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एमएमएमयूटी: विद्यार्थी ऑनलाइन पढ़ सकेंगे लाइब्रेरी की किताबें, जानिए कैसे
Mon, 28 Dec 2020 01:47 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 28 Dec 2020 01:47 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला।
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मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी) की लाइब्रेरी अब ऑनलाइन होगी। इसके जरिए विद्यार्थी अब घर में रहकर भी लाइब्रेरी की किताबें पढ़ सकेंगे। विश्वविद्यालय प्रशासन ने आटोमाइजेशन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। ई-बुक हासिल करने के लिए संबंधित प्रकाशन से संपर्क साधा है। जल्द ही ई-बुक्स विश्वविद्यालय को मिल जाएंगी।
दरअसल, कोविड प्रोटोकाल के पालन के क्रम मेें विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को इन दिनों ऑनलाइन पढ़ाया जा रहा है। मुश्किल यह है कि परिसर में मौजूद लाइब्रेरी की किताबें उन्हें हासिल नहीं हो पा रहीं हैं। समस्या के मद्देनजर विश्वविद्यालय प्रशासन ने लाइब्रेरी को डिजिटल बनाने का निर्णय लिया है।
वर्ष की पहली छमाही में छात्रों को डिजिटल लाइब्रेरी की सुविधा उपलब्ध कराने की तैयारी है। इसके लिए विद्यार्थियों का लाइब्रेरी से यूजर आइडी और पासवर्ड उपलब्ध कराया जाएगा। विश्वविद्यालय प्रशासन के मुताबिक अब तक ई-बुक्स पर 22 लाख रुपये खर्च किए जा चुके हैं।
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शोधगंगा पर अपलोड होंगे शोध
प्रशासन के निर्णय के मुताबिक विश्वविद्यालय के शोध अब शोधगंगा भारत पोर्टल पर अपलोड किए जाएंगे। इससे यहां के शोध की ऑनलाइन उपलब्धता हो जाएगी, जिसका लाभ दुनिया भर के शोधार्थी और विद्यार्थी उठा सकेंगे।
कुलपति प्रो. जेपी पांडेय ने बताया कि कोरोना के समय में डिजिटल लाइब्रेरी की जरूरत बढ़ गई है। लाइब्रेरी को डिजिटल बनाया जा रहा है। पूरी कोशिश है कि जल्द से जल्द डिजिटल लाइब्रेरी छात्रों के लिए उपलब्ध हो जाए। विश्वविद्यालय में होने वाले शोध की व्यापक स्वीकार्यता के लिए सभी शोधों को शोधगंगा भारत से जोड़ा जाएगा।
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दरअसल, कोविड प्रोटोकाल के पालन के क्रम मेें विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को इन दिनों ऑनलाइन पढ़ाया जा रहा है। मुश्किल यह है कि परिसर में मौजूद लाइब्रेरी की किताबें उन्हें हासिल नहीं हो पा रहीं हैं। समस्या के मद्देनजर विश्वविद्यालय प्रशासन ने लाइब्रेरी को डिजिटल बनाने का निर्णय लिया है।
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वर्ष की पहली छमाही में छात्रों को डिजिटल लाइब्रेरी की सुविधा उपलब्ध कराने की तैयारी है। इसके लिए विद्यार्थियों का लाइब्रेरी से यूजर आइडी और पासवर्ड उपलब्ध कराया जाएगा। विश्वविद्यालय प्रशासन के मुताबिक अब तक ई-बुक्स पर 22 लाख रुपये खर्च किए जा चुके हैं।
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शोधगंगा पर अपलोड होंगे शोध
प्रशासन के निर्णय के मुताबिक विश्वविद्यालय के शोध अब शोधगंगा भारत पोर्टल पर अपलोड किए जाएंगे। इससे यहां के शोध की ऑनलाइन उपलब्धता हो जाएगी, जिसका लाभ दुनिया भर के शोधार्थी और विद्यार्थी उठा सकेंगे।
कुलपति प्रो. जेपी पांडेय ने बताया कि कोरोना के समय में डिजिटल लाइब्रेरी की जरूरत बढ़ गई है। लाइब्रेरी को डिजिटल बनाया जा रहा है। पूरी कोशिश है कि जल्द से जल्द डिजिटल लाइब्रेरी छात्रों के लिए उपलब्ध हो जाए। विश्वविद्यालय में होने वाले शोध की व्यापक स्वीकार्यता के लिए सभी शोधों को शोधगंगा भारत से जोड़ा जाएगा।