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गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में खाली पड़े हैं 108 बेड, फिर भी वापस किए जा रहे मरीज
Thu, 06 Aug 2020 09:09 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Thu, 06 Aug 2020 09:09 PM IST
सार
- गंभीर मरीजों के लिए बेड सुरक्षित रखने का दे रहे हवाला
- निजी अस्पतालों में आठ से 13 हजार रुपये है रोजाना का शुल्क
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BRD medical college
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के कोरोना वार्ड में इस समय 108 बेड खाली हैं, लेकिन मरीजों को भर्ती करने की बजाय वापस कर दिया जा रहा है। वहीं प्राइवेट अस्पतालों में इलाज के लिए मरीजों को आठ से 13 हजार रुपये रोजाना खर्च करने पड़ रहे हैं। इससे मरीजों की मुश्किलें बढ़ गईं हैं।
मेडिकल कॉलेज के कोरोना वार्ड में कुल 200 बेड हैं, वर्तमान में वार्ड में केवल 92 मरीज भर्ती हैं। मरीज बड़ी उम्मीद से मेडिकल कॉलेज पहुंच रहे हैं लेकिन बेड खाली होते हुए भी उन्हें जगह नहीं दी जा रही है। पिछले दिनों एक राजनीतिक पार्टी के नेता को भी मेडिकल कॉलेज से वापस कर दिया गया था जिसके बाद उन्हें फातिमा अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
वहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। कोरोना संक्रमित मरीजों की परेशानी यह है कि तबीयत बिगड़ने पर निजी अस्पताल भी उन्हें मेडिकल कॉलेज ही रेफर कर रहे हैं लेकिन तबतक उनकी जेब पर भार काफी बढ़ जा रहा है। वहीं मेडिकल कॉलेज प्रशासन का कहना है कि बेड खाली हैं लेकिन उन्हें अति गंभीर मरीजों के लिए सुरक्षित रखा जा रहा है।
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बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. गणेश कुमार ने कहा कि बिना लक्षणों वाले मरीज लेवल वन के अस्पताल में भर्ती होने चाहिए। लक्षण वाले कोरोना संक्रमित मरीजों को भर्ती किया जा रहा है। आइसीयू में केवल 40 बेड हैं जिसमें से 36 पर मरीज भर्ती हैं। चार बेड इसलिए खाली रखे गए हैं कि वार्ड में भर्ती किसी मरीज की तबीयत अचानक खराब हो गई तो उसका इलाज किया जा सके।
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मेडिकल कॉलेज के कोरोना वार्ड में कुल 200 बेड हैं, वर्तमान में वार्ड में केवल 92 मरीज भर्ती हैं। मरीज बड़ी उम्मीद से मेडिकल कॉलेज पहुंच रहे हैं लेकिन बेड खाली होते हुए भी उन्हें जगह नहीं दी जा रही है। पिछले दिनों एक राजनीतिक पार्टी के नेता को भी मेडिकल कॉलेज से वापस कर दिया गया था जिसके बाद उन्हें फातिमा अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
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वहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। कोरोना संक्रमित मरीजों की परेशानी यह है कि तबीयत बिगड़ने पर निजी अस्पताल भी उन्हें मेडिकल कॉलेज ही रेफर कर रहे हैं लेकिन तबतक उनकी जेब पर भार काफी बढ़ जा रहा है। वहीं मेडिकल कॉलेज प्रशासन का कहना है कि बेड खाली हैं लेकिन उन्हें अति गंभीर मरीजों के लिए सुरक्षित रखा जा रहा है।
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बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. गणेश कुमार ने कहा कि बिना लक्षणों वाले मरीज लेवल वन के अस्पताल में भर्ती होने चाहिए। लक्षण वाले कोरोना संक्रमित मरीजों को भर्ती किया जा रहा है। आइसीयू में केवल 40 बेड हैं जिसमें से 36 पर मरीज भर्ती हैं। चार बेड इसलिए खाली रखे गए हैं कि वार्ड में भर्ती किसी मरीज की तबीयत अचानक खराब हो गई तो उसका इलाज किया जा सके।