फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   Muslim society said marriage with non Muslims illegitimate in Shariat

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के कार्यवाहक महासचिव का बयान पर उलेमाओं ने रखे विचार: गैर मुस्लिम से निकाह शरीअत में नाजायज

Sat, 07 Aug 2021 02:25 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sat, 07 Aug 2021 02:25 PM IST
सार

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के कार्यवाहक महासचिव के बयान पर मुस्लिम समाज के लोगों ने रखे विचार

 

विज्ञापन
Muslim society said marriage with non Muslims illegitimate in Shariat
डॉ. अशफाक अहमद, फर्रुख जमाल व मुफ्ती मो. अजहर शम्सी। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

मुस्लिम युवक-युवतियों के गैर मुस्लिमों से निकाह को शरीअत की नजर में नाजायज होने के मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के फैसले को गोरखपुर शहर का संभ्रांत मुस्लिम समाज और उलेमा भी जायज ठहरा रहे हैं। उलेमाओं को यह इसलिए नाजायज लगता है कि इससे शरीअत की व्यवस्था बिगड़ती है, जबकि बुद्धिजीवी वर्ग इस तरह की शादी से भविष्य में पैदा होने वाली सामाजिक जटिलताओं के प्रति चिंतित नजर आया। मालूम हो कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के कार्यवाहक महासचिव मौलाना खालिद सैफुल्लाह रहमानी ने बृहस्पतिवार को इस संबंध में बयान जारी किया था। उनके मुताबिक मुस्लिम लड़कों को मुस्लिम लड़कियों से ही निकाह करना चाहिए। मुस्लिम लड़के या लड़की की किसी मुशरिक (ईश्वर के सापेक्ष दूसरे को शरीक करने वाला) से निकाह शरीअत के अनुसार वैध नहीं है।
विज्ञापन

 
नायब काजी मुफ्ती मो. अजहर शम्सी ने बताया कि शरीअत इस्लाम के अनुयायियों के लिए जीवन जीने की गाइडलाइन है। शरीअत में साफ किया गया है कि मुस्लिम लड़के या लड़की को मुस्लिम लड़की या लड़के से ही निकाह करना चाहिए।
विज्ञापन

 
लेखक फर्रुख जमाल ने बताया कि बात मुस्लिम-गैर मुस्लिम की नहीं है। दो धर्म के अनुयायियों के बीच होने वाले विवाह में सामाजिक जटिलताएं बहुत होती हैं। भारतीय समाज धार्मिक-सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ा है। इस तरह के विवाह तो आसानी से हो जाते हैं, लेकिन इसका खामियाजा उनकी संतानों को भुगतना पड़ता है। इन संतानों के लिए रिश्ते मिलना मुश्किल होता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

 
डॉ. अशफाक अहमद उमर ने बताया कि शरीअत अपनी जगह है, अभी भारतीय कानून में दो धर्म युवक-युवतियों के अधिकारों के बारे में कुछ तय नहीं है। हिंदू लॉ के अनुसार यदि किसी हिंदू युवक से किसी मुस्लिम लड़की का विवाह होता है तो पति की मौत होने पर उस लड़की का ससुराल की संपत्ति पर कोई अधिकार नहीं रह जाएगा। सभी धर्म में अच्छे लड़के लड़कियां हैं, बेहतर है कि अपने ही धर्म में शादी या निकाह किया जाए।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed