Diwali 2023: नरक चतुर्दशी आज, मनाई जाएगी छोटी दिवाली
ज्योतिषाचार्य डॉ. जोखन पांडेय शास्त्री के अनुसार, पहली मान्यता यह है कि भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर को इसी दिन मारकर धरती वासियों को भय से मुक्ति दिलाई थी। इसी खुशी में उत्सव मनाया जाता है और दीपमालाएं आयोजित होती हैं।
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दिवाली महापर्व के दूसरे दिन शनिवार को नरक चतुर्दशी और छोटी दिवाली मनाई जाएगी। मान्यता है कि इस दिन सूर्योदय से पहले उठकर शरीर पर तेल या उबटन लगाकर मालिश करने के बाद स्नान करना चाहिए। विधि-विधान से मृत्यु के देवता यमराज की पूजा करनी चाहिए। इस दिन शाम को दीपदान किया जाता है।
वाराणसी से प्रकाशित हृषीकेश पंचांग के अनुसार, इस दिन त्रयोदशी तिथि का मान दिन में एक बजकर 14 मिनट तक, पश्चात कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी और चित्रा नक्षत्र संपूर्ण दिन और रात को दो बजकर छह मिनट तक है। अनन्तर स्वाती नक्षत्र और काण नामक औदायिक योग भी है।
ऐसे करें दीपदान: पंडित शरद चंद्र मिश्र के अनसार, छोटी दिवाली के दिन घर के सबसे बड़े सदस्य को यम के नाम का एक बड़ा दीपक जलाना चाहिए। इसके बाद उस दीये को पूरे घर में घुमाना चाहिए। फिर घर के बाहर जाकर उस दीये को कहीं दूर रख देना चाहिए। इस दौरान घर के दूसरे सदस्य घर में ही रहें और इस दीपक को न देखें।
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पौराणिक मान्यताएं
ज्योतिषाचार्य डॉ. जोखन पांडेय शास्त्री के अनुसार, पहली मान्यता यह है कि भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर को इसी दिन मारकर धरती वासियों को भय से मुक्ति दिलाई थी। इसी खुशी में उत्सव मनाया जाता है और दीपमालाएं आयोजित होती हैं। इसी कारण इसे छोटी दिवाली कहते हैं।
ये है महत्व
ज्योतिर्विद पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, धन की देवी लक्ष्मी उसी घर में आती हैं, जहां सुंदरता और पवित्रता होती है। नरक चतुर्थी के दिन घर में सफाई जरूर करनी चाहिए। घर में किसी प्रकार का टूटा हुआ सजावटी सामान, बेकार फर्नीचर व अन्य उपयोग में न आने वाली वस्तुओं को यमराज का नरक माना जाता है। इसलिए इन्हें इस दिन घर से बाहर कर देना चाहिए। इस दिन सूर्योदय से पहले तेल और उबटन लगाकर स्नान करने का विधान है। प्रातः स्नान से सौंदर्य की प्राप्ति होती है और शरीर में दिव्य शक्ति का संचार होता है। कई प्रकार के रोगों से छुटकारा भी मिलता है।
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पंडालों में स्थापित हुई मां लक्ष्मी की प्रतिमाएं
महानगर की लक्ष्मी पूजा समितियों की ओर से विभिन्न मुहल्लों में बनाए गए पंडालों में शुक्रवार को मां लक्ष्मी की प्रतिमाएं स्थापित की गई। माता के पट शनिवार छोटी दिवाली के दिन विधि-विधान से पूजन-अर्चन के साथ भक्तों के लिए खोले जाएंगे। वहीं कुछ जगहों पर शुक्रवार को प्रतिमा स्थापना के साथ ही माता के पट खोल दिए गए। महानगर के माया बाजार, घंटाघर, बक्शीपुर, आर्यनगर, हुमायूंपुर, जाफरा बाजार, मोहद्दीपुर, निजामपुर, घासीकटरा, विष्णुपुरम, राप्तीनगर आदि जगहों पर माता के पंडाल बनाए गए हैं।
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धन के देवता कुबेर की हुई पूजा-अर्चना
गोरखपुर। छह दिवसीय दिवाली महापर्व की शुरुआत शुक्रवार को धनतेरस से हो गई। धनतेरस पर लोगों ने शाम के शुभ मुहूर्त में लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां खरीदी और घरों में दीप जलाकर धन के देवता कुबेर का पूजन-अर्चन किया। घर और बाजार सतरंगी रौशनी से जगमगा उठे। बच्चों ने पटाखे भी जलाए।आयुर्वेद के देवता भगवान धनवंतरि की विधि-विधान से पूजा अर्चना की गई। धर्मशाला बाजार में धनवंतरि जयंती पर वैद्य राजीव सिंहा ने कहा की धनवंतरि एक सम्राट, एक राजनीतिज्ञ व एक कर्मवीर थे, किंतु सबसे बढ़कर वे एक प्राणाचार्य थे। स्वर्ग के बाद इस आर्यावर्त में आयुर्वेद को प्राण प्रतिष्ठा देने वालों में वे अग्रणी थे। इस अवसर पर डॉक्टर निरंकार लाल, अमरेंद्र, दीप्तिमान, डॉ. अरुण कुमार आदि मौजूद रहे।