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गोरखपुर: क्रय केंद्रों पर नहीं हुई धान खरीद, किसान हुए परेशान

Sun, 02 Jan 2022 02:48 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sun, 02 Jan 2022 02:48 PM IST
सार

यूपी फूड एंड सिविल सप्लाइज इंस्पेक्टर्स, ऑफिसर्स एसोसिएशन के आह्वान पर ठप रही खरीद। समस्याओं का समाधान नहीं होने पर क्रय केंद्र प्रभारियों ने काम ठप किया।

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Paddy not procured at purchasing centers due to stagnation of work of in-charge if problems not resolved
संभागीय खाद्य नियंत्रक कार्यालय के बाहर सभा करते पदाधिकारी। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

यूपी फूड एंड सिविल सप्लाइज इंस्पेक्टर्स, ऑफिसर्स एसोसिएशन के आह्वान पर क्रय केंद्रों पर शनिवार को धान खरीद का काम ठप रहा। इससे पचास क्विंटल से अधिक उपज वाले किसानों को परेशानी हुई। इनको अब धान बेचने के लिए एक सप्ताह का इंतजार करना पड़ेगा।

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क्रय केंद्रों पर आ रही समस्याओं के समाधान के लिए उप्र फूड एंड सिविल सप्लाइज इंस्पेक्टर्स, ऑफिसर्स एसोसिएशन ने संभागीय खाद्य नियंत्रक कार्यालय पर सभा का आयोजन किया। मंडलीय संरक्षक नरसिंह प्रसाद सिंह ने शासन पर धान क्रय की बेजा नीतियां बनाने का आरोप लगाया। दावा किया कि इन नीतियों के कारण क्रय केंद्र प्रभारी और किसान दोनों को परेशानी हो रही है।
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पंजीकृत किसानों को धान बेचने के लिए पहले ऑनलाइन फिर ऑफलाइन और फिर ऑनलाइन टोकन व्यवस्था से असुविधा हो रही है। धान रखने के लिए राइस मिलों को 50 प्रतिशत बोरे देने होते हैं। लेकिन, भुगतान नहीं होने के कारण मिलें बोरे नहीं दे रहीं। क्रय केंद्रों पर खरीदे गए भंडारण की कोई व्यवस्था नहीं है। हर बार धान खरीद में किसान के साथ क्रय केंद्र प्रभारी को भी ईपॉप मशीन पर अंगूठा लगाना पड़ता है।
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कोरोना काल में संक्रमित होने का भय बना रहता है। खरीदे गए धान की भुगतान प्रक्रिया जटिल है। भुगतान नहीं होने पर किसान क्रय केंद्र प्रभारी से विवाद करते हैं। नरसिंह प्रसाद सिंह ने बताया कि शनिवार को एसोसिएशन के प्रदेश स्तर के पदाधिकारियों ने लखनऊ में प्रमुख सचिव से मुलाकात कर समस्याओं से अवगत कराया, जल्द ही समाधान होने की उम्मीद है।

प्रतिदिन औसतन सात हजार क्विंटल होती है खरीद

संभागीय खाद्य नियंत्रक कार्यालय के आंकड़ों के अनुसार प्रतिदिन करीब सात हजार क्विंटल धान की खरीद की जाती है। शनिवार को खरीद ठप रहने से किसानों का करीब सात हजार क्विंटल क्रय केंद्रों के बाहर पड़ा रहा। शुक्रवार-शनिवार को पचास क्विंटल से अधिक उपज वाले किसानों के धान की खरीद किए जाने की व्यवस्था है। क्रय केेंद्र बंद होने के कारण किसानों को निराश लौटना पड़ा।

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