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Gorakhpur News: बिजली चमके, गरज न गूंजे... इसके पीछे छिपा है विज्ञान
Sat, 08 Aug 2026 02:18 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Sat, 08 Aug 2026 02:18 AM IST
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गोरखपुर। आसमान में बार-बार बिजली चमकती दिखाई दे लेकिन उसकी गरज सुनाई न दे तो लोग अक्सर इसे रहस्यमयी घटना मान लेते हैं। हालांकि, इसके पीछे पूरी तरह वैज्ञानिक कारण है।
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि अधिकांश मामलों में यह दूर स्थित आंधी-तूफान या बादलों के भीतर होने वाली बिजली की वजह से होता है। शुक्रवार को हुई इस प्रकार की घटना के बाद बताया कि यदि बिजली 20 से 100 किलोमीटर या उससे अधिक दूरी पर गिर रही हो तो उसकी चमक तुरंत दिखाई देती है। प्रकाश की गति लगभग तीन लाख किलोमीटर प्रति सेकंड होती है। वहीं गरज की आवाज ध्वनि के रूप में केवल लगभग 343 मीटर प्रति सेकंड की गति से चलती है। लंबी दूरी तय करने के दौरान ध्वनि की ऊर्जा कमजोर पड़ जाती है। कई बार आवाज सुनाई नहीं देती या बेहद हल्की सुनाई देती है।
तापमान, आर्द्रता, हवा की दिशा और वायुमंडल की विभिन्न परतें भी ध्वनि को मोड़ या कमजोर कर सकती हैं। बिजली चमकने के दौरान प्लाज्मा का तापमान लगभग 30,000 केल्विन तक पहुंच सकता है, जो सूर्य की सतह से भी अधिक होता है। इस अत्यधिक तापमान से आसपास की हवा तेजी से फैलती है और आघात तरंग (शॉक वेव) उत्पन्न होती है, जिसे हम गरज के रूप में सुनते हैं। इसलिए यदि लगातार एक ही दिशा में बिजली चमक रही हो और गरज सुनाई न दे तो इसका सबसे संभावित कारण दूर स्थित तूफान और बादलों के भीतर हो रही विद्युत गतिविधि होती है।
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खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि अधिकांश मामलों में यह दूर स्थित आंधी-तूफान या बादलों के भीतर होने वाली बिजली की वजह से होता है। शुक्रवार को हुई इस प्रकार की घटना के बाद बताया कि यदि बिजली 20 से 100 किलोमीटर या उससे अधिक दूरी पर गिर रही हो तो उसकी चमक तुरंत दिखाई देती है। प्रकाश की गति लगभग तीन लाख किलोमीटर प्रति सेकंड होती है। वहीं गरज की आवाज ध्वनि के रूप में केवल लगभग 343 मीटर प्रति सेकंड की गति से चलती है। लंबी दूरी तय करने के दौरान ध्वनि की ऊर्जा कमजोर पड़ जाती है। कई बार आवाज सुनाई नहीं देती या बेहद हल्की सुनाई देती है।
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तापमान, आर्द्रता, हवा की दिशा और वायुमंडल की विभिन्न परतें भी ध्वनि को मोड़ या कमजोर कर सकती हैं। बिजली चमकने के दौरान प्लाज्मा का तापमान लगभग 30,000 केल्विन तक पहुंच सकता है, जो सूर्य की सतह से भी अधिक होता है। इस अत्यधिक तापमान से आसपास की हवा तेजी से फैलती है और आघात तरंग (शॉक वेव) उत्पन्न होती है, जिसे हम गरज के रूप में सुनते हैं। इसलिए यदि लगातार एक ही दिशा में बिजली चमक रही हो और गरज सुनाई न दे तो इसका सबसे संभावित कारण दूर स्थित तूफान और बादलों के भीतर हो रही विद्युत गतिविधि होती है।
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