एक बार फिर 'लाडले' ने उछाले खाकी पर छींटें, कई कांड में पुलिस वालों के करीबियों का नाम आ रहा सामने

अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Updated Tue, 22 Sep 2020 10:10 AM IST
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : amar ujala

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अपराध पर लगाम कसने की जिम्मेदारी उठाने वाले पुलिस अफसर, कर्मचारियों के ‘लाल’ ही उनकी वर्दी को दागदार बना रहे हैं। सोमवार को मोहद्दीपुर में ताबड़तोड़ फायरिंग में भी कुछ पुलिस वालों के लाडलों के नाम सामने आए हैं। इसके पहले भी इस तरह की घटनाओं में पुलिस वालों के बेटों और रिश्तेदारों के नाम सामने आ चुके हैं।
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मनोविज्ञानी और समाजशास्त्री इस चलन को खतरनाक बताते हैं। वे कहते हैं कि लूट, गोली, हत्या जैसे अपराध में पुलिसवालों के बेटे का शामिल होना व्यवस्था को चुनौती है। ये लोग कानून को नजदीक से जानते और समझते हैं। इसका बड़ा दुरुपयोग संभव है। उदाहरण के इन केस को पढ़ें...
केस एक
पादरी बाजार के पास बुजुर्ग महिला से सितंबर 2017 में एक लाख रुपये लूटे गए। पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज किया। इस बीच पुलिस ने आसपास की सीसीटीवी फुटेज खंगाली और प्रवीन त्रिपाठी को आरोपी बनाया। प्रवीन को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। छानबीन आगे बढ़ी तो पता चला कि प्रवीन के पिता दरोगा हैं। उनकी गोरखपुर में ही तैनाती है। बेटे का नाम अपराध में आने से दरोगा परेशान हैं। वह कह रहे हैं कि गलती सुधारने का एक मौका मिल जाए।

केस दो
संगम चौक शाहपुर में 7 अक्तूबर 2017 को जुए का अड्डा पकड़ा गया। इस मामले बर्खास्त दरोगा सोनू के साथ ही गोंडा में तैनात एक दरोगा के बेटे टं्िवकल को गिरफ्तार किया गया। पुलिस का आरोप है कि ट्विंकल जमीन कब्जाने में संलिप्त रहा है। अब जुए का अड्डा चलाने में पकड़ा गया। उसके और भी आपराधिक इतिहास खंगाले जा रहे हैं।

केस तीन
खोराबार के रानीडीहा में रहने वाले दरोगा के बेटे को छेड़खानी और लूट के आरोप में जेल भेजा गया। दरोगा ने बदनामी का हवाला दिया और माफीनामा देकर अफसरों से बेटे को छुड़ाने की गुजारिश की लेकिन मामला उलटा पड़ गया। बेटे को जेल जाना ही पड़ा। इसी तरह शाहपुर में पॉलीटेक्निक की छात्रा से छेड़छाड़ में एक वर्दीधारी के बेटे का नाम सामने आया। पुलिस ने मुकदमा कर आरोपी को जेल भेज दिया। यह मामला भी सितंबर 2017 का है।

 
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