राष्ट्रीय सुरक्षित मातृत्व दिवस: उच्च जोखिम गर्भावस्था में डॉक्टर या फिर आशा की लें मदद
सीएमओ डॉ. आशुतोष कुमार दुबे ने कहा कि सुरक्षित प्रसव करवाने के लिए सरकार कई योजनाएं संचालित कर रही हैं। इनमें आशा कार्यकर्ता की भूमिका अहम है। प्रत्येक परिवार का दायित्व है कि अगर उनके घर में गर्भवती हैं, तो आशा कार्यकर्ता की बात मान कर स्वास्थ्य सेवाओं का निशुल्क लाभ लें।
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गोरखपुर जिले के खोराबार ब्लॉक के सेमरा देवी गांव की शिल्पा (28) का सुरक्षित प्रसव न हो पाता, अगर उनके परिवार ने आशा कार्यकर्ता की मदद न ली होती। शायद जच्चा-बच्चा के जीवन को भी संकट हो जाता, क्योंकि शिल्पा उच्च जोखिम गर्भावस्था (एचआरपी) की स्थिति में थीं।
नर्वदा बताती हैं कि उनकी बहू शिल्पा को एचआरपी गर्भावस्था की जानकारी नहीं थी। जब प्रसव पीड़ा हुई, तब आशा कार्यकर्ता सेवाती देवी, बहू को लेकर जिला महिला अस्पताल गईं, जहां जांच के बाद पता चला कि प्रसव के लिए शिल्पा को मेडिकल कॉलेज लेकर जाना पड़ेगा। मेडिकल कॉलेज में प्रसव के बाद एक माह तक बच्चे को न्यूनेटल इंटेशिव केयर यूनिट (एनआईसीयू) में रखा गया। स्वस्थ होने के बाद मां-बच्चे को घर लाया गया। अब दोनों स्वस्थ हैं।
सेवाती ने बताया कि छठे महीने के बाद गर्भावस्था के बारे में शिल्पा ने उन्हें बताया था। वह कई बार प्रयास कीं कि प्रसव पूर्व जांच करवाई जाए, लेकिन शिल्पा के पति अस्पताल ले जाने को तैयार नहीं हुए। जब प्रसव पीड़ा हुई तो उनके परिवार ने खुद संपर्क किया। जांच में हीमोग्लोबिन नौ ग्राम निकला। शिल्पा के तीन बच्चे पहले से थे। मेडिकल कॉलेज में चौथे बच्चे के लिए सीजेरियन पद्धति अपनाई गई और उसी समय परिवार को समझा कर शिल्पा की नसबंदी करवा दी गई।
यह सुविधाएं निशुल्क
सीएमओ डॉ. आशुतोष कुमार दूबे ने बताया कि अस्पतालों में जांच निशुल्क उपलब्ध है। पहली बार गर्भवती होने पर महिला को तीन किस्तों में प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत 5,000 रुपये पोषण के लिए दिए जाते हैं। जननी सुरक्षा योजना (जेएसवाई) के तहत अस्पताल में संस्थागत प्रसव करवाने पर शहरी क्षेत्र की महिला को 1,000 और ग्रामीण महिला को 1,400 रुपये खाते में देने का प्रावधान है। जननी शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रम (जेएसएसके) के तहत गर्भवती को घर से अस्पताल लाने और अस्पताल से घर जाने, 48 घंटे तक भर्ती रखने के दौरान भोजन, इलाज, दवाओं की सुविधा निशुल्क है।
इतने लोगों को मिला लाभ
- वित्तीय वर्ष 2021-22 में सरकारी अस्पतालों में 55,010 संस्थागत प्रसव हुए हैं।
- अब तक 98,997 गर्भवती का प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना लाभ देने के लिए पंजीकरण किया गया।
- पीएमएसएमए दिवस अभियान के तहत 31,110 गर्भवती की निशुल्क प्रसव पूर्व जांच हुई है।
सीएमओ डॉ. आशुतोष कुमार दुबे ने कहा कि सुरक्षित प्रसव करवाने के लिए सरकार कई योजनाएं संचालित कर रही हैं। इनमें आशा कार्यकर्ता की भूमिका अहम है। प्रत्येक परिवार का दायित्व है कि अगर उनके घर में गर्भवती हैं, तो आशा कार्यकर्ता की बात मान कर स्वास्थ्य सेवाओं का निशुल्क लाभ लें। आशा कार्यकर्ता के जरिये सरकारी अस्पतालों से समस्त निशुल्क स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त की जा सकती हैं।