नेपाल में नए नागरिकता विधेयक से मधेशियों का भविष्य अंधकारमय, कहा- समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन होगा तेज
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भारत नेपाल में वर्षो पुराने वैवाहिक रिश्ते अब होने में पेंच फंसता नजर आ रहा है। क्योंकि नेपाल सरकार का नया नागरिकता कानून मधेशियों की मुश्किलों को बढ़ा सकता है। भारतीय महिला से विवाह के बाद उसे साल बाद नागरिकता देने के प्राविधान से मधेशी समुदाय नाराज है। मधेशी नेता इस मसले को लेकर आंदोलन तेज करने के मूड में हैं।
नया नियम मधेशियों को स्वीकार नहीं है। सभी ने इस मसले पर क्रमशः तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। समाजवादी पार्टी रूपनदेही जिले के वरिष्ठ नेता इस्लाम खान ने बताया कि सविधान संशोधन करने के लिए मधेसी मोर्चा के लोग आंदोलन कर रहे हैं। मधेसी समुदाय को दरकिनार करते हुए उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। मधेशी समुदाय के खिलाफ ही विधेयक पारित किया जा रहा है। समस्या का समाधान नहीं हुआ आंदोलन तेज होगा।
भैरहवा विधायक संतोष पांडेय ने कहा कि मधेशियों के साथ भेदभाव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। 17 साल पूर्व नेपाल में जन्म लिए हुए बच्चों का नागरिकता मिल जाती थी। लेकिन अब क्यों नहीं दिया जाएगा। माता पिता नेपाल के नागरिक रहेंगे, जबकि उन्हीं का बेटा नागरिकता से बंचित हो जाएगा।
राष्ट्रीय जनता पार्टी रूपनदेही जिलाध्यक्ष अजय वर्मा ने कहा कि मधेसी नेताओं को आश्वासन देकर गुमराह किया गया। सरकार में दो तिहाई बहुमत होने के बाद भी मदेशी समुदाय के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। सरकार से मांग है कि भारतीय महिला के साथ विवाह होने पर नागरिकता में छूट दिया जाए।
नेपाल में ज्यादातर मधेशी हैं
पांच नंबर प्रदेश विधायक कल्पना पांडेय ने कहा कि नेपाल सरकार ने नागरिकता सहित अन्य सरकारी कोटा से मदेशियों को वंचित किया है। सरकार को भारतीय महिला से शादी के मामले में नागरिकता को लेकर छूट देने की जरूरत है। सीमावर्ती नेपाल के तराई क्षेत्र में भारत से लगती 22 जिलों के लगभग एक करोड़ पचास लाख लोग भारत के सीमावर्ती क्षेत्र में शादी विवाह करते हैं। इस कानून से ज्यादातर मधेशियों को परेशानी होगी।
नेपाल में मधेशी समुदाय की आबादी का आधा यानी पचास प्रतिशत मधेशी हैं। फिर भी मधेशी नागरिक मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। नेपाल में राणा शाशको के बाद पहाड़ी मूल के लोगों की सरकार रही है। जिसमें नेपाल का मधेशी बाहुल्य क्षेत्र तराई इलाका पहाड़ के मुकाबले विकास के नाम पर बहुत ही पिछड़ा और अशिक्षित हैं। लोग तराई क्षेत्र में या तो खेती करते हैं या काम के सीलसीले में घरों से निकल कर भारत या विदेशों का रुख करते हैं।
22 जिलो के मधेशी होंगे प्रभावित
नेपाल के भारत नेपाल सीमावर्ती क्षेत्र के रूपनदेही, नवलपरासी, कपिलवस्तु, दांग, बाके ,बर्दिया, कैलाली, बीरगंज, सर्लाही, सुनसरी, मोरंग समेत 22 जिलों के लोग ज्यादा प्रभावित होंगे। इसके साथ ही भारत के अलावा अन्य देशों में शादी करने वाले नेपाली नागरिकों को इसी कानून का पालन करना होगा।
तराई के 22 जिलों में रहने वाले मधेशियों की बोली-भाषा, खान-पान, रहन-सहन पहाड़ी नेपालियों से अलग है। नेपाल की सदन में 33 सांसद मधेशी हैं, इसके बाद भी नेपाल के संविधान में मदेशी समुदाय को कोई जगह नहीं मिल पाई। जिसको लेकर चार साल पूर्व करीब छह माह चले मदेशियों के आंदोलन के बाद भी उनकी सुनवाई नही हो सकी।
भारत और नेपाल का वैवाहिक संबंध प्रभावित होगा
नेपाली नागरिक के साथ विवाह करने के बाद उसे सात साल बाद नेपाल की नागरिकता मिलेगी। उनसे होने वाले संतान को भी सरकार ने नागरिकता देने का फैसला किया है। उन्होंने बताया कि भारत के साथ हम लोगों का सदियों पुराना रिश्ता है। इस कानून के बनने के बाद भारत और नेपाल का वैवाहिक संबंध प्रभावित होगा।