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गोरखपुर: जिंदा नूर मोहम्मद को विरोधियों से मौत का डर, थाने पहुंच कर लगाई सुरक्षा की गुहार
Wed, 27 Oct 2021 01:55 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Wed, 27 Oct 2021 01:55 PM IST
सार
नूर मोहम्मद को गांव के ही कुछ लोगों ने फर्जी दस्तावेज के आधार पर साल 2008 में मृत घोषित करा दिया था। इन लोगों ने 2008 में हुई चकबंदी में नूर मोहम्मद और उनके भाई का फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र लगाकर उनकी पैतृक जमीन और आवास अपने नाम करा लिया था।
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नूर मोहम्मद
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
गोरखपुर में काफी मशक्कत के बाद सरकारी कागजात में जिंदा हुए नूर मोहम्मद को अब विरोधियों से मौत का डर सता रहा है। कार्रवाई से बौखलाए विरोधियों द्वारा हत्या किए जाने की आशंका व्यक्त करते हुए नूर मोहम्मद ने गीडा थाने में शिकायती पत्र दिया है। पुलिस अधिकारी ने जांच के बाद कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
जानकारी के मुताबिक तहसील क्षेत्र के जैतपुर गौसपुर निवासी नूर मोहम्मद को गांव के ही कुछ लोगों ने फर्जी दस्तावेज के आधार पर साल 2008 में मृत घोषित करा दिया था। इन लोगों ने 2008 में हुई चकबंदी में नूर मोहम्मद और उनके भाई का फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र लगाकर उनकी पैतृक जमीन और आवास अपने नाम करा लिया था। तीस वर्ष बाद गांव लौटे नूर मोहम्मद को फर्जीवाड़े की जानकारी हुई।
अमर उजाला के प्रयास और नूर मोहम्मद की मशक्कत से चकबंदी व राजस्व विभाग के दस्तावेज में उन्हें फिर जिंदा कर दिया गया। इस कारण पुश्तैनी जमीन और आवास का मालिकाना हक मिल गया।
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नूर मोहम्मद को डर सता रहा है कि जमीन और आवास हाथ से निकलने से बौखलाए विपक्षी कहीं उनकी हत्या न कर दें। वह मंगलवार को गीडा थाने पहुंचे और विपक्षियों के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज कराने और सुरक्षा देने की गुहार लगाई। इंस्पेक्टर गीडा विनय कुमार सरोज ने कहा कि नूर मोहम्मद की शिकायत मिली है, इस संबंध में आला अधिकारियों से दिशा निर्देश लेने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
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जानकारी के मुताबिक तहसील क्षेत्र के जैतपुर गौसपुर निवासी नूर मोहम्मद को गांव के ही कुछ लोगों ने फर्जी दस्तावेज के आधार पर साल 2008 में मृत घोषित करा दिया था। इन लोगों ने 2008 में हुई चकबंदी में नूर मोहम्मद और उनके भाई का फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र लगाकर उनकी पैतृक जमीन और आवास अपने नाम करा लिया था। तीस वर्ष बाद गांव लौटे नूर मोहम्मद को फर्जीवाड़े की जानकारी हुई।
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अमर उजाला के प्रयास और नूर मोहम्मद की मशक्कत से चकबंदी व राजस्व विभाग के दस्तावेज में उन्हें फिर जिंदा कर दिया गया। इस कारण पुश्तैनी जमीन और आवास का मालिकाना हक मिल गया।
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नूर मोहम्मद को डर सता रहा है कि जमीन और आवास हाथ से निकलने से बौखलाए विपक्षी कहीं उनकी हत्या न कर दें। वह मंगलवार को गीडा थाने पहुंचे और विपक्षियों के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज कराने और सुरक्षा देने की गुहार लगाई। इंस्पेक्टर गीडा विनय कुमार सरोज ने कहा कि नूर मोहम्मद की शिकायत मिली है, इस संबंध में आला अधिकारियों से दिशा निर्देश लेने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।