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श्रीमद्भागवत कथा के पांचवां दिन: ईश्वर पर विश्वास करें, नहीं रुकेगा कोई कार्य: पंडित बालक दास
Tue, 07 Jan 2020 07:16 PM IST
विजय जैन
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
Published by: विजय जैन
Updated Tue, 07 Jan 2020 07:16 PM IST
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श्रोताओं को कथा सुनाते पंडित बालक दास।
- फोटो : अमर उजाला
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मां भक्ति ज्ञान गंगा सेवा संस्थान की ओर से भव्या मैरेज हाउस आजाद चौक पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन मंगलवार को पंडित बालक दास ने श्रोताओं को पुतना उद्धार और श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं की कथा सुनाई।
कथा व्यास ने कहा कि ईश्वर के ऊपर पूरा भरोसा करिए कि अगर तुम ईश्वर के प्रति समर्पित रहेंगे तो वह आपके किसी भी कार्य को रुकने नहीं देंगे। सबसे बड़ी समस्या यह है कि कभी हमें विश्वास होता है तो कभी नहीं। विश्वास में सबसे बड़ी बात यह है कि जो भी कुछ जीवन में घटित होता है, अर्थात अच्छा या बुरा। एक बात अवश्य समझ लें कि भगवान ने आपके लिए अच्छा ही किया है, बुरा नहीं। भगवान के भक्त कभी किसी से शिकायत नहीं करते।
अपने कर्म को ईमानदारी से करते चले जाइए। जो होता चला जाए, उसे ठाकुर जी की मर्जी समझकर स्वीकार करिए। भगवान से कभी यह प्रश्न मत करिए कि उनके साथ ऐसा क्यों हुआ। जब आप यह प्रश्न करते हैं तो उसी समय आपको भगवान पर संदेह होता है कि वह है कि नहीं। जो जीव भगवान पर दृढ़ विश्वास करता है, ईश्वर उसे कभी अकेला नहीं छोड़ते। जिस दिन आप ठाकुर जी के हो जाएंगे, उस दिन पूरा संसार आपका हो जाएगा। हमेशा अपने भगवान पर पूरा भरोसा रखे। गुरु, ब्राह्मण, संत और भगवान सभी हृदय से प्रसन्न होते हैं, न कि आपकी की गई व्यवस्था से। सिर्फ नोट या पद के बल पर अगर आशीर्वाद मांगेंगे तो नहीं मिलेगा। जीवन में विनम्रता बहुत महत्वपूर्र्ण है।
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कथा व्यास ने कहा कि ईश्वर के ऊपर पूरा भरोसा करिए कि अगर तुम ईश्वर के प्रति समर्पित रहेंगे तो वह आपके किसी भी कार्य को रुकने नहीं देंगे। सबसे बड़ी समस्या यह है कि कभी हमें विश्वास होता है तो कभी नहीं। विश्वास में सबसे बड़ी बात यह है कि जो भी कुछ जीवन में घटित होता है, अर्थात अच्छा या बुरा। एक बात अवश्य समझ लें कि भगवान ने आपके लिए अच्छा ही किया है, बुरा नहीं। भगवान के भक्त कभी किसी से शिकायत नहीं करते।
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अपने कर्म को ईमानदारी से करते चले जाइए। जो होता चला जाए, उसे ठाकुर जी की मर्जी समझकर स्वीकार करिए। भगवान से कभी यह प्रश्न मत करिए कि उनके साथ ऐसा क्यों हुआ। जब आप यह प्रश्न करते हैं तो उसी समय आपको भगवान पर संदेह होता है कि वह है कि नहीं। जो जीव भगवान पर दृढ़ विश्वास करता है, ईश्वर उसे कभी अकेला नहीं छोड़ते। जिस दिन आप ठाकुर जी के हो जाएंगे, उस दिन पूरा संसार आपका हो जाएगा। हमेशा अपने भगवान पर पूरा भरोसा रखे। गुरु, ब्राह्मण, संत और भगवान सभी हृदय से प्रसन्न होते हैं, न कि आपकी की गई व्यवस्था से। सिर्फ नोट या पद के बल पर अगर आशीर्वाद मांगेंगे तो नहीं मिलेगा। जीवन में विनम्रता बहुत महत्वपूर्र्ण है।
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