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बच्चों को मनोरंजन के साथ सीख भी देंगी किताबें, जानिए कैसे
Mon, 14 Dec 2020 05:14 PM IST
vivek shukla
विवेक सिंह, गोरखपुर।
विवेक सिंह, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Mon, 14 Dec 2020 05:14 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर।
- फोटो : पीटीआई
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परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले नौनिहालों को जल्द ही चंदू चाट, गिल्ली डंडा, झूला और भारी कौन सरीखी कहानियां पढ़ने को मिलेंगी। कहानियों की किताबों से जहां बच्चों का मनोरंजन होगा, वहीं उन्हें कई तरह की सीख भी मिलेगी। सर्व शिक्षा अभियान के तहत जल्द ही इन किताबों को परिषदीय विद्यालयों के पुस्तकालयों में जगह मिलेगी।
राज्य परियोजना निदेशक के निर्देश पर जिले में विद्यालयों के लिए 56 टन किताबों की खरीदारी एनसीईआरटी से की गई है। दिसंबर के आखिरी सप्ताह तक किताबों की खेप दिल्ली से जिले में पहुंच जाएगी। परिषदीय विद्यालयों की लाइब्रेरी को समृद्ध बनाने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग कई तरह के प्रयास कर रहा है।
प्राइमरी विद्यालयों को पांच हजार तो जूनियर विद्यालयों को दस हजार रुपये इस मद में खर्च करने के लिए आवंटित किए गए हैं। इसके बावजूद सभी विद्यालयों में लाइब्रेरी कॉर्नर नहीं बनाए जा सके हैं। जहां पुस्तकालय बने हैं वहां पर कविता, कहानी, सामान्य ज्ञान समेत अन्य किताबें नामांकित बच्चों के सापेक्ष उपलब्ध नहीं हो सकी हैं।
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इसके बाद विभाग ने एनसीईआरटी से सीधे किताबें खरीदने की योजना बनाई। सभी जिलों से प्राइमरी, उच्च प्राथमिक विद्यालयों के विद्यार्थियों के लिए किताबों के संबंध में सुझाव मांगा गया। सुझावों के आधार पर प्रदेश स्तर पर एक मुश्त किताबों की खरीदारी हुई। इस कड़ी में गोरखपुर जिले के लिए 56 टन किताबें खरीदी गईं हैं।
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राज्य परियोजना निदेशक के निर्देश पर जिले में विद्यालयों के लिए 56 टन किताबों की खरीदारी एनसीईआरटी से की गई है। दिसंबर के आखिरी सप्ताह तक किताबों की खेप दिल्ली से जिले में पहुंच जाएगी। परिषदीय विद्यालयों की लाइब्रेरी को समृद्ध बनाने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग कई तरह के प्रयास कर रहा है।
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प्राइमरी विद्यालयों को पांच हजार तो जूनियर विद्यालयों को दस हजार रुपये इस मद में खर्च करने के लिए आवंटित किए गए हैं। इसके बावजूद सभी विद्यालयों में लाइब्रेरी कॉर्नर नहीं बनाए जा सके हैं। जहां पुस्तकालय बने हैं वहां पर कविता, कहानी, सामान्य ज्ञान समेत अन्य किताबें नामांकित बच्चों के सापेक्ष उपलब्ध नहीं हो सकी हैं।
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इसके बाद विभाग ने एनसीईआरटी से सीधे किताबें खरीदने की योजना बनाई। सभी जिलों से प्राइमरी, उच्च प्राथमिक विद्यालयों के विद्यार्थियों के लिए किताबों के संबंध में सुझाव मांगा गया। सुझावों के आधार पर प्रदेश स्तर पर एक मुश्त किताबों की खरीदारी हुई। इस कड़ी में गोरखपुर जिले के लिए 56 टन किताबें खरीदी गईं हैं।
253 तरह की हैं बालोपयोगी किताबें
एनसीईआरटी की ओर से भेजी जाने वाली किताबें 253 प्रकार की हैं। प्राइमरी के विद्यार्थियों के लिए 80, उच्च प्राथमिक विद्यालयों के लिए 97 और कंपोजिट विद्यालयों के लिए 76 किस्म की किताबें जिले को मिलेंगी। किताबों की सप्लाई दिवाली से पूर्व होने की उम्मीद थी, मगर ट्रांसपोर्टेशन के अभाव में ऐसा नहीं हो सका। इसके बाद 69 हजार शिक्षकों की नियुक्ति की वजह से किताबों को नहीं मंगाया जा सका। अब विभाग ने किताबों को मंगाने के लिए एक कर्मचारी को दिल्ली रवाना करने की योजना बनाई है।
इन कहानियों को पढ़ेंगे बच्चे
चंदू चाट, चलो सर्कस खेलें, भारी कौन, पकवान, गिल्ली-डंडा, घर की खोज, झूला, लैंड स्लाइड, मेरा घर, डोला, हैल्लो रेन, नॉक-नॉक, खोजे हुए प्रश्न, कहो कहानी समेत अन्य किताबें।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी बीएन सिंह ने बताया कि राज्य परियोजना निदेशक के निर्देश पर एनसीईआरटी की ओर से जिले के परिषदीय विद्यालयों के लिए 56 टन किताबों की खरीदारी की गई है। किताबों की खेप को जिले में मंगाने की कवायद शुरू हो गई है। जल्द ही ब्लॉक संसाधन केंद्रों के माध्यम से विद्यालयों तक किताबों को भेजा जाएगा।
इन कहानियों को पढ़ेंगे बच्चे
चंदू चाट, चलो सर्कस खेलें, भारी कौन, पकवान, गिल्ली-डंडा, घर की खोज, झूला, लैंड स्लाइड, मेरा घर, डोला, हैल्लो रेन, नॉक-नॉक, खोजे हुए प्रश्न, कहो कहानी समेत अन्य किताबें।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी बीएन सिंह ने बताया कि राज्य परियोजना निदेशक के निर्देश पर एनसीईआरटी की ओर से जिले के परिषदीय विद्यालयों के लिए 56 टन किताबों की खरीदारी की गई है। किताबों की खेप को जिले में मंगाने की कवायद शुरू हो गई है। जल्द ही ब्लॉक संसाधन केंद्रों के माध्यम से विद्यालयों तक किताबों को भेजा जाएगा।