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प्लाट नहीं अब 'फ्लैट' में स्थापित किए जाएंगे कारखाने, जानिए क्या है वजह

Mon, 07 Dec 2020 12:34 PM IST
vivek shukla राजीव रंजन, गोरखपुर।
राजीव रंजन, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Mon, 07 Dec 2020 12:34 PM IST
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Now establish industries in multi-storey buildings at gorakhpur
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला

उद्योगों के लिए लगातार जमीन की मांग बढ़ती जा रही है। वहीं, मांग के अनुरूप जगह नहीं मिल पा रही है। ऐसे में कम भूमि के अधिक इस्तेमाल के नजरिये से बहुमंजिली इमारतें (फ्लैटेड) बनाई जाएंगी। ऐसे भवनों में छोटे-छोटे उद्योगों को स्थापित किया जाएगा। देश के कई शहरों में ऐसा हो रहा है। अब गोरखपुर में भी फ्लैटेड फैक्ट्रियां नजर आ सकती हैं। गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण (गीडा) ने ऐसा मसौदा तैयार किया है।

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दरअसल, गीडा प्रशासन ने जो बिल्डिंग बायलॉज तैयार किया है, उसमें बहुमंजिली इमारतें (फ्लैटेड) बनाने का प्रावधान किया है। शासन से इस बॉयलॉज को स्वीकृति मिलने के बाद फैक्ट्री संचालकों को कारखाना स्थापित करने के लिए फ्लैट वाइज या फ्लोर वाइज स्थान आवंटित किया जा सकेगा।
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गीडा में इस समय तकरीबन साढ़े चार सौ फैक्ट्रियां स्थापित हैं। कई और उद्यमी इस क्षेत्र में उद्योग स्थापित करना चाहते हैं। सैकड़ों की संख्या में उद्यमियों ने गीडा कार्यालय में आवेदन दे रखा है। लेकिन गीडा प्रशासन के सामने प्लाटों की कमी की समस्या है।
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इसी कारण वह उद्यमियों को प्लॉट आवंटित नहीं कर पा रहा है। ऐसे में गीडा प्रशासन ने देश के विभिन्न औद्योगिक इलाकों की तर्ज पर फ्लैटेड (बहुमंजिली या फ्लैट वाइज) कारखाने की योजना तैयार की है। इसे गीडा प्रशासन ने अपने बिल्डिंग बायलॉज में शामिल किया है।


 

प्रदूषण नहीं फैलाने वाली फैक्ट्रियां हो सकती हैं स्थापित

बहुमंजिली योजना के तहत गीडा ऐसे भवनों का निर्माण करा सकता है, जिसके हरेक फ्लोर को फैक्ट्री स्थापित करने के लिए आवंटित किया जा सके। ऐसे भवनों में प्लास्टिक, रेडीमेड, होजरी, गारमेंट्स, लेथ, इलेक्ट्रानिक्स आदि की कंपनियां आसानी से स्थापित हो सकती हैं। हाल ही में चेंबर आफ इंडस्ट्रीज की ओर से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को इस तरह के उद्योगों को स्थापित करने के लिए मांगपत्र दिया गया है।

वर्तमान प्रावधान में सिर्फ एक ही फैक्ट्री हो सकती है स्थापित
गीडा के वर्तमान प्रावधान के अनुसार आवंटित प्लाटों में कोई भी उद्यमी सिर्फ एक फैक्ट्री स्थापित कर सकता है। जरूरत के हिसाब से उद्यमी आवंटित भूमि में से कुछ हिस्से पर फैक्ट्री बना लेता है। ऐसे में काफी जमीन पड़ी रह जाती है। फ्लैटेड फैक्ट्री के प्रावधान के बाद खाली प्लाट पर कोई अन्य फैक्ट्री लगाई जा सकती है।

नासिक, दिल्ली, तीरपुर में विकसित है कांसेप्ट
चेंबर ऑफ इंडस्ट्रीज के पूर्व अध्यक्ष एसके अग्रवाल का कहना है कि फ्लैटेड फैक्ट्री का कांसेप्ट देश के कई शहरों में है। खासकर दिल्ली में यह काफी ज्यादा है। दरअसल, गीडा के कई इलाकों में ऐसे छोटे-छोटे उद्योग हैं, जिन्हें संचालित करने के लिए बड़े स्थान की जरूरत नहीं है। एक हजार वर्ग मीटर से लेकर तीन हजार वर्ग मीटर तक के एरिया में आसानी से एक उद्योग स्थापित हो जाते हैं।

ऐसे में बहुमंजिली इमारतों की हरेक मंजिल पर उद्योग लगाए जा सकते हैं। नीचे का एरिया पार्किंग के लिए और सामानों को लाने ले जाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। भवन में बड़ी क्षमता की लिफ्ट लगाने से आवागमन की सुविधा हो जाती है। गीडा में जमीन की कमी को देखते हुए यह कांसेप्ट उद्योगों को स्थापित करने में काफी सहायक साबित होगा।

गीडा सीईओ संजीव रंजन ने कहा कि बिल्डिंग बॉयलाज में फ्लैटेड फैक्ट्री का प्रावधान किया गया है। इसके तहत कोई भी उद्यमी अपनी आवश्यकता अनुसार तीन-चार मंजिला भवन का निर्माण कर सकता है। समय की जरूरतों को देखते हुए गीडा प्रशासन भी ऐसे भवनों का निर्माण कर उद्यमियों को आवंटित कर सकता है।
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