तावेजों की होगी जांच
- बस, ऑटो का फिटनेस
- स्कूल में पार्किंग
- चालक, परिचालक का हेल्थ सर्टिफिकेट
- चालक का ड्राइविंग लाइसेंस
- चालक ने ट्रैफिक रूल की ट्रेनिंग ली है या नहीं
- बसों, ऑटो में बच्चों की संख्या मानक के मुताबिक है या नहीं
- प्रदूषण सर्टिफिकेट
यह हैं स्कूली बसों के मानक
- - बस 15 वर्ष पुरानी न हो
- - बस में बच्चों की सूची, जन्म, पता व ब्लड ग्रुप लिखा हो
- - खिड़कियों पर रॉड होना चाहिए
- - बस का रूट चार्ट लिखा जाए
- - एक पुरुष और महिला सहायक तैनात हों
- - चालक व सहायक ड्रेस में हों
- - बस का रंग गोल्डन यलो विथ ब्राउन हो
- - अग्निशमन यंत्र बाक्स हो
- - बस पर ऑन ड्यूटी लिखा होना चाहिए
- - बस के पीछे प्रबंधक व प्रधानाचार्य का नंबर होना चाहिए।
- - रफ्तार 40 किमी प्रति घंटा से अधिक न हो
- - गलत साइड में बस नहीं रोकी जानी चाहिए
- - बस, ऑटो में क्षमता से अधिक बच्चों को नहीं बैठाया जाए
- - छात्राओं को लेकर जाने वाली बसों में महिला सहायक होनी चाहिए
अभिभावक रखें इन बातों का ध्यान
- बस खड़ी होने पर ही बच्चों को चढ़ाएं।
- ड्राइवर की हरकतों पर नजर रखें। यह जरूर देखें कि कहीं वह नशे में न हो
- हेल्पर बच्चों को सही से चढ़ता है या नहीं
- इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि बच्चों को बैठने की जगह मिलती है या नहीं
एसएसपी डॉ. विपिन ताडा ने कहा कि स्कूली बसों और ऑटो का सत्यापन किया जाएगा। इसके लिए स्कूल से पुलिस ने संपर्क करना शुरू कर दिया है। सभी की जांच की जाएगी। अभिभावकों के लिए भी अलग से व्यवस्था की जाएगी। ताकि, अगर उन्हें ऑटो, बस या कोई भी स्कूली बच्चों से संबंधित शिकायत करनी हो तो आकर कर सकें। इसके लिए पुलिस लाइंस में एक अफसर मौजूद रहेंगे। जल्द ही इसका दिन निर्धारित कर दिया जाएगा।