टॉपर की कहानी: एकांश को मिला 42 लाख रुपये का पैकेज, उसका एक ही सपना- पिता की आंखों की रोशनी लौटाना
एकांश ने बताया कि उनके पिता की मधुमेह की बीमारी से आंख की रोशनी चली गई है। उनकी आंख की रोशनी लाना उनकी प्राथमिकता में है। अभी तक पीलीभीत में ही पिता का इलाज करा रहे थे। अब चेन्नई में इलाज कराएंगे।
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मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी) में बीटेक आईटी इंजीनियरिंग के टॉपर एकांश सक्सेना को आठवें दीक्षांत समारोह में राज्यपाल के हाथों स्वर्ण पदक मिला है। इस ऐतिहासिक पल की साक्षी उनकी मां और बहन भी बनीं। पढ़ाई में होनहार एकांश का कैंपस सेलेक्शन एक्सपीडिया ग्रुप ऑफ कंपनीज में 42 लाख रुपये सालाना पैकेज पर हुआ है। एकांश अब अपने पिता की आंखों की रोशनी लाने में जुटे हैं। उनके पिता की बीमारी से आंखों की रोशनी चली गई है।
पीलीभीत जिले के पुरनपुर क्षेत्र के रहने वाले एकांश सक्सेना ने यह उपलब्धि विपरीत परिस्थितियों में हासिल की है। उनके पिता सुभाष सक्सेना की मधुमेह बीमारी के चलते आंख की रोशनी चली गई। तीन भाइयों में सबसे छोटे एकांश को पढ़ाने के लिए मां अर्चना सक्सेना ने एक प्राइवेट स्कूल में नौकरी शुरू कर दी।
एकांश ने भी परिवार की मजबूरी को समझा और अपना पूरा ध्यान पढ़ाई पर दिया। पढ़ाई के दौरान ही बीटेक द्वितीय वर्ष में ही कोडिंग के लिए निजी कंपनी ने पांच महीने के लिए 25 हजार रुपये प्रति माह पर ऑनलाइन इंटर्नशिप पर रख लिया।
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इसके बाद जसपे कंपनी बंगलूरू की ओर से छह महीने के लिए 40 हजार रुपये प्रतिमाह पर एवं एक्सपीडिया ग्रुप में 42 हजार रुपये प्रतिमाह पर समर इंटर्नशिप की।
जून में एक्सपीडिया ग्रुप ऑफ कंपनी गुरुग्राम ने समर इंटर्नशिप के दौरान ही इनके कार्य को देखते हुए 42 लाख रुपये के पैकेज का ऑफर दिया। वर्तमान में एकांश एक्सपीडिया ग्रुप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। बीटेक आईटी में टाॅपर की जानकारी होने पर वह मां और बहन के साथ दीक्षांत समारोह में शामिल होने पहुंचे थे।
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दीक्षांत में राज्यपाल के हाथों मेडल पाता देख मां की आंखें भर आईं। एकांश ने बताया कि उनके पिता की मधुमेह बीमारी से आंख की रोशनी चली गई है। उनके आंख की रोशनी लाना उनकी प्राथमिकता है। अभी तक पीलीभीत में ही पिता का इलाज करा रहे थे। अब चेन्नई में इलाज कराएंगे।