{"_id":"612558d48ebc3e7a191caf29","slug":"nafed-will-not-be-able-to-buy-even-paddy-in-up-gorakhpur-city-news-gkp4066436114","type":"story","status":"publish","title_hn":"यूपी में धान भी नहीं खरीद सकेगा नेफेड","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
यूपी में धान भी नहीं खरीद सकेगा नेफेड
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
यूपी में धान भी नहीं खरीद सकेगा नेफेड
गोरखपुर। नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (नेफेड) को यूपी में धान खरीद की अनुमति भी नहीं मिली है। इससे पहले गेहूं खरीद की अनुमति नहीं दी गई थी। इसका खामियाजा नेफेड से जुड़े गोरखपुर-बस्ती मंडल सहित यूपी के किसानों व खरीद एजेंसियों को भुगतना पड़ा है। धान खरीद पर रोक के लिए नेफेड के क्षेत्रीय अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया गया है।
नेफेड की तरफ से गोरखपुर-बस्ती मंडल में फसलों की खरीद की जाती थी। सातों जिलों में खरीद केंद्र बनते थे लेकिन नेफेड की लखनऊ शाखा की हीलाहवाली से मामला लटक गया। दरअसल, पिछले वित्तीय वर्ष में धान खरीद की गई थी लेकिन कानपुर के किसानों का दस करोड़ रुपये से ज्यादा का भुगतान रोक दिया गया। एक एजेंसी खरीदारी करके चली गई और किसानों के भुगतान फंस गए। इसका संज्ञान शासन ने लिया है। खाद्य एवं रसद विभाग ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये समीक्षा भी की है। इसमें गोरखपुर के क्षेत्रीय खाद्य वितरण अधिकारी आरके पांडेय को शामिल किया गया।
क्षेत्रीय खाद्य वितरण अधिकारी ने बताया कि वीडियो कांफ्रेंसिंग में नेफेड लखनऊ के शाखा प्रबंधक विजय शर्मा को तलब किया गया था। खाद्य एवं रसद आयुक्त ने साफ कहा था कि कानपुर में किसानों की बकाएदारी जल्द खत्म कराई जाए। जिस खरीद एजेंसी ने भुगतान रोका है, उसके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। इसका अनुपालन नहीं किया गया। शाखा प्रबंधक की तरफ से रिपोर्ट भी नहीं भेजी गई। लिहाजा, शासन स्तर से गेहूं खरीद की अनुमति नहीं दी गई। अब धान खरीद पर भी रोक लगा दी गई है। अगर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो नेफेड से जुड़े किसान, खरीद एजेंसियों की मुश्किल और बढ़ेगी।
विज्ञापन
खरीद एजेंसियों का भुगतान भी रोका
कानपुर की एजेंसी को बचाने के लिए यूपी के सभी जिलों में खरीद करने वाली एजेंसियों के भुगतान रोक दिए गए हैं। इसमें देवरिया की एजेंसी भी शामिल है। कमीशन तक नहीं दिए जा रहे हैं। क्षेत्रीय कार्यालय से एजेंसी संचालकों को लगातार पत्र लिखा जा रहा है। कहा जा रहा है कि कमीशन न लेने का सहमति पत्र दिया जाए। कानपुर का मामला ठीक होने के बाद भुगतान की व्यवस्था सुनिश्चित कराई जाएगी। कई खरीद एजेंसियों से सहमति पत्र लिया जा चुका है। यही नहीं, खरीद एजेंसियों ने जिस बोरे का इस्तेमाल किया था, उसका भुगतान भी रोका गया है। इससे समिति संचालकों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। गोरखपुर-बस्ती मंडल के कुछ एजेंसी संचालकों ने इस मामले की शिकायत सीएम कैंप कार्यालय में भी की है।
----------
शासन की तरफ से गेहूं के बाद धान खरीद की अनुमति नहीं दी गई है। कानपुर के किसानों का भुगतान कराया जा रहा है। एक करोड़ रुपये का भुगतान जल्द ही किया गया है। बाकी देनदारी भी खत्म की जाएगी। सिर्फ एक जगह के भुगतान पर काम रोकना ठीक नहीं है। शासन से पत्राचार किया जा रहा है। गोरखपुर-बस्ती मंडल में खरीद के छोटे-छोटे केंद्र बनाए गए थे। एजेंसियों का भुगतान रोकने का आरोप निराधार है। सबका भुगतान कराया जा रहा है। जिस एजेंसी को ज्यादा दिक्कत है, वह दूसरे संस्था से जुड़कर काम कर सकती है। किसी को जबरदस्ती नहीं रोका गया है।
विजय शर्मा, शाखा प्रबंधक, नेफेड- लखनऊ
विज्ञापन
गोरखपुर। नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (नेफेड) को यूपी में धान खरीद की अनुमति भी नहीं मिली है। इससे पहले गेहूं खरीद की अनुमति नहीं दी गई थी। इसका खामियाजा नेफेड से जुड़े गोरखपुर-बस्ती मंडल सहित यूपी के किसानों व खरीद एजेंसियों को भुगतना पड़ा है। धान खरीद पर रोक के लिए नेफेड के क्षेत्रीय अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया गया है।
नेफेड की तरफ से गोरखपुर-बस्ती मंडल में फसलों की खरीद की जाती थी। सातों जिलों में खरीद केंद्र बनते थे लेकिन नेफेड की लखनऊ शाखा की हीलाहवाली से मामला लटक गया। दरअसल, पिछले वित्तीय वर्ष में धान खरीद की गई थी लेकिन कानपुर के किसानों का दस करोड़ रुपये से ज्यादा का भुगतान रोक दिया गया। एक एजेंसी खरीदारी करके चली गई और किसानों के भुगतान फंस गए। इसका संज्ञान शासन ने लिया है। खाद्य एवं रसद विभाग ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये समीक्षा भी की है। इसमें गोरखपुर के क्षेत्रीय खाद्य वितरण अधिकारी आरके पांडेय को शामिल किया गया।
विज्ञापन
क्षेत्रीय खाद्य वितरण अधिकारी ने बताया कि वीडियो कांफ्रेंसिंग में नेफेड लखनऊ के शाखा प्रबंधक विजय शर्मा को तलब किया गया था। खाद्य एवं रसद आयुक्त ने साफ कहा था कि कानपुर में किसानों की बकाएदारी जल्द खत्म कराई जाए। जिस खरीद एजेंसी ने भुगतान रोका है, उसके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। इसका अनुपालन नहीं किया गया। शाखा प्रबंधक की तरफ से रिपोर्ट भी नहीं भेजी गई। लिहाजा, शासन स्तर से गेहूं खरीद की अनुमति नहीं दी गई। अब धान खरीद पर भी रोक लगा दी गई है। अगर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो नेफेड से जुड़े किसान, खरीद एजेंसियों की मुश्किल और बढ़ेगी।
विज्ञापन
खरीद एजेंसियों का भुगतान भी रोका
कानपुर की एजेंसी को बचाने के लिए यूपी के सभी जिलों में खरीद करने वाली एजेंसियों के भुगतान रोक दिए गए हैं। इसमें देवरिया की एजेंसी भी शामिल है। कमीशन तक नहीं दिए जा रहे हैं। क्षेत्रीय कार्यालय से एजेंसी संचालकों को लगातार पत्र लिखा जा रहा है। कहा जा रहा है कि कमीशन न लेने का सहमति पत्र दिया जाए। कानपुर का मामला ठीक होने के बाद भुगतान की व्यवस्था सुनिश्चित कराई जाएगी। कई खरीद एजेंसियों से सहमति पत्र लिया जा चुका है। यही नहीं, खरीद एजेंसियों ने जिस बोरे का इस्तेमाल किया था, उसका भुगतान भी रोका गया है। इससे समिति संचालकों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। गोरखपुर-बस्ती मंडल के कुछ एजेंसी संचालकों ने इस मामले की शिकायत सीएम कैंप कार्यालय में भी की है।
----------
शासन की तरफ से गेहूं के बाद धान खरीद की अनुमति नहीं दी गई है। कानपुर के किसानों का भुगतान कराया जा रहा है। एक करोड़ रुपये का भुगतान जल्द ही किया गया है। बाकी देनदारी भी खत्म की जाएगी। सिर्फ एक जगह के भुगतान पर काम रोकना ठीक नहीं है। शासन से पत्राचार किया जा रहा है। गोरखपुर-बस्ती मंडल में खरीद के छोटे-छोटे केंद्र बनाए गए थे। एजेंसियों का भुगतान रोकने का आरोप निराधार है। सबका भुगतान कराया जा रहा है। जिस एजेंसी को ज्यादा दिक्कत है, वह दूसरे संस्था से जुड़कर काम कर सकती है। किसी को जबरदस्ती नहीं रोका गया है।
विजय शर्मा, शाखा प्रबंधक, नेफेड- लखनऊ