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Gorakhpur News: पहले थाने पर हंगामा, शाम को गांव में शव रखकर प्रदर्शन
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गोरखपुर। पिपराइच इलाके के बेला गांव में हुई बालक की हत्या के बाद नाराज ग्रामीणों ने सुबह थाने में हंगामा किया। उन्होंने पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाया। पुलिस ने उन्हें समझाकर वापस भेजा। इसके बाद शाम को पोस्टमॉर्टम के बाद शव जैसे ही गांव में लाया गया परिजन ने जमीन पर रखकर अंतिम संस्कार करने से मना कर प्रदर्शन शुरू कर दिया। काफी देर बाद पुलिस-प्रशासन ने जब उनकी मांगे सुन आश्वासन दिया तब जाकर वे अंतिम संस्कार के लिए तैयार हुए।
परिजन की मांग थी कि सभी आरोपियों को जल्द गिरफ्तार कर उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई हो। परिवार सहित ग्राम सभा के लोगों को जान से मारने की धमकी मिल रही है। उन्हें सुरक्षा की गारंटी दी जाए। बालक के परिवार को 50 लाख रुपये की आर्थिक मदद और किसी एक सदस्य को सरकारी नौकरी मिले। आरोपियों के मकान पर बुलडोजर चले और केस फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाया जाए।
इधर, ग्रामीणों के आक्रोश को देखते हुए गांव में पांच थानों की पुलिस पहुंच गई थी। साथ ही तीन सीओ, एसडीएम, तहसीलदार आदि के अलावा भाजपा नेता राधेश्याम सिंह, प्रमुख पिपराइच जनार्दन जायसवाल, प्रमुख भटहट आदि क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि भी पहुंच गए। सभी ने परिजन को समझाकर अंतिम संस्कार करने के लिए कहा।
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आरोप : छेड़खानी की शिकायत पर पुलिस ने कार्रवाई के बजाय करा दिया था समझौता
परिजन का आरोप था कि मृत बालक की मौसी की लड़की के साथ आरोपियों ने जून में छेड़खानी की थी। इसके बाद छह जून को परिजन ने शिकायत की। आरोप था कि थाने पर पुलिस ने कार्रवाई के बजाय दोनों पक्षों में समझौता करा दिया। इसी के बाद से आरोपी पक्ष से विवाद था। घायल युवक के पिता ने बताया कि 26 जुलाई की शाम उनका बेटा लुहसी विद्यालय के खेल मैदान में दौड़ लगा कर लौट रहा था तभी आरोपियों ने उसका पैर तोड़ने की कोशिश की। ग्रामीणों के हस्तक्षेप से बच गया था। तब भी पुलिस ने समझौता करा दिया।
घटनास्थल के बगल में पुलिस चौकी, कोई नहीं आया मदद करने
शनिवार की रात करीब साढ़े आठ बजे बेला कांटा चौराहे के लुहसी रोड पर एक दुकान में कुछ लोग छिपे थे। दोनों भाई अपनी दुकान पर सोने जा रहे थे। तभी उन्हें घेरकर पिटाई शुरू कर दी। नौ बजे के आसपास आरोपी पक्ष के लोग बड़ी संख्या में पहुंचे और दुकान पर पथराव शुरू कर दिया। बगल में पुलिस चौकी है लेकिन कोई सिपाही बचाव करने नहीं आया। डायल-112 को सूचना देने के एक घंटे बाद पुलिस आई तब तक आरोपी भाग चुके थे।
मां की हो चुकी है मौत, अधिकारी बनने का था ख्वाब
किशोर की मां की मौत बचपन में ही हो गई थी। वह दो भाई और एक बहन में सबसे छोटा था। एक भाई-बहन दूसरी मौसी के यहां रहते हैं। पिता दूसरे प्रदेश में नौकरी करते हैं। वह पिछले पांच साल से वह अपने मौसी के घर रहकर पढ़ाई कर रहा था। परिजन का कहना है कि वह पढ़-लिख कर अधिकारी बनना चाहता था। किशोर की मौत के बाद से परिवार में मातम पसरा हुआ है। परिजन का रो-रोकर बुरा हाल है। आसपास के लोग, रिश्तेदार परिजन को ढांढस बंधाते रहे।
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परिजन की मांग थी कि सभी आरोपियों को जल्द गिरफ्तार कर उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई हो। परिवार सहित ग्राम सभा के लोगों को जान से मारने की धमकी मिल रही है। उन्हें सुरक्षा की गारंटी दी जाए। बालक के परिवार को 50 लाख रुपये की आर्थिक मदद और किसी एक सदस्य को सरकारी नौकरी मिले। आरोपियों के मकान पर बुलडोजर चले और केस फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाया जाए।
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इधर, ग्रामीणों के आक्रोश को देखते हुए गांव में पांच थानों की पुलिस पहुंच गई थी। साथ ही तीन सीओ, एसडीएम, तहसीलदार आदि के अलावा भाजपा नेता राधेश्याम सिंह, प्रमुख पिपराइच जनार्दन जायसवाल, प्रमुख भटहट आदि क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि भी पहुंच गए। सभी ने परिजन को समझाकर अंतिम संस्कार करने के लिए कहा।
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आरोप : छेड़खानी की शिकायत पर पुलिस ने कार्रवाई के बजाय करा दिया था समझौता
परिजन का आरोप था कि मृत बालक की मौसी की लड़की के साथ आरोपियों ने जून में छेड़खानी की थी। इसके बाद छह जून को परिजन ने शिकायत की। आरोप था कि थाने पर पुलिस ने कार्रवाई के बजाय दोनों पक्षों में समझौता करा दिया। इसी के बाद से आरोपी पक्ष से विवाद था। घायल युवक के पिता ने बताया कि 26 जुलाई की शाम उनका बेटा लुहसी विद्यालय के खेल मैदान में दौड़ लगा कर लौट रहा था तभी आरोपियों ने उसका पैर तोड़ने की कोशिश की। ग्रामीणों के हस्तक्षेप से बच गया था। तब भी पुलिस ने समझौता करा दिया।
घटनास्थल के बगल में पुलिस चौकी, कोई नहीं आया मदद करने
शनिवार की रात करीब साढ़े आठ बजे बेला कांटा चौराहे के लुहसी रोड पर एक दुकान में कुछ लोग छिपे थे। दोनों भाई अपनी दुकान पर सोने जा रहे थे। तभी उन्हें घेरकर पिटाई शुरू कर दी। नौ बजे के आसपास आरोपी पक्ष के लोग बड़ी संख्या में पहुंचे और दुकान पर पथराव शुरू कर दिया। बगल में पुलिस चौकी है लेकिन कोई सिपाही बचाव करने नहीं आया। डायल-112 को सूचना देने के एक घंटे बाद पुलिस आई तब तक आरोपी भाग चुके थे।
मां की हो चुकी है मौत, अधिकारी बनने का था ख्वाब
किशोर की मां की मौत बचपन में ही हो गई थी। वह दो भाई और एक बहन में सबसे छोटा था। एक भाई-बहन दूसरी मौसी के यहां रहते हैं। पिता दूसरे प्रदेश में नौकरी करते हैं। वह पिछले पांच साल से वह अपने मौसी के घर रहकर पढ़ाई कर रहा था। परिजन का कहना है कि वह पढ़-लिख कर अधिकारी बनना चाहता था। किशोर की मौत के बाद से परिवार में मातम पसरा हुआ है। परिजन का रो-रोकर बुरा हाल है। आसपास के लोग, रिश्तेदार परिजन को ढांढस बंधाते रहे।